इटली की लोक कथाएँ–1 : 11 एक राजकुमार जिसने मेंढकी से शादी की // सुषमा गुप्ता

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एक बार एक राजा था जिसके तीन बेटे थे और उसके तीनों बेटे शादी के लायक थे।

जिससे कि उनकी पत्नियाँ चुनने में किसी तरह की झगड़ा न हो इसलिये राजा ने कहा — “तुम लोग अपनी अपनी गुलेलों से जितना दूर पत्थर फेंक सकते हो फेंको और जिसका पत्थर जहाँ पड़ेगा वहीं से तुम्हारी पत्नी चुनी जायेगी।”

सो तीनों लड़कों ने अपनी अपनी गुलेलें उठा लीं और उसमें पत्थर रख कर बहुत ज़ोर से मारा। सबसे बड़े बेटे का पत्थर एक बेकरी की छत पर पड़ा सो उसकी शादी उस दुकान के मालिक की बेटी से तय कर दी गयी।

दूसरे बेटे का पत्थर एक कपड़ा बुनने वाले के घर पर जा कर गिरा सो उसकी शादी उस कपड़ा बुनने वाले की लड़की से तय कर दी गयी। पर सबसे छोटे बेटे का पत्थर एक गड्ढे में गिर पड़ा।

गुलेल चलाने के बाद तुरन्त ही हर बेटा अपनी अपनी पत्नी को अँगूठी पहनाने के लिये दौड़ पड़ा।

सबसे बड़े लड़के की पत्नी बहुत सुन्दर थी। बीच वाले लड़के की पत्नी बहुत गोरी थी। उसके बाल और उसकी खाल दोनों रेशमी थे।

पर सबसे छोटा लड़का अपनी पत्नी को उस गड्ढे में ढूँढता रहा ढूँढता रहा पर एक मेंढकी के अलावा उस गड्ढे में उसको और कुछ मिला ही नहीं।

वे सब अपनी अपनी पत्नियों के बारे में राजा को बताने के लिये घर लौटे तो राजा बोला — “अब जिस किसी की भी पत्नी सबसे अच्छी होगी राजगद्दी उसी को मिलेगी। सो अब उन लड़कियों का इम्तिहान शुरू होता है।”

इतना कह कर उसने अपने तीनों बेटों को कुछ रुई दी और कहा कि वे उसको अपनी होने वाली पत्नियों को दे दें और वे उसको तीन दिन के अन्दर अन्दर कात कर राजा के पास लायेंगी। इससे वह यह देखना चाहता था कि उन तीनों में से कौन सबसे अच्छा धागा कातती थी।

सब बेटे अपनी अपनी होने वाली पत्नियों के पास गये और उनको वह रुई दे कर उनसे तीन दिन के अन्दर अन्दर सबसे अच्छा सूत कातने के लिये कहा।

सबसे छोटा बेटा बहुत ही परेशान था कि वह कैसे उस रुई को ले कर अपनी मेंढकी पत्नी के पास जाये और उससे सूत कातने के लिये कहे।

पर फिर भी वह उस गड्ढे के पास गया और अपनी पत्नी को पुकारा — “मेंढकी ओ मेंढकी।”

“मुझे कौन पुकार रहा है?”

लड़का बोला — “मैं तुम्हारा प्यार जो तुमको प्यार नहीं करता।”

“अगर तुम मुझको प्यार नहीं करते तो न करो पर बाद में तुम मुझे प्यार जरूर करोगे जब मैं बहुत सुन्दर हो जाऊँगी।”

वह मेंढकी पानी से कूद कर बाहर आ गयी और बाहर आ कर एक पत्ते पर बैठ गयी।

राजा के बेटे ने उसको अपने पिता की दी हुई रुई देते हुए उससे कहा — “हम तीन भाई हैं। मेरे दोनों भाइयों की शादी तो लड़कियों से होने वाली है और मेरी शादी तुमसे होगी। मेरे पिता ने कहा है कि हममें से जिस किसी की होने वाली पत्नी सबसे होशियार होगी उनका राज्य उसी को मिलेगा।

