बुधवार, 13 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 1 - : 18 रैवन ने धरती बनायी // सुषमा गुप्ता

जैसा कि करीब करीब सभी सभ्यताओं में यह विश्वास है कि शुरू में इस दुनिया में केवल पानी ही पानी था और आदमी बनाने से पहले धरती बनाना जरूरी था सो यह जिम्मेदारी रैवन को सौंपी गयी।

बहुत समय पुरानी बात है कि रैवन एक बार पानी के ऊपर उड़ रहा था कि उसने एक बहुत सुन्दर मादा मछली पानी में तैरती देखी।

उस मछली को देखते ही रैवन को उससे प्यार हो गया और तुरन्त उसने नीचे की तरफ एक छलाँग लगायी और उससे पूछा - "क्या तुम मुझसे शादी करोगी?"

वह मछली रैवन को देख कर बहुत खुश हुई पर शादी से पहले उसने रैवन के सामने एक शर्त रखी। वह बोली - "रैवन, मैं तुम से शादी करने के लिये तो तैयार हूँ पर पहले तुमको मेरे लिये थोड़ी सी जमीन बनानी पड़ेगी ताकि मुझे हर समय तैरना न पड़े और मैं समुद्र के पास वाली रेत पर अपने बाल सुखा सकूं।"

रैवन ने उसकी शर्त मान ली और वह जमीन बनाने के लिये वहाँ से उड़ गया। इस काम के लिये उसको किसी की सहायता की जरूरत थी इसलिये वह उस सहायता ढूंढने के लिये निकल पड़ा।

वह उड़ता रहा, उड़ता रहा कि उसने एक नर सील मछली गरम पानी में तैरता हुआ देखा। उसने सील से चिल्ला कर कहा - "मुझे समुद्र की तली में से कुछ रेत चाहिये। क्या तुम पानी में डुबकी मार कर मुझे थोड़ी सी रेत ला कर दोगे?"

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रैवन बहुत चालाक था उसने सील को यह नहीं बताया कि उसको वह रेत क्यों चाहिये थी।

सील बोला - "रेत के लिये तो मुझे मेंढक से पूछना पड़ेगा।"

रैवन कुछ देर तो सोचता रहा फिर बोला - "अगर तुम मेंढक से रेत के बारे में बात करोगे तो मैं तुम दोनों को इसके बदले में कुछ दूंगा।"

सील बोला - " मुझे तो अपने आपको गरम रखने के लिये इस गन्दी सी खाल के बजाय एक बढ़िया से चमकता गरम फ़र का कोट चाहिये। उसको पहन कर तो मैं ठंडे पानी में भी तैर सकूंगा।"

सो रैवन ने सील से एक फ़र कोट का वायदा कर दिया अगर वह उसको रेत ऊपर ला कर दे देगा तो।

सील तुरन्त ही पानी में नीचे डुबकी मार गया और मेंढक के पास जा पहुँचा। उसने मेंढक को रैवन की माँग के बारे में बताया और उससे यह भी कहा कि यदि वह उसे रेत दे देगा तो रैवन उन दोनों को कुछ देगा।

मेंढक बोला - "रैवन से जा कर बोलो कि यदि उसे मेरा रेत चाहिये तो उसको मुझे हमेशा के लिये धरती के खजाने का रखवाला बनाना पड़ेगा।"

यद्यपि सील को मेंढक की ऐसी माँग पर बड़ा आश्चर्य हुआ पर फिर भी वह रैवन के पास गया और मेंढक की माँग के बारे में उसको बताया। रैवन भी उसकी यह माँग सुन कर बहुत आश्चर्यचकित हुआ।

रैवन बोला - "यह तो वह कुछ जरा ज़्यादा ही माँग रहा है। पर फिर भी यदि वह मुझे थोड़ी सी रेत देगा तो मैं उसकी माँग पूरी कर दूंगा। तुम उससे जा कर कह दो।"

सील मेंढक से बात करने के लिये फिर से नीचे पानी में डुबकी मार गया। वह सोचता जा रहा था कि उसको फ़र के कोट अलावा कुछ और भी माँगना चाहिये था पर अब क्या हो सकता था अब तो वह माँग चुका था।

जब मेंढक ने सुना कि रैवन उसकी माँग पूरी कर देगा तो उसने अपनी एक पुरानी खाल ली और उसको रेत से भर कर सील को दे दिया।

जैसे ही रैवन को रेत मिली वह उस रेत को ले कर बहुत ऊँचे ऊपर उड़ गया जहाँ हवा सबसे ज़्यादा तेज़ चल रही थी। वहाँ जा कर उसने मेंढक की वह खाल खोली और उस रेत को चारों तरफ बिखरा दिया।

जहाँ जहाँ भी रेत के कण पड़े वहाँ वहाँ एक एक टापू बन गया। कुछ टापू छोटे थे जबकि कुछ टापू दूसरे टापुओं से बड़े थे।

एक बार टापू बन जाने के बाद वह मादा मछली अपनी ज़िन्दगी में पहली बार समुद्र के किनारे की रेत पर चली और वहाँ उसने अपने बाल सुखाये। फिर उसने रैवन से शादी कर ली और उनके बहुत सारे रैवन पैदा हुए।

सील को रैवन की सहायता करने के बदले में एक फ़र का कोट मिल गया और मेंढक को धरती के खजाने का रखवाला बना दिया गया।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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