शनिवार, 30 सितंबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–1 : 13 बारह बैल // सुषमा गुप्ता

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एक बार 12 भाई थे जिनकी एक बार अपने माता पिता से लड़ाई हो गयी और वे घर छोड़ कर चले गये। उन्होंने जंगल में जा कर अपना एक घर बना लिया और वहाँ रह कर बढ़ई का काम करके अपनी ज़िन्दगी गुजारने लगे।

इस बीच में उनके माता पिता के एक बेटी हो गयी। अपने 12 भाइयों के जाने के बाद वह अपने माता पिता के लिये बहुत खुशी ले कर आयी। बच्ची बिना अपने भाइयों को देखे हुए ही बड़ी होती रही।

वह उनके बारे में केवल सुनती ही थी। अब क्योंकि उसने उनको देखा नहीं था इसलिये उसकी उनको देखने की बहुत इच्छा थी।

एक दिन वह एक फव्वारे में नहाने गयी तो सबसे पहले उसने अपने मूँगे का हार उतार कर वहाँ पास के एक पेड़ की एक डंडी पर टाँग दिया। तभी एक रैवन आया और उस हार को उठा कर ले उड़ा।

लड़की अपना हार लेने के लिये उसके पीछे पीछे जंगल में दौड़ी तो वह अपने भाइयों के मकान में पहुँच गयी।

वह जब वहाँ पहुँची तो उस समय उस घर में कोई नहीं था। सो उसने वहाँ नूडिल्स बनाये और चमचे से अपने भाइयों की प्लेट में रख दिये। नूडिल्स उनकी प्लेट में रख कर वह एक पलंग के नीचे छिप गयी।

जब उसके भाई लौटे तो उन्होंने देखा कि उनके खाने की मेज पर उनकी प्लेटों में नूडिल्स बने रखे थे। वे सब मेज पर बैठ गये और उन्होंने वे नूडिल्स बड़े स्वाद ले ले कर खाये।

पर उनको खा कर वे बेचैन हो गये और शक करने लगे कि कहीं किसी जादूगरनी ने तो उनके ऊपर कोई जादू न कर दिया हो क्योंकि उस जंगल में बहुत सारी जादूगरनियाँ रहतीं थीं। या फिर किसी ने उनके साथ कोई मजाक तो नहीं किया।

अगले दिन उन भाइयों ने अपने में से एक भाई यह देखने के लिये घर में ही छोड़ दिया कि यह काम किसने किया था।

वह भाई देखता रहा कि यह काम किसने किया तो उसने देखा कि एक लड़की एक पलंग के नीचे से बाहर आयी और वह रसोईघर की तरफ खाना बनाने चली तो उसने उसको पकड़ लिया।

पूछने पर उसको पता चला कि वह लड़की तो उनकी बहिन है। शाम को जब उसके भाई आये तो उसने उनको बताया कि वह तो उनकी बहिन है तो उन्होंने उसके साथ दोस्ती कर ली और उससे कहा कि वह उनके साथ ही रहे।

पर वे उसको बार-बार यही कहते रहे कि वह जंगल में किसी से न बोले क्योंकि वहाँ बहुत सारी जादूगरनियाँ रहती हैं।

एक शाम जब वह लड़की शाम के खाने की तैयारी कर रही थी तो उसने देखा कि उसकी आग बुझ गयी। समय बचाने के लिये वह पास के मकान से आग लेने के लिये गयी।

उस मकान में एक बुढ़िया रहती थी। उसने दया करके उसको आग तो दे दी पर बोली कि इस आग देने के बदले में अगले दिन वह उसके पास आयेगी और उसकी एक उँगली में से उसका थोड़ा सा खून चूस लेगी।

लड़की बोली — “मैं किसी को अपने घर में नहीं घुसा सकती क्योंकि मेरे भाइयों ने मना किया है।”

वह बुढ़िया बोली — “तुमको दरवाजा खोलने की जरूरत नहीं है। जब मैं दरवाजा खटखटाऊँ तो बस तुम अपनी छोटी उँगली उसकी चाभी वाले छेद में से बाहर निकाल देना और मैं उस उँगली में से तुम्हारा खून चूस लूँगी।”

सो वह बुढ़िया अब हर शाम उस लड़की का खून चूसने के लिये उसके घर आने लगी। उधर वह लड़की उस खून चूसने की वजह से पीली और और ज़्यादा पीली पड़ती चली गयी।

उसके भाइयों ने यह देखा तो उन्होंने उससे कई सवाल पूछे। पहले तो डर के मारे उसने उनको बताया नहीं पर फिर उसने मान लिया कि वह बराबर के मकान में रहने वाली बुढ़िया के घर आग माँगने गयी थी और उसके बदले में अपना खून देने का वायदा किया था। अब वह बुढ़िया रोज वहाँ आ कर उसका खून चूस जाती थी।

भाइयों ने सोचा कि हमको अपनी बहिन की देखभाल करनी चाहिये। उस शाम को जब वह बुढ़िया उनके घर आयी और उनका दरवाजा खटखटाया तो उस लड़की ने अपनी उँगली उस चाभी के छेद में से बाहर नहीं निकाली।

यह देख कर उस बुढ़िया ने बिल्ली के घर में आने वाले रास्ते से अपना सिर उस घर के अन्दर घुसाया तो एक भाई ने जिसके पास एक घास काटने वाला बड़ा सा चाकू था उस चाकू से उसका सिर काट डाला। उसके बाद उसने उसका मरा हुआ शरीर एक घाटी में डाल दिया।

कुछ दिन बाद एक दिन जब वह लड़की फव्वारे पर गयी थी तो वहाँ वह एक और बुढ़िया से मिली। वह बुढ़िया सफेद कटोरे बेच रही थी। वे कटोरे उसको बहुत सुन्दर लगे।

जब उस बुढ़िया ने उस लड़की से वे सफेद कटोरे खरीदने के लिये कहा तो लड़की ने कहा — “अफसोस मेरे पास पैसे नहीं हैं मैं आपके ये कटोरे नहीं खरीद सकती।”

इस पर वह बुढ़िया बोली — “तब मैं तुमको यह कटोरे मुफ्त में ही दे देती हूँ।” और उसने वे 12 कटोरे उस लड़की को मुफ्त में ही दे दिये। वह लड़की उनको ले कर घर आ गयी।

जब उसके भाई शाम को काम से प्यासे लौटे तो उन्होंने 12 नये कटोरों में पानी भरा देखा। वे प्यासे तो थे ही तुरन्त ही उन कटोरों में से पानी पी गये। वे कटोरे जादुई कटोरे थे उनमें से पानी पी कर तुरन्त ही वे सब बैल बन गये।

उसका बारहवाँ भाई कम प्यासा था सो उसने बस पानी को केवल मुँह ही लगाया था पिया नहीं था इसलिये वह बैल नहीं बना वह केवल एक मेंमने में बदल गया।

अब वह लड़की वहाँ अकेली रह गयी – उसके 11 भाई बैल बन गये थे और एक भाई मेमना बन गया था। अब वह उन सबको खिलाती पिलाती थी और उनकी देख भाल करती थी।

एक बार एक राजकुमार शिकार खेलते खेलते उस जंगल में रास्ता भूल गया और इधर उधर भटकता हुआ उस लड़की के घर तक आ पहुँचा। वहाँ उसको देख कर वह उससे प्रेम करने लगा।

उसने उससे शादी करने के लिये कहा तो उस लड़की ने कहा कि उसको अपने भाइयों की देखभाल करनी है और वह उनको इस तरह अकेला नहीं छोड़ सकती थी।

राजकुमार समझ गया सो वह उस लड़की को, उन 11 बैलों को और एक मेंमने सबको अपने महल में ले गया।

वहाँ जा कर उसने लड़की को तो अपनी राजकुमारी पत्नी बना लिया और 11 बैलों और एक मेमने को एक संगमरमर के बड़े से कमरे में रख दिया। वहाँ उनके लिये खाने के लिये सोने के बरतन थे।

पर जंगल की जादूगरनियों ने भी अपनी कोशिशें नहीं छोड़ीं। एक दिन राजकुमारी अपने मेमने भाई के साथ अंगूर के बागीचे में टहल रही थी।

वह उस मेमने को हमेशा ही साथ रखती थी कि एक बुढ़िया उसके पास आयी और बोली — “ओ मेरी अच्छी राजकुमारी, क्या तुम मुझे तुम थोड़े से अंगूर दोगी?”

“हाँ हाँ क्यों नहीं। वह उधर हैं अंगूर के पेड़, आप अपने आप तोड़ लें।”

“मैं उतने ऊँचे तक नहीं पहुँच सकती। तुम ही तोड़ दो न थोड़े से अंगूर मेरे लिये।”

“ठीक है। अभी तोड़ती हूँ।” कह कर उसने अंगूर के एक गुच्छे की तरफ हाथ बढ़ाया और वह वह गुच्छा तोड़ने ही वाली थी कि एक दूसरे गुच्छे की तरफ इशारा करते हुए वह बुढ़िया बोली — “यह नहीं, वह वाला तोड़ दो। वह मुझे ज़्यादा पका लग रहा है।”

यह गुच्छा एक तालाब के ऊपर की तरफ लगा हुआ था सो उसको तोड़ने के लिये राजकुमारी को उस तालाब की दीवार पर चढ़ना पड़ता।

वह उस गुच्छे को तोड़ने के लिये उस तालाब की दीवार पर चढ़ी तो उस बुढ़िया ने उसे धक्का दे दिया और वह उस तालाब में गिर पड़ी। लड़की उस तालाब में गिरते ही चिल्लाने लगी पर उसकी वह आवाज बहुत ही घुटी घुटी थी।

यह देख कर उस मेमने ने चिल्लाना शुरू कर दिया और उस तालाब के चारों तरफ घूमने लगा। पर किसी को भी यह समझ में नहीं आया कि वह क्या कहना चाह रहा था और न ही किसी को राजकुमारी की घुटी-घुटी आवाजें सुनायी दीं।

इस बीच जादूगरनी ने राजकुमारी का रूप रख लिया और राजकुमारी के बिस्तर में जा लेटी। जब राजकुमार घर आया तो उसने राजकुमारी से पूछा — “अरे तुम यहाँ बिस्तर में? इस समय तुम यहाँ बिस्तर में क्या कर रही हो? तुम्हारी तबियत तो ठीक है?”

वह नकली राजकुमारी बोली — “नहीं आज मेरी तबियत ठीक नहीं है मुझे आज मेमने का थोड़ा सा माँस खाना है। मेरे लिये उस मेंमने को मार दो जो बाहर चिल्लाता घूम रहा है।”

राजकुमार बोला — “क्या? क्या तुमने मुझसे कुछ दिन पहले ही यह नहीं कहा था कि यह मेमना तुम्हारा भाई है और अब तुम उसको खाना चाहती हो?”

जादूगरनी तो अपने ये शब्द कह कर पछतायी। अब वह कुछ नहीं कह सकती थी। राजकुमार को भी लगा कि कहीं कोई गड़बड़ है सो वह तुरन्त ही बागीचे में गया।

वहाँ उसने उस चिल्लाते हुए मेमने को देखा तो उसके पीछे-पीछे चल दिया। वह मेमना उसको तालाब तक ले गया। तब राजकुमार ने वहाँ राजकुमारी की रोने की आवाज सुनी।

वह चिल्ला कर बोला — “अब तुम यहाँ तालाब में क्या कर रही हो तुमको तो मैं अभी-अभी बिस्तर में छोड़ कर आया हूँ।”

“पर मैं तो इस तालाब में सुबह से ही पड़ी हुई हूँ। एक जादूगरनी ने मुझे इस तालाब में धकेल दिया था।”

राजकुमार ने राजकुमारी को तालाब में से तुरन्त ही निकाल लिया। वह जादूगरनी पकड़ी गयी तो राजकुमार ने उसको जलवा दिया। जब वह उस आग में जल रही थी तो वे बैल और मेमना धीरे-धीरे आदमियों में बदलते जा रहे थे।

तभी राजकुमार के महल को बहुत सारे बड़े साइज के लोगों ने घेर लिया। असल में वे सब वे राजकुमार थे जिनको उस जादूगरनी ने बड़े साइज़ के लोगों में बदल दिया था। जादूगरनी के मरने के बाद वे सब वहाँ आ गये थे और अब वे सभी राजकुमारों के रूप में बदलते जा रहे थे।

इसके बाद उस लड़की की शादी उस राजकुमार से हो गयी और वे सब खुशी-खुशी रहने लगे।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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