शनिवार, 30 सितंबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–1 : 5 एक लाश // सुषमा गुप्ता

clip_image002

एक बार की बात है कि इटली में एक विधवा स्त्री रहती थी जिसके एक बेटा था। उसका नाम था जैक । जब वह 13 साल का हुआ तो वह घर छोड़ कर दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने जाना चाहता था।

उसकी माँ ने उससे पूछा — “बेटा, तुम ऐसा कैसे सोचते हो कि अभी दुनिया में जा कर तुम कुछ कर सकते हो? तुम अभी बच्चे हो। जब तक तुम इस लायक न हो जाओ कि हमारे घर के पीछे लगा पाइन का पेड़ एक ही बार की ठोकर से गिरा सको तब तक तुमको बाहर नहीं जाना चाहिये।”

यह सुन कर जैक रोज सुबह उठ कर दौड़ता और दौड़ कर अपने दोनों पैरों से उस पाइन के पेड़ को मारता पर वह एक इंच भी हिल कर नहीं देता बल्कि वह खुद ही पीछे को पीठ के बल गिर पड़ता।

आखिर एक दिन जब उसने अपनी पूरी ताकत लगा कर उस पेड़ को धक्का दिया और वह जमीन पर आ गिरा और उसकी जड़ें हवा में दिखायी देने लगीं तो जैक तुरन्त ही भागा भागा अपनी माँ के पास गया और बोला — “देखो माँ, आज मैंने वह पाइन का पेड़ नीचे गिरा दिया।”

उसकी माँ ने वह गिरा हुआ पाइन का पेड़ देखा तो बोली — “मेरे बेटे, अब तुम कहीं भी जा सकते हो और जो तुम्हारे मन में आये वह कुछ भी कर सकते हो।”

सो जैक ने अपनी माँ को विदा कहा और दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने चल दिया। काफी दिनों तक चलने के बाद वह एक ऐसे शहर में आया जिसके राजा के पास एक घोड़ा था जिसका नाम था रौनडैलो ।

अभी तक उस घोड़े पर कोई सवारी नहीं कर सका था। लोग उस पर चढ़ने की बराबर कोशिश करते रहे पर वे उस पर अभी तक तो कभी चढ़ नहीं पाये थे। जब भी कोई उसके ऊपर चढ़ने की कोशिश करता तो वह घोड़ा बार बार उसको नीचे गिरा देता था।

जैक भी उस घोड़े को देखने गया तो उसने उसको देखते ही पहचान लिया कि वह घोड़ा अपने साये से डरता था सो जैक ने खुद उसके ऊपर चढ़ने का प्रस्ताव रखा। राजा ने उसको सावधानी बरत कर उस घोड़े पर चढ़ने की इजाज़त दे दी।

वह उस घुड़साल में गया जहाँ पर वह घोड़ा बँधा हुआ था। वहाँ उसने घोड़े से कुछ बात की, उसको थपथपाया और फिर अचानक ही उसके ऊपर कूद कर चढ़ गया और चाबुक मार कर उसको बाहर धूप में ले गया। इस तरह से न तो वह अपनी परछाँई ही देख सका और न ही वह अपने सवार को नीचे ही गिरा सका।

जैक ने घोड़े की लगाम आराम से पकड़ ली, अपने घुटनों से घोड़े को दबाया और उसको ले कर उड़ चला। 15 मिनट में ही वह घोड़ा उसका मेमने की तरह पालतू हो गया। पर वह केवल जैक का ही पालतू था। वह अभी भी किसी और को अपने ऊपर नहीं चढ़ने देता था।

उस दिन के बाद से जैक राजा के यहाँ काम करने लगा। राजा भी उसको इतना पसन्द करने लगा था कि राजा के दूसरे नौकर उससे जलने लगे। एक दिन कुछ नौकरों ने मिल कर उसको मारने का जाल बिछाया।

इस राजा के एक बेटी थी। जब वह बहुत छोटी थी तो उसको लाश नाम का एक जादूगर उठा कर ले गया था और तबसे उसके बारे में किसी ने कुछ भी नहीं सुना था।

इस जाल के अनुसार वे नौकर लोग राजा के पास गये और बोले — “यह जैक अपनी बहुत डींगें हाँकता है तो क्यों न उसको राजकुमारी को आजाद कराने का काम सौंप दिया जाये।”

