बुधवार, 13 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 1 - : 15 रैवन की पहले आदमी से मुलाकात // सुषमा गुप्ता

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रैवन ने दुनिया कैसे बनायी, इस बारे में कई कथाएँ कही जाती हैं। कुछ कथाएँ तो यहाँ तक कहती हैं कि पहला आदमी भी मिट्टी से उसी ने बनाया। देखें यह कहानी क्या कहती है।

जब बाढ़ का पानी उतर गया तो रैवन बाढ़ का पानी जो कुछ भी खाना धरती पर छोड़ गया था उस खाने को स्वाद ले ले कर खाने लगा।

वह सब खाना इतना सारा था कि शायद रैवन ज़िन्दगी में पहली बार पेट से भूखा नहीं रहा पर उसकी दूसरी भूख, दूसरों के साथ चाल खेलने की भूख पूरी नहीं हो रही थी सो वह इधर उधर देखने लगा और घूमने लगा।

रैवन ने समुद्र के किनारे की तरफ देखा पर वहाँ तो कुछ भी नहीं था। वहाँ कोई भी ऐसा नहीं था जिसको वह परेशान कर सकता या जिसके साथ वह कोई चाल खेल सकता।

उसने एक लम्बी साँस खींची, समुद्र की रेत में इधर उधर लोटा, अपना चमकदार सिर इधर उधर घुमाया, अपनी तेज ऑखों और कानों को भी इधर उधर किया ताकि वह कुछ देख सकें या सुन सकें, पर उसके पल्ले कुछ भी नहीं पड़ा।

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फिर उसने पहाड़ और समुद्र बनाये, दिन बनाया, सूरज और चाँद बनाये। सब कुछ बहुत सुन्दर था पर किसी में जान नहीं थी। आखिर वह आसमान की तरफ देख कर बहुत ज़ोर से चिल्ला पड़ा।

पर इससे पहले कि उसकी चिल्लाहट की गँूज खत्म हो जाये उसे एक छोटी सी आवाज सुनायी दी। उसने समुद्र के किनारे इधर उधर देखा पर उसे कोई दिखायी नहीं दिया।

वह आगे गया, वह पीछे गया, कई बार गया पर उसे कुछ भी दिखायी नहीं दिया। तभी उसको समुद्र की रेत में एक सफेद सी चमक दिखायी दी।

उसने उधर की तरफ देखा तो वहाँ एक बहुत बड़ा सा घोंघा रेत में घुसा पड़ा था। वह उसकी तरफ चल दिया पर जैसे ही उसकी परछाँई उस घोंघे पर पड़ी वह घोंघा एक बार फिर चिल्ला पड़ा।

रैवन ने घोंघे के आधे खुले शरीर में झाँक कर देखा तो उसमें उसको डरे हुए बहुत सारे छोटे छोटे जानवर दिखायी दिये।

रैवन उन छोटे छोटे जानवरों को देख कर यह सोच कर बहुत खुश हुआ कि कम से कम दिन भर की बोरियत से उसको थोड़ा सा तो छुटकारा मिलेगा।

पर वह उनको उनके घर में से कैसे निकाले ताकि वह उनके साथ खेल सके और जब तक कि वे बाहर न निकलें तब तक कुछ हो नहीं सकता था। और वे तब तक बाहर नहीं आ सकते थे जब तक वे उससे डरते रहेंगे।

रैवन को एक तरकीब सूझी। वह अपना मुँह उस घोंघे के आधे खुले शरीर के पास ले गया और चालाकी से अपनी चिकनी जीभ उसके अन्दर डाल कर उन जानवरों को छेड़ने लगा ताकि वे किसी तरह इस नयी दुनिया में उसके साथ खेलने के लिये बाहर आ जायें।

रैवन दो तरह की आवाजें निकाल सकता है - एक तो बहुत कठोर और तीखी और दूसरी बहुत मुलायम और मीठी।

उसकी यह मुलायम और मीठी आवाज बहुत ही मीठी होती है और किसी को भी अच्छी लग सकती है। सो उसने अपनी वही मीठी आवाज निकालनी शुरू की।

उसको बोलते हुए ज़्यादा देर नहीं हुई थी कि एक एक करके वे छोटे छोटे जानवर अपने उस घर में से निकलना शुरू हो गये। पहले एक निकला, फिर दूसरा, फिर तीसरा।

जब उन्होंने रैवन को देखा तो एक बार तो बाहर निकलने में उनको हिचकिचाहट हुई पर फिर वे सब बाहर निकल आये।

वे सब देखने में बड़े अजीब थे। उनकी रैवन की तरह दो टाँगें तो थीं पर बाकी सारा शरीर बिल्कुल ही अलग था।

उनके पंख नहीं थे, उनके शरीर पर बड़े बड़े बाल नहीं थे, उनके बड़ी सी चोंच नहीं थी, उनकी खाल कुछ पीली सी थी, वे बिल्कुल नंगे थे सिवाय इसके कि उनके गोल सिरों पर बाल थे।

रैवन के जैसे मजबूत पंखों की बजाय उनके डंडियों जैसी दो बाँहें थीं जिनको वे बराबर हिला रहे थे। वे धरती के पहले इन्सान थे।

बहुत दिनों तक रैवन अपने उन नये साथियों के साथ आनन्द लेता रहा। जैसे जैसे वे आश्चर्य से दुनिया को देखते रहे रैवन उनको देख कर हँसता रहा।

कभी वे एक दूसरे की सहायता करते, कभी वे किसी पायी हुई चीज़ के ऊपर लड़ते। रैवन ने उनको कुछ खेल भी सिखाये पर वे इन सब एक से कामों से बहुत जल्दी ही उकता गये।

वे इस दुनिया में बड़े मजबूर से लगते थे। उनको बारिश और धूप से रक्षा चाहिये थी। वे बहुत डरते थे, वे बहुत छोटे थे और सबसे बड़ी बात तो यह थी कि उनमें कोई लड़की नहीं थी, वे सब केवल लड़के ही लड़के थे।

रैवन यह सोच ही रहा था कि वह इन सबको उनके उस बड़े से घर में फिर से बन्द कर दे कि उसको एक विचार आया।

उसने सोचा क्योंकि यही तो दुनिया का तरीका है कि हर जीव में आदमी और औरत दोनों होते हैं। तो जब ये लड़के यहाँ हैं तो इनकी लड़कियाँ भी यहीं कहीं होनी चाहिये सो उसने लड़कियों को ढँूढना शुरू कर दिया।

उसने उनको लठ्ठों के नीचे ढँूढा, पहाड़ियों के पीछे ढँूढा, समुद्र की रेत में ढँूढा पर वह पहली लड़कियाँ न ढँूढ पाया।

ढँूढते ढँूढते उसको कुछ सीपियाँ एक चट्टान से चिपकी दिखायी दे गयीं। इनमें केवल एक ही सीपी थी जो चट्टान से अपने मुलायम हिस्से की सहायता से बड़ी कसके चिपकी हुई थी।

रैवन ने अपनी चोंच मार मार कर उस सीपी को उस चट्टान से छुड़ा लिया। उस सीपी के अन्दर एक लड़की थी। फिर उसने दूसरी सीपी खोली उसमें भी एक लड़की थी। फिर उसने तीसरी सीपी खोली तो उसमें भी एक लड़की थी।

इस तरह उसने कई सीपियाँ खोल डालीं और उनमें हर एक में एक एक लड़की थी। ये भी शक्ल में वैसी ही थीं जैसे जीव उसने पहले घोंघों में पाये थे पर ये उन घोंघों में पाये गये जीवों से कुछ जरा ज़्यादा मुलायम और गोल थीं।

वे भी रैवन से बहुत डरी हुईं थीं। रैवन उनको अपने कन्धे पर लाद कर वहीं ले आया जहाँ वे घोंघे वाले आदमी थे।

रैवन तो यह सोच रहा था कि वे आदमी उन लड़कियों को देख कर बहुत खुश होंगे पर यह क्या? वे तो उनको देख कर डर गये और उनमें से कई तो अपने उन्हीं घोंघों में ही जा कर छिप गये।

वे लड़कियाँ भी उन आदमियों को देख कर बहुत शरमा रही थीं और उनको बड़े डर से देख रहीं थीं।

लड़के और लड़कियाँ दोनों ही बहुत तमीजदार से लग रहे थे क्योंकि दोनों ही अपने अपने शरीरों को वहाँ पड़ी हुई समुद्री घास से ढकने की कोशिश कर रहे थे।

लडकियों को देख कर लड़कों के दिल में जो उनके लिये ख्याल उठ रहे थे उनको महसूस करके लड़कों को बड़ा आश्चर्य हो रहा था क्योंकि ऐसा तो उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ था। उनको समझ में ही नहीं आ रहा था कि वे क्या करें। वे उनके साथ कैसा बरताव करें।

पर कुछ ने हिम्मत बटोरी और उन लड़कियों का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिये कुछ कुछ करने लगे। कुछ ने वे खेल भी दिखाये जो रैवन ने उनको सिखाये थे, जैसे कूदना, भागना, कुश्ती लड़ना आदि।

यह सब देख कर कुछ लड़कियों की भी शरम खुली। पहले तो उन्होंने लड़कों की तरफ देखा फिर उनको अपने पास आने दिया। इस तरह दोनों समूह आपस में मिल गये और फिर तो उनकी ऑखें एक दूसरे से हटती ही नहीं थीं।

रैवन यह सब बड़ी उत्सुकता, आश्चर्य और ध्यान से देखता रहा। दुनिया में जितने भी जीव थे उनमें से शायद ही कोई जीव होगा जिसके नर और मादा जीव इतने अलग होंगे।

नर घमंडी और मजबूत और मादा मुलायम और कोमल। जब कभी लड़के लोग कुछ चालाकी से खेलते तो लड़कियाँ रो पड़तीं।

इसके बाद रैवन फिर कभी बोर नहीं हुआ बल्कि कभी कभी उसको लगता कि उसने लड़के और लड़कियों को मिलाया ही क्यों?

पर उनके इसी मिलने से दुनिया के पहले घर परिवार बने। उन लोगों के बच्चे पैदा हुए, बड़े हुए, फिर उनके बच्चे हुए।

बहुत सारे लोगों ने इस मजाक के लिये रैवन को ज्म्मिेदार ठहराया क्योंकि लड़के और लड़कियों की तो मुश्किल से ही एक दूसरे के साथ पटती है।

रैवन को खुद भी लग रहा था कि वह उनकी सुरक्षा करे। यद्यपि वह अपनी आदत से एक चालाक किस्म का पक्षी था पर फिर भी वह उनकी जरूरतों को पूरा करने में लगा रहता था।

वह उनके लिये सूरज लाया था, चाँद लाया था, तारे लाया था, आग ले कर आया और उनको उसने शिकार की चालें सिखायीं। उनके बच्चे भी धीरे धीरे ताकतवर होते गये और ज़िन्दगी से लड़ना सीखते गये।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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