इम्तिहान के लिये अभी उन्होंने यह रुई दी है और कहा है कि सब लड़कियाँ रुई का सूत कातें। मैं देखना चाहता हूँ कि कौन सबसे अच्छा सूत कातती है। मैं इसका कता हुआ सूत लेने के लिये तीन दिन बाद आऊँगा।”

तीन दिन के बाद राजा के दोनों बड़े बेटे अपनी अपनी होने वाली पत्नियों के पास उनके काते हुए सूत लेने के लिये गये। बेकरी वाले की लड़की ने बहुत ही सुन्दर सूत काता था और कपड़ा बुनने वाले की लड़की तो इस काम में माहिर थी सो उसका कता हुआ सूत तो रेशम की तरह दिखायी देता था।

पर हमको तो राजा के सबसे छोटे बेटे की चिन्ता है कि उसका क्या हुआ? वह उस गड्ढे के पास गया और पुकारा — “ओ मंेढकी, ओ मेंढकी।”

“मुझे किसने पुकारा?”

“तुम्हारा प्यार जो तुमको प्यार नहीं करता।”

“अगर तुम मुझको प्यार नहीं करते तो न सही। कोई बात नहीं। बाद में तुम करोगे जब मैं बहुत सुन्दर हो जाऊँगी।”

कह कर वह मेंढकी पानी में से कूद कर बाहर आ कर एक पत्ते पर बैठ गयी। उसके मुँह में एक अखरोट था।

उसने वह अखरोट अपने पति को दिया और उसको ले जा कर अपने पिता को देने के लिये कहा। उसने यह भी कहा कि वह उनसे कहे कि वह उस अखरोट को तोड़ लें।

वह लड़का उस अखरोट को अपने पिता को देने में हिचकिचा रहा था क्योंकि उसके दोनों भाई बहुत सुन्दर कता हुआ सूत लाये थे।

खैर फिर भी हिम्मत करके उसने अपना अखरोट अपने पिता को दे दिया। पिता ने जिसने पहले ही अपने दोनों बेटों की पत्नियों के कामों को देख रखा था कुछ शक से उस अखरोट को तोड़ा।

दोनों बड़े भाई भी देख रहे थे कि उनका छोटा भाई यह कैसा सूत कतवा कर लाया है।

पर सब आश्चर्यचकित रह गये जब उस अखरोट में से इतना बढ़िया धागा निकला जितना कि मकड़ी का जाला होता है और इतना सारा निकला कि उस धागे से राजा का सारा कमरा ढक गया।

राजा बोला — “पर इसका कोई ओर छोर तो कहीं दिखायी ही नहीं दे रहा।” जैसे ही ये शब्द उसके मुँह से निकले वह धागा खत्म हो गया।

मेंढकी के हाथ का कता धागा इतना बढ़िया होने पर भी पिता को एक मेंढकी को रानी बनाने का विचार कुछ जमा नहीं सो उसने एक और इम्तिहान लेने का विचार किया। राजा की शिकारी कुतिया ने तभी तभी तीन बच्चों को जन्म दिया था।

उन तीनों बच्चों को उसने अपने तीनों बेटों को दिया और बोला — “इनको अपनी अपनी होने वाली पत्नियों के पास ले जाओ और उनको दे दो। फिर एक महीने बाद उनके पास जाना और जिसने भी अपने कुत्ते की सबसे अच्छी देखभाल की होगी वही इस राज्य की रानी बनेगी।”

सो उसके तीनों बेटों ने वे कुत्ते के बच्चे लिये और उनको ले जा कर अपनी अपनी होने वाली पत्नियों को दे आये।

एक महीने बाद वे फिर गये तो बेकरी वाले की बेटी का कुत्ता खूब बड़ा और मोटा हो चुका था क्योंकि उसको वहाँ हर तरह की डबल रोटी खाने को मिलती थी।