राजा के यह बात समझ में आ गयी। उसने जैक को बुलाया और उसको राजकुमारी का सारा किस्सा बताया। जैक को यह सुन कर बड़ा आश्चर्य हुआ कि राजा के कोई बेटी भी थी।

ऐसा इसलिये हुआ कि जबसे उस जादूगर ने उस राजकुमारी को भगाया था तबसे किसी की यह हिम्मत नहीं हुई थी कि कोई उसके बारे में बात भी करे क्योंकि इस बात से राजा बहुत दुखी होता था।

कुछ दिन बाद तो राजा ने यहाँ तक कह दिया कि अगर कोई उसको वापस ला सकता है तो वापस ले आये नहीं तो उसकी बात भी करने की जरूरत नहीं है। उस दिन के बाद से राजा को शान्ति नहीं थी। इसलिये जैक को इस बात का कोई पता ही नहीं था।

जैक ने दीवार पर लगी हुई एक जंग लगी हुई तलवार माँगी और अपने रौनडैलो पर सवार हो कर राजकुमारी की खोज में चल दिया।

जब वह जंगल पार कर रहा था तो वहाँ उसको एक शेर मिला। वह शेर उसको रुकने का इशारा कर रहा था। यह देख कर वह कुछ परेशान सा हो गया पर फिर भी वहाँ से उसको भागना भी अच्छा नहीं लगा सो वह अपने घोड़े पर से उतरा और उस शेर से पूछा कि वह उससे क्या चाहता था।

शेर बोला — “जैक, जैसा कि तुम देख रहे हो यहाँ हम केवल चार लोग हैं – एक मैं, एक कुत्ता, एक यह गरुड़ और एक यह चींटी।

हमारे पास यह एक मरा हुआ गधा है जिसे हम आपस में बाँटना चाहते हैं पर बाँट नहीं पा रहे हैं। क्योंकि तुम्हारे पास तलवार है इसलिये तुम इस जानवर को काट कर हम सबको हमारा हिस्सा आसानी से दे सकते हो।”

जैक ने गधे का सिर काटा और चींटी को दिया और बोला — “यह लो, इस सिर में तुम आराम से रह सकती हो और इसमें से अपना खाना भी खा सकती हो।”

फिर उसने गधे के खुर काटे और कुत्ते को दे दिये — “लो ये खुर तुम लो। तुम इन खुरों को चाहे जब तक चबा सकते हो।”

उसके बाद उसने गधे के शरीर के अन्दर का हिस्सा आँत आदि निकाले और गरुड़ को दे दिये — “लो गरुड़, तुम इस गधे का यह अन्दर का हिस्सा लो। तुम इनको पेड़ पर ले जा सकते हो और वहाँ बैठ कर आराम से खा सकते हो।”

बाकी बचा हिस्सा उसने शेर को दे दिया जो उन चारों में से उसको मिलना ही चाहिये था।

फिर वह अपने घोड़े के पास लौट आया और उस पर सवार हो कर अपने रास्ते चल दिया कि उसने पीछे से किसी को अपना नाम पुकारते हुए सुना।

उसने सोचा — “ओह, लगता है कि गधे को बाँटने में मुझसे कहीं कोई गलती हो गयी है।” पर ऐसा कुछ नहीं था।

शेर बोला — “तुमने हमारा बहुत बड़ा काम किया है और तुमने यह काम बहुत ही न्यायपूर्वक किया है। जैसे एक अच्छा काम किसी दूसरे अच्छे काम का बीज होता है तो मैं तुमको अपना एक पंजा देता हूँ। तुम जब भी इसको पहनोगे तो यह तुमको दुनिया के सबसे ज़्यादा भयानक शेर में बदल सकता है।”

इस पर कुत्ता बोला — “मैं तुमको अपनी मूँछ का एक बाल देता हूँ। जब भी तुम इसको अपनी नाक के नीचे रखोगे तो तुम दुनिया के सबसे तेज़ भागने वाले कुत्ते बन जाओगे।”

इसके बाद गरुड़ बोला — “यह मेरे पंखों में से एक पंख ले जाओ जो तुमको दुनिया का सबसे बड़ा और ताकतवर गरुड़ बना देगा।”

चींटी बोली — “मैं तुमको अपनी एक छोटी सी टाँग देती हूँ। जब भी तुम इसको अपने शरीर पर रखोगे तो तुम एक चींटी बन जाओगे – इतनी छोटी सी चींटी कि तुमको कोई देख भी नहीं पायेगा – आतशी शीशे से भी नहीं।”

