रैवन की लोककथाएँ - 2 - : 14 रैवन ने शादी की // सुषमा गुप्ता

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बहुत ऊपर उत्तर में एक बहुत सुन्दर लड़की रहती थी। वह शादी नहीं करना चाहती थी। बहुत सारे लड़के उसके पास शादी की इच्छा से आये पर उसने उन सबको मना कर दिया।

लेकिन एक दिन एक बहुत सुन्दर लड़का उसके पास आया। वह बहुत बढ़िया कपड़े पहने था और बहुत ही अच्छा लग रहा था। वह लड़की उसको देखते ही उससे प्यार करने लगी।

उस लड़के ने उस लड़की से पूछा - "क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?"

उस लड़की ने जवाब दिया "हाँ"।

फिर वह लड़की उसको अपने घर ले आयी और अपने पिता से बोली - "पिता जी, हम लोगों ने शादी कर ली है।"

लड़की के पिता ने लड़के से पूछा - "क्या तुम कोई हिरन मार सकते हो?" यह सुन कर वह लड़का अपने जूतों से जमीन खुरचने लगा।

"ठीक है।" कह कर लड़की के पिता ने उसको कुछ तीर दिये और उससे हिरन मार लाने के लिये कहा।

वह उन तीरों को ले कर जंगल चला गया पर थोड़ी ही देर बाद वह वापस भी आ गया।

उसके सारे तीर खत्म हो गये थे, उसके शरीर पर खून ही खून था और उसके पास कोई शिकार भी नहीं था। वह लड़की के पिता के सामने मुँह लटकाये खड़ा था।

लड़की के पिता ने कुछ इधर सूँघा, कुछ उधर सूँघा, फिर बोला - "मुझे रैवन की टट्टी की बू आ रही है। सब जाओ और रैवन को ढूँढो। ओ लड़के तुम भी।" वे सारी रात रैवन को ढूँढते रहे पर रैवन तो वहाँ किसी को मिला नहीं।

एक दिन जब वह लड़का शिकार पर गया हुआ था तो लड़की के पिता ने एक दूसरे लड़के को बुलाया और उससे कहा - "देखो, तुम इस लड़के के पीछे पीछे जाओ और इस पर नजर रखो।"

"ठीक है।" कह कर वह लड़का चला गया।

उस लड़की का पति गाँव की तरफ गया और एक बड़ी सी चट्टान के पास जा कर रुक गया। उसने अपना एक जूता निकाला, उसको खुरचा, फिर उसने अपना दूसरा जूता निकाला और उसको भी खुरचा। फिर उसने अपने दोनों जूते फाड़ दिये।

इसके बाद उसने उस चट्टान में तीर मारे, फिर अपनी नाक में मुक्के मारे जिससे उसकी नाक में खून निकल आया। फिर वह अपने घर वापस लौट गया।

पर वह लड़का जो उसके पीछे पीछे गया था उससे पहले ही घर पहुँच गया था।

लड़की के पिता ने सबको बुलाया और कहा - "मुझे पता चला है कि यहाँ किसी के पैर में तीन उॅगलियाँ हैं।"

यह कह कर वह चारों तरफ घूमा और बोला - "सब अपने अपने जूते उतारो।"

सब अपने अपने जूते उतारने लगे। जब उस लड़की के पति की बारी आयी तो वह ज़ोर से बोला - "अगर किसी के पैर में तीन उॅगलियाँ हैं तो इसमें बुराई क्या है?" और जैसे ही उसने अपना जूता उतारा तो सबने देखा कि वह तो रैवन है।

वह बूढ़ा आदमी चिल्लाया - "देखो न बेटी, तुमने एक रैवन से शादी कर रखी है। उसने अपनी नाक कई बार उखाड़ी है और कई बार लगायी है। उसने अपने जूते फाड़ दिये हैं और वह हिरन का शिकार भी नहीं कर सकता।"

यह सब सुन कर लड़की बेचारी बहुत