सोमवार, 18 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 13 रैवन और उसकी बतख पत्नी // सुषमा गुप्ता

अलास्का की बहुत सारी चिड़ियाँ ठंड के मौसम में गरम जलवायु की जगहों में रहने चली जाती हैं पर रैवन हमेशा अपने ही लोगों के पास रहने की कोशिश करता है और वहीं खुश भी रहता है।

इस कहानी में रैवन एक बार एक बतख के साथ उड़ा पर वह उसकी तरह उड़ नहीं पाया सो उसने निश्चय किया कि वह हमेशा के लिये अब अलास्का में ही रहेगा।

कहा जाता है कि एक बार रैवन को एक जवान बतख लड़की से प्यार हो गया। वे दोनों सारी गरमियाँ एक साथ रहे पर फिर पतझड़ आ गया। इसका मतलब यह था कि बरफ भी जल्दी ही आने वाली थी।

बरफ की वजह से वह बतख लड़की दक्षिण में अपने रिश्तेदारों के पास जाना चाहती थी सो रैवन ने भी उसके साथ जाने का निश्चय कर लिया क्योंकि वह उसको बहुत प्यार करता था और वह बतख लड़की वहाँ ठंड की वजह से रुक नहीं रही थी।

हालाँकि रैवन भी और चिड़ियों की तरह एक अच्छा उड़ने वाला चिड़ा था पर फिर भी वह एक बार में बहुत दूर तक नहीं उड़ सकता था।

काफी देर तक तो वह उस बतख के झुंड के साथ उड़ता रहा पर वह जल्दी ही थक जाता था और उसको आराम करना पड़ जाता था।

दूसरे वे बतखें जब भी अपने खाने और सोने के लिये कहीं रुकते तो रैवन के लिये वहाँ खाने के लिये कुछ भी नहीं होता था। इस तरह ठीक से खाना न मिलने की वजह से रैवन कमजोर भी होता जा रहा था।

इसके अलावा वे सारी बतखें वहाँ से जल्दी भाग जाने के चक्कर में थीं ताकि वे ठंड में न घिर जायें और इस वजह से वे बार बार रैवन का इन्तजार नहीं कर सकती थीं।

जब उस बतख लड़की ने देखा कि रैवन ठीक स़े नहीं उड पा रहा तो उसने उसको अपनी पीठ पर चढ़ा लिया पर वह क्योंकि बहुत भारी था इसलिये वह उसको बहुत दूर तक नहीं ले जा सकी।

उसके साथियों ने भी रैवन को कुछ दूर तक ले जाने में उसकी सहायता की पर वे सब भी जल्दी ही थक गये। इस तरह बारी बारी से उसको उठा कर ले जाते हुए वे सब समुद्र तक आ गये।

लड़की के पिता ने कहा - "रैवन, समुद्र बहुत दूर तक चला गया है और अब हमको नीचे उतरने और आराम करने के लिये कोई जगह नहीं मिलेगी। हम लोग भी तुमको अपनी पीठ पर बिठा कर इतनी दूर तक नहीं ले जा सकेंगे।"

रैवन ने सोचा कि अब आगे जाना उसके लिये मुमकिन नहीं था सो वह वहीं ठहर गया। उसने अपनी प्यारी बतख पत्नी को विदा कहा और अपने घर आ गया जहाँ वह रहता था।

इसलिये सारे रैवन अब वहीं रहते हैं क्योंकि वे बतखों की तरह से इतना लम्बा समुद्र नहीं पार कर सकते।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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