बुधवार, 13 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 1 - : 7 रैवन रोशनी ले कर आया // सुषमा गुप्ता

एक बार एक गाँव में बहुत ही ताकतवर और अमीर सरदार रहता था। उसके एक बहुत सुन्दर लड़की थी। उसके पास सूरज और चाँद भी थे जिनको वह अपने घर में टाँग कर रखता था।

अब क्योंकि सूरज और चाँद उसके पास थे इसलिये और सब जगह अँधेरा रहता था। अँधेरे की वजह से लोग कुछ भी नहीं देख सकते थे। वे अपने खाने के लिये मछलियाँ भी नहीं पकड़ सकते थे।

जब वे अपना खाना पकाने के लिये जंगल में लकड़ी लेने जाते तो उनको रेंग कर जाना पड़ता था और हाथ से महसूस करके यह पता करना पड़ता था कि वह लकड़ी है कि नहीं। फिर उसको उन्हें मुँह से काट कर भी देखना पड़ता था कि वाकई वह लकड़ी है या नहीं।

रैवन को जब यह पता चला कि उस अमीर सरदार के पास सूरज और चाँद हैं तो वह उसके घर उनको लेने के चल दिया। वहाँ जा कर उसने सरदार से कहा कि वह उनको उसे दुनिया की भलाई के लिये दे दे पर सरदार ने मना कर दिया।

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तब रैवन को एक तरकीब सूझी। उस सरदार की लड़की एक नदी पर रोज सुबह सुबह पानी भरने जाया करती थी। वह नदी के पास छिप कर उस लड़की के वहाँ आने का इन्तजार करने लगा।

जैसे ही रैवन ने सरदार की उस लड़की को आते देखा तो वह एक बहुत छोटी सी मछली बन कर पानी में कूद गया।

जब लड़की ने नदी में से पानी भरा तो वह उसकी बालटी में चला गया और जब उस लड़की ने पानी पीने के लिये अपना गिलास उस बालटी में डाला तो वह उसके पानी पीने के गिलास में चला गया।

वह मछली इतनी छोटी थी कि वह उस लड़की को उस पानी में दिखायी नहीं दी और वह वह पानी पी गयी। उस लड़की के शरीर में घुस कर वह एक बच्चा बन गया और इस तरह उसको बच्चे की आशा हो गयी।

कुछ समय बाद उस लड़की ने एक बेटे को जन्म दिया। धीरे धीरे उसका बेटा बड़ा हो गया। उसका नाना उसको बहुत प्यार करता था और वह उसके लिये कुछ भी करने को तैयार था।

एक दिन वह लड़का बहुत रो रहा था तो उसके नाना ने पूछा - "बेटा, तुम क्यों रो रहे हो? क्या चाहिये तुम को?"

लड़के ने रोते हुए छत से लटके सूरज और चाँद की तरफ इशारा करते हुए कहा - "मुझे वे चाहिये।"

सरदार ने सोचा कि यदि वह बच्चा उनके साथ खेलने से चुप हो जाता है तो वह उनको उसको दे देगा और उसने उनको उस बच्चे को दे दिया।

बच्चा उनको बाहर ले जा कर उनसे कुछ देर तक तो खेलता रहा फिर खेल खेल में उसने उन सूरज और चाँद को ऊपर उछाल दिया। उनके ऊपर जाने से चारों तरफ बहुत सारी रोशनी फैल गयी।

यह देख कर वह सरदार यह देखने के लिये बाहर आया कि क्या हुआ। सरदार को बाहर आता देख कर वह बच्चा फिर से रैवन बन गया और वहाँ से उड़ गया। उस दिन से दुनिया में रोशनी ही रोशनी हो गयी।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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