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रैवन की लोककथाएँ - 1 - : 19 रैवन ने दुनिया बनायी // सुषमा गुप्ता

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यह बहुत पुरानी बात है जब बहुत बड़े बड़े जानवर तो दुनिया में रहते थे पर आदमी नहीं था।

वे सारे जानवर बहुत बड़े बड़े थे, एक दूसरे से बात कर सकते थे और जादू का इस्तेमाल कर सकते थे। उस समय कुछ ऐसे भी जानवर थे जो अब धरती पर नहीं पाये जाते।

एक दिन डौटसन सा यानी बड़े रैवन ने रैवन से कहा - "जाओ एक बड़ी सी नाव बनाओ।"

सो रैवन ने एक बहुत बड़ी नाव बनायी। रैवन को उस नाव बनाने में काफी समय लग गया क्योंकि वह नाव तो बहुत बड़ी बननी थी।

जब रैवन ने वह नाव बना ली तो डौटसन सा बोला - "यह काफी बड़ी नहीं है तुम और बड़ी नाव बनाओ।"

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रैवन फिर से नाव बनाने में जुट गया। जब उसकी नाव बन कर तैयार हो गयी तो बारिश शुरू हो गयी।

शुरू में जब बारिश बहुत हल्की थी तो डौटसन सा रैवन से बोला - "जाओ, अब तुम जा कर सारे जानवर दो दो की जोड़ी में इकठ्ठे कर लो और उनको अपनी बनायी नाव पर चढ़ा लो।" सो रैवन ने सारे जानवर भी इकठ्ठे कर लिये और उनके लिये खाना भी नाव पर चढ़ा लिया।

जैसे ही सारे जानवर उस नाव पर चढ़ गये कि बारिश बहुत तेज़ हो गयी और सब जगह बाढ़ आ गयी। अब केवल वे ही जानवर इस दुनिया में बचे थे जो नाव पर चढ़ गये थे।

कुछ समय बाद बारिश रुक गयी तो रैवन ने समुद्री चिड़ियों से कहा - "तुम जाओ और जा कर देखो कि तुमको कहीं जमीन दिखायी देती है क्या?"

वे बाहर गयीं और कुछ देर में लौट आयीं। उन्होंने रैवन को बताया कि उनको जमीन कहीं भी दिखायी नहीं दी, अभी चारों तरफ पानी ही पानी है।

कुछ समय बाद बाढ़ का पानी उतर गया। रैवन ने फिर मस्क्रैट से कहा कि वह समुद्र की तली तक जाये और उनके लिये एक टापू बनाये।

मस्क्रैट जो वाकई बहुत बड़ा जानवर था तुरन्त ही समुद्र की तली तक डुबकी मार गया और वहाँ से कीचड़ खोद खोद कर इकठ्ठी करने लगा और तब तक इकठ्ठी करता रहा जब तक कि जमीन दिखायी नहीं देने लगी।

फिर डौटसन सा ने अपने जादू से उस जमीन पर बहुत सारे फल, पेड़, और पौधों उगाये। जहाँ जहाँ जमीन कुछ नीची थी वे जगहें उसने छोड़ दीं वहाँ तालाब और झीलें आदि बन गयीं।

फिर उसने नदियाँ बनायीं जो दोनों तरफ बह सकती थीं। एक तरफ वे समुद्र की तरफ जा रही थीं और दूसरी तरफ वे पहाड़ों पर चढ़ रही थीं।

बाद में उसने महसूस किया कि पानी का नीचे की तरफ जाना ज़्यादा आसान था सो उसने उन सबको नीचे की तरफ बहने वाला ही बना दिया।

बाढ़ खत्म हो चुकी थी, जमीन ऊपर आ गयी थी सो डौटसन सा ने सोचा कि अब आदमी बनाया जाये। सो पहले उसने उसको पत्थर से बनाया।

अब क्योंकि उसने वह आदमी पत्थर से बनाया था सो वह कभी मरता ही नहीं था। इसलिये उसने दोबारा उसे मिट्टी से बनाया। आदमी बनाने के बाद उसने स्त्री बनायी ताकि वे आपस में शादी कर सकें और बच्चे पैदा कर सकें।

उन स्त्रियों के देख कर रैवन के मन में भी एक पत्नी लेने का विचार आया सो उसने एक स्त्री ले ली मगर उसको उससे आदमी छीन कर ले गया।

इससे रैवन को बहुत गुस्सा आया। उसने कुछ सूखी पत्तियों को लेकर कुचल लिया और एक थैले में भर दिया। फिर वह थैला ले कर वहाँ गया जहाँ लोग रहते थे और वहाँ जा कर वह थैला खोल दिया।

उस थैले में से बजाय पत्तों के करोड़ों मच्छर निकल पड़े जो अभी तक घूम रहे हैं। उन मच्छरों ने आदमियों को काट भी लिया क्योंकि उन्होंने रैवन को एक स्त्री से शादी नहीं करने दी थी।

रैवन ने सारी दुनिया बना दी थी सो अब उसे कोई नहीं मारता था क्योंकि उसी ने तो सब कुछ बनाया था।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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