कपड़ा बुनने वाली का कुत्ता इतना बड़ा और मोटा नहीं हो पाया था क्योंकि उसको उतना खाना नहीं मिल पाया था। वह आधा भूखा सा था।

सबसे छोटा बेटा एक छोटा सा बक्सा लिये चला आ रहा था। राजा ने उस बक्से को खोला तो उसमें से एक बहुत छोटा सा बड़े बड़े बालों वाला कुत्ता कूद पड़ा।

वह छोटा सा कुत्ता बहुत सुन्दर लग रहा था और उसके बालों में से खुशबू आ रही थी। वह अपने पिछले पैरों पर खड़ा हो कर आगे बढ़ रहा था।

अब की बार राजा बोला — “इसमें मुझे कोई शक नहीं लगता कि मेरा सबसे छोटा बेटा ही राजा बनेगा और वह मेंढकी रानी बनेगी।”

सो राजा ने अपने तीनों बेटों की शादी एक ही दिन करने का फैसला किया।

दोनों बड़े भाई फूलों और मोतियों की माला से सजायी गयी और चार घोड़ों से खींची गयी गाड़ियों में सवार हो कर अपनी अपनी होने वाली पत्नियों को लाने गये। वहाँ पंखों और जवाहरातों से सजी हुई वे लड़कियाँ उन गाड़ियों में सवार हुईं और शादी के लिये महल चल दीं।

सबसे छोटा लड़का उस गड्ढे के पास गया जहाँ वह मेंढकी एक अंजीर के पत्ते से बनी और चार घोंघों से खींची जा रही गाड़ी में बैठी उसका इन्तजार कर रही थी।

राजकुमार आगे आगे चला और वे घोंघे अंजीर के पत्ते पर मेंढकी को बिठा कर उसके पीछे पीछे चले। थोड़ी थोड़ी दूर पर उस लड़के को रुकना पड़ता था ताकि वे घोंघे उसके साथ तक आ जायें।

इतनी धीरे धीरे चलने की वजह से एक बार तो वह राजकुमार सो ही गया था। और जब उसकी आँख खुली तो एक सोने की गाड़ी उसके बराबर में आ कर रुकी।

उस गाड़ी को दो सफेद घोड़े खींच रहे थे। उसमें अन्दर मखमल के गद्दे लगे हुए थे और उसमें सूरज से भी ज़्यादा चमकदार एक लड़की बैठी हुई थी। उसने पन्ने जैसे हरे रंग की पोशाक पहनी हुई थी।

उस लड़के ने पूछा — “तुम कौन हो?”

“मैं मेंढकी हूँ, तुम्हारी पत्नी।”

वह तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं कर सका कि वही लड़की उसकी मेंढकी थी। उस लड़की ने गहनों का एक बक्सा खोला और उसमें से अंजीर का एक पत्ता निकाला और घोंघों के चार खोल निकाल कर उस लड़के को दिखाये।

फिर वह उस लड़के से बोली — “मैं एक राजकुमारी थी जिसको एक परी ने जादू से एक मेंढकी बना दिया था। मेरे आदमी के रूप में आने का केवल एक ही तरीका था कि कोई राजकुमार मुझसे उसी शक्ल में शादी करने को तैयार हो जाये जिसमें मैं थी।

तुम मुझसे शादी करने को तैयार हो गये तो मैं अपने असली रूप में आ गयी।”

दोनों बड़े भाई अपने छोटे भाई से जल रहे थे। जब राजा को इस बात का पता चला तो वह अपने दोनों बड़े बेटों से बोला जिसने भी गलत पत्नी चुनी है वह राज्य करने के लायक नहीं है।

इसलिये उसने अपने सबसे छोटे बेटे और उसकी मेंढकी पत्नी को उस राज्य का राजा और रानी बना दिया।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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