शनिवार, 30 सितंबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–1 : 3 एक आदमी जो केवल रात को बाहर निकलता था // सुषमा गुप्ता

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एक बार की बात है कि एक मछियारा था जिसकी तीन सुन्दर बेटियाँ थीं। उसकी तीनों बेटियाँ शादी के लायक थीं।

एक नौजवान ने उसकी तीनों बेटियों में से एक का हाथ शादी के लिये माँगा। वह नौजवान क्योंकि केवल रात को ही बाहर निकलता था इसलिये लोग उसको शक की निगाहों से देखते थे।

इसी लिये उसकी सबसे बड़ी और बीच वाली बेटियों ने उससे शादी करने से साफ मना कर दिया पर उसकी तीसरी और सबसे छोटी बेटी उससे शादी करने के लिये तैयार हो गयी।

दोनों की शादी रात को ही हुई। जैसे ही वे दोनों अकेले रह गये तो पति ने पत्नी से कहा — “मैं तुमको एक भेद बताना चाहता हूँ। मेरे ऊपर एक बहुत बुरा जादू पड़ा हुआ है जिससे मैं दिन में कछुआ बन जाता हूँ और रात में मैं एक आदमी बन जाता हूँ।

इस जादू को तोड़ने का केवल एक ही तरीका है। और वह यह कि पहले मैं शादी करूँ, फिर मैं अपनी पत्नी को छोड़ कर दुनियाँ घूमूँ – रात में एक आदमी तरह और दिन में एक कछुए की तरह।

अगर मैं वापस आऊँ और पाऊँ कि मेरी पत्नी मेरे लिये इस सारा समय वफादार रही है और उसने मेरे लिये सारी मुश्किलों को सहा है तो फिर मैं हमेशा के लिये आदमी बन जाऊँगा।”

पत्नी बोली — “मैं आपको आपके ऊपर पड़ा जादू तोड़ने के लिये और फिर हमेशा आदमी के रूप में देखने के लिये जो भी आप कहेंगे वही करूँगी।”

इसके बाद पति तो दुनियाँ घूमने निकल पड़ा और उसकी पत्नी शहर में काम खोजने के लिये निकल पड़ी। रास्ते में उसको एक रोता हुआ बच्चा मिला तो उसने उस बच्चे की माँ से कहा — “लाइये इसको मुझे दे दीजिये मैं इसको चुप करा देती हूँ।”

माँ बोली — “बेटी तुम वह पहली आदमी हो जिसने मुझसे ऐसा कहा है। आज यह सुबह से ही रो रहा है चुप ही नहीं हो रहा।”

लड़की ने उसके कान में फुसफुसाया — “हीरे की ताकत से यह बच्चा हँस जाये, नाचे और कूदे।” बस उसका यह कहना था कि बच्चे ने उसी समय से हँसना, नाचना और कूदना शुरू कर दिया।

बच्चे की माँ तो अपने बच्चे को हँसता नाचता देख कर बहुत खुश हो गयी और उस लड़की को बहुत आशीर्वाद दे कर अपने हँसते खेलते बच्चे को ले कर चली गयी।

वह लड़की और आगे चली तो एक बेकरी की दुकान पर पहुँची। वहाँ जा कर वह उसकी मालकिन से मिली और बोली — “अगर आप मुझे अपनी बेकरी की दुकान में किसी काम पर रख लेंगी तो आप मुझसे बहुत खुश रहेंगी।”

यह सुन कर उस बेकरी की दुकान की मालकिन ने उसको अपनी दुकान में काम दे दिया और वह वहाँ डबल रोटियाँ बनाने लगी।

जब वह डबल रोटियाँ बनाती तो फुसफुसाते हुए बोलती — “हीरों की ताकत से जब तक मैं यहाँ काम करती हूँ तब तक सारा शहर केवल इसी बेकरी से डबल रोटी खरीदे।”

बस उस दिन से उसकी दूकान पर भीड़ लगी रहती और उसको पल भर का समय भी खाली नहीं मिलता। सारे लोग उसी दुकान से अपनी डबल रोटी खरीदते।

उस दुकान पर तीन नौजवान भी डबल रोटी लेने के लिये आते थे। उन तीनों ने उस लड़की को देखा तो वे तीनों ही उससे प्यार करने लगे।

उनमें से एक नौजवान ने एक दिन उससे कहा अगर तुम मुझे अपने साथ एक रात गुजारने दो तो मैं तुमको 1000 फ्रैंक दूँगा। दूसरे नौजवान ने कहा कि मैं 2000 फ्रैंक दूँगा और तीसरा नौजवान बोला कि मैं 3000 फ्रैंक दूँगा।

लड़की ने तीसरे नौजवान से 3000 फ्रैंक लिये और उसको रात को बेकरी की दुकान में बुलाया। जब वह आया तो उससे बोली — “मैं अभी आती हूँ एक मिनट में। ज़रा मैं आटे में खमीर डाल आऊँ। जब तक तुम यहाँ खाली बैठे हो तब तक मेरे लिये यह आटा ही मल दो।”