जैक ने वे चारों चीज़ें ले लीं, चारों को धन्यवाद दिया और वहाँ से चल दिया। उसे उन जानवरों की भेंटों पर विश्वास नहीं था कि वे काम करेंगी भी या नहीं।

यही सोचते हुए कि कहीं जानवरों ने उसके साथ कोई मजाक न किया हो वह आगे जा कर एक ऐसी जगह रुक गया जहाँ से वह उनको दिखायी नहीं दे सकता था।

वहाँ उसने एक एक करके सब भेंटों को जाँचा – पहले वह शेर बना, फिर कुत्ता बना, फिर गरुड़ बना और फिर चींटी बना। सब कुछ जादू की तरह ठीक काम कर रहे थे। यह देख कर वह बहुत खुश हुआ और आगे चल दिया।

जंगल के उस पार एक झील थी। जंगल पार करके वह उस झील के पास आ गया। उस झील के किनारे पर ही उस लाश जादूगर का महल था।

वहाँ आ कर जैक ने अपने आपको गरुड़ में बदला और उड़ कर उस लाश जादूगर के महल के एक कमरे की एक बन्द खिड़की पर जा कर बैठ गया। वहाँ जा कर वह एक छोटी सी चींटी में बदल गया और उस कमरे की बन्द खिड़की से हो कर उस कमरे में घुस गया।

वह एक सुन्दर सा सोने का कमरा था जहाँ छत वाला एक पलंग पड़ा था और उस पलंग पर एक राजकुमारी सो रही थी। चींटी के रूप में ही वह राजकुमारी के ऊपर घूमने लगा।

वह उसके गाल पर भी गया। वह उसके ऊपर तब तक घूमता रहा जब तक कि वह जाग नहीं गयी। फिर उस लड़के ने अपने ऊपर से चींटी की वह छोटी टाँग हटा दी तो राजकुमारी ने अपने सामने एक बहुत सुन्दर नौजवान को खड़ा पाया।

यह सब देख कर वह आश्चर्य से कुछ बोलने ही वाली थी कि जैक ने अपने मुँह पर उँगली रख कर उसको चुप रहने का इशारा करते हुए कहा — “डरो नहीं। मैं तुमको यहाँ से आजाद कराने आया हूँ। तुमको उस जादूगर से बस यह मालूम करना है कि वह किस तरह से मर सकता है।”

उसने अभी इतना ही कहा था कि उसको किसी के आने की आहट सुनायी दी सो वह फिर से चींटी बन कर वहीं एक कोने में छिप गया।

जब वह जादूगर आया तो राजकुमारी ने उससे बड़े प्यार से बात की। उसको अपने पाँवों के पास बिठाया और उसका सिर अपनी गोद में रख लिया।

फिर वह बोली — “मेरे प्रिय जादूगर, मैं जानती हूँ कि तुम बिना आत्मा का शरीर हो और इसी लिये तुम मर नहीं सकते पर मुझे हमेशा डर लगा रहता है कि कोई भी कभी भी तुम्हारी आत्मा को ढूँढ लेगा और फिर तुमको मार देगा।”

जादूगर यह सुन कर बहुत ज़ोर से हँसा और काफी देर तक हँसता ही रहा। फिर बोला — “तुमको इससे डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है मेरी रानी। मैं तुमको इसका भेद बताता हूँ। क्योंकि तुम यहाँ जेल में बन्द हो और तुम मुझे धोखा भी नहीं दे सकतीं इसी लिये मैं तुम्हें यह बात बता रहा हूँ।

मुझे मारने के लिये एक बहुत ही ताकतवर शेर चाहिये जो जंगल में रह रहे काले शेर को मार सके। उस मरे हुए काले शेर के पेट में से एक काला कुत्ता कूद कर बाहर आयेगा। वह कुत्ता भी इतनी तेज़ी से बाहर कूदेगा कि कोई सबसे ज़्यादा तेज़ भागने वाला कुत्ता ही उसको पकड़ सकता है।

फिर उस कुत्ते को मारना पड़ेगा। उस मरे हुए कुत्ते में से एक गरुड़ उड़ेगा जो दुनिया के सबसे ज़्यादा तेज़ उड़ने वाले गरुड़ों में से एक होगा। इसलिये उसको भी कोई नहीं पकड़ सकेगा।

पर अगर उसको किसी ने पकड़ लिया और उसे मार दिया तो उसको उसके पेट से उसे एक अंडा निकालना पड़ेगा जिसको मेरी भौंह के ऊपर तोड़ना पड़ेगा।

उस अंडे के टूटते ही उसमें से मेरी आत्मा निकल कर भाग जायेगी और मैं मर जाऊँगा। अब बताओ क्या तुम मेरे बारे में अभी भी चिन्तित होगी?”

“नहीं नहीं। अब मुझे तुम्हारे मरने की बिल्कुल भी चिन्ता नहीं है क्योंकि इस तरह से तो तुमको कोई मार ही नहीं सकता।”

जैक ने यह सब उस कोने में बैठे-बैठे सुन लिया। जादूगर के जाने के बाद वह वहाँ से चींटी के रूप में ही खिड़की से बाहर निकल गया और गरुड़ बन कर जंगल की तरफ उड़ गया।

वहाँ जा कर वह शेर में बदल गया और काले शेर को ढूँढने चला। काला शेर उसको जल्दी ही मिल गया। वह काला शेर काफी ताकतवर था पर जैक तो सबसे ज़्यादा ताकतवर शेर था सो उसने उस काले शेर को दबोच लिया और मार दिया। जैसे ही शेर मरा तो किले में जादूगर का सिर चकराने लगा।

शेर को मार कर जैक ने उसका पेट फाड़ा तो उसमें से एक तेज़ भागने वाला काला कुत्ता निकल कर भागा। जैक ने तुरन्त ही अपने आपको सबसे तेज़ भागने वाले कुत्ते में बदला और उस काले कुत्ते के पीछे भाग लिया।

उसने उस काले कुत्ते को भी जल्दी ही पकड़ लिया और उस पर कूद पड़ा। दोनों लुढ़कने लगे और एक दूसरे को काटने लगे पर आखीर में जैक ने उस काले कुत्ते को भी मार दिया। कुत्ते को मार कर जैक ने उसका पेट फाड़ा तो एक काला गरुड़ उसके पेट में से निकल कर उड़ गया।

जैक भी जल्दी से गरुड़ बन गया और उसके पीछे-पीछे उड़ चला। उस काले गरुड़ को मार कर उसने उसके पेट में से काला अंडा निकाल लिया। अंडा निकालते ही जादूगर को किले में बुखार आ गया और वह अपने बिस्तर में सिकुड़ा सा लेट गया।

गरुड़ के पेट से अंडा निकाल कर जैक आदमी बन गया और वह अंडा ले कर राजा की बेटी पास वापस आ गया। राजा की बेटी उस अंडे को देख कर बहुत खुश हो गयी।

उसने पूछा — “पर तुमने यह सब किया कैसे?”

“इसमें कोई ऐसी खास बात नहीं थी। मैंने तो अपना काम कर दिया बस अब तुम्हारा काम बाकी है।”

राजा की बेटी वह अंडा ले कर जादूगर के सोने के कमरे में घुसी और उससे पूछा — “तुमको कैसा लग रहा है जादूगर?”

“उफ तुमने तो मुझे धोखा दे दिया।”

“देखो न मैं तुम्हारे लिये यह माँस का पानी ले कर आयी हूँ। इसे थोड़ा सा पी लो तो तुमको आराम मिलेगा और थोड़ी ताकत भी आ जायेगी।”

यह सुन कर जादूगर उठ कर बैठा हो गया और वह माँस का पानी पीने के लिये झुका तो राजा की बेटी बोली — “लाओ इसमें मैं एक अंडा तोड़ कर और डाल दूँ इससे तुमको और ज़्यादा ताकत आयेगी।”

कह कर राजा की बेटी ने वह काला अंडा उस जादूगर की भौंह के ऊपर तोड़ दिया और वह बिना आत्मा का शरीर वहीं की वहीं मर गया।

जैक राजा की बेटी को ले कर राजा के महल आ गया और उसको उसके पिता को सौंप दिया। सब लोग राजकुमारी को देख कर बहुत खुश हो गये।

पर वे नौकर जिनकी यह चाल थी जैक को अपने काम में सफल देख कर केवल अपना मन मसोस कर रह गये। कुछ कर नहीं सके। उनकी चाल फेल हो गयी थी।

बाद में राजा ने अपनी बेटी की शादी जैक से कर दी।

---

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओंको आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------