उस नौजवान ने उसका आटा मलना शुरू किया तो वह तो मलता ही रहा, मलता ही रहा, मलता ही रहा। हीरे की ताकत से वह अपने हाथ आटा मलने से हटा ही नहीं सका और वह अगले दिन सुबह तक आटा ही मलता रहा।

सुबह को लड़की बोली — “सो आखिर तुमने अपना आटा मलने का काम खत्म कर ही लिया। मुझे अफसोस है कि तुमको आटा मलने में इतनी देर लग गयी।” और उस समय क्योंकि सुबह हो गयी थी इसलिये उसने उसको वहाँ से वापस भेज दिया।

फिर उसने 2000 फ्रैंक वाले नौजवान को रात को बुलाया और उससे उसने आग में धौंकनी चलाने के लिये कहा ताकि ओवन की आग बुझ न जाये। वह बेचारा भी हीरे की ताकत से रात भर धौंकनी चलाता रह गया। उसके हाथ उस धौंकनी पर से हट ही नहीं पा रहे थे।

सुबह को वह लड़की कुछ अफसोस दिखाते हुए उससे बोली — “उँह भला यह भी कोई तरीका है किसी से बरताव करने का? तुम तो मुझसे यहाँ मिलने आये थे और तुम तो यहाँ रात भर आग फूँकते ही रह गये। मुझे बहुत अफसोस है।”

सुबह हो गयी थी सो उसने उसको भी घर वापस भेज दिया।

अगली रात उस लड़की ने 1000 फ्रैंक वाले नौजवान को बुलाया। जब वह आ गया तो उसने उससे कहा — “मुझे ज़रा आटे में खमीर मिलाना है तुम ज़रा दुकान का दरवाजा बन्द कर दो।”

वह नौजवान दरवाजा बन्द करने गया तो हीरे की ताकत से तो वह दरवाजा ही बन्द करता रह गया। वह दरवाजा रात भर बन्द ही नहीं हुआ।

वह जैसे ही उसको बन्द करने की कोशिश करता वह बार-बार खुल जाता था। वह सारी रात दरवाजा बन्द ही नहीं कर सका। जब दिन निकल आया तब कहीं जा कर वह दरवाजा बन्द हुआ।

जब वह दरवाजा बन्द करके लड़की के पास लौटा तो उसने पूछा — “तुमने ठीक से देख लिया है न कि दरवाजा बन्द हो गया या नहीं?”

नौजवान ने पलट कर देखा कि वाकई दरवाजा बन्द हुआ कि नहीं फिर कुछ सोच कर बोला — “हाँ हो गया।”

लड़की बोली — “तो अब तुम दरवाजा खोल कर बाहर जा सकते हो।”

लड़की के ऐसे बरताव से उन तीनों नौजवानों को बहुत गुस्सा आया। वे थाने में उसकी शिकायत करने गये।

उस दिन कुछ स्त्री पुलिस उस स्त्री की दुकान पर आयीं और उस लड़की के बारे में पूछा जिसने यह सब किया था। उन्होंने उस लड़की को पकड़ लिया और उसको थाने ले जाने लगीं।

तभी वह लड़की फिर फुसफुसायी — “हीरे की ताकत से ये स्त्रियाँ आपस में एक दूसरे को मारती ही रहें – सुबह सवेरे तक।”

वहाँ पर चार स्त्री पुलिस थीं। उस लड़की के यह फुसफुसाते ही वे चारों आपस में एक दूसरे को कान पर मारने लगीं और फिर सुबह तक मारती ही रहीं।

सुबह को उन सबके कान पिटते पिटते काशीफल की तरह से सूजे पड़े थे फिर भी वे एक दूसरे को मारे जा रही थीं। उनके हाथ ही नहीं रुक पा रहे थे।

जब वे स्त्री पुलिस उस लड़की को पकड़ कर थाने नहीं ला सकीं तो चार आदमी पुलिस उनको देखने के लिये भेजे गये। उस लड़की ने जब उन आदमी पुलिस को आते देखा तो वह फिर फुसफुसायी — “हीरे की ताकत से ये चारों पुलिस वाले मेंढक की तरह से कूदते रहें।”

उनमें से एक अफसर तो उसी समय दूसरे तीन अफसरों के सामने गिर पड़ा। दूसरा उसके ऊपर से हो कर थोड़ा आगे की तरफ चला तो तीसरे ने उसकी कमर पर हाथ रखा और उसके ऊपर कूद गया। चौथे ने भी वैसे ही किया और इस तरह से वे बहुत देर तक मेंढक की कूद का खेल खेलते रहे।

इसी समय एक कछुआ वहाँ रेंगता हुआ आ गया। यह उस लड़की का पति था जो अपनी दुनियाँ की यात्रा पूरी करके वापस आ गया था। जैसे ही उसने अपनी पत्नी को देखा तो वह आदमी बन गया।

लड़की की खुशी का पारावार न रहा। वे दोनों फिर पति पत्नी बन कर बहुत दिनों तक खुशी-खुशी रहे।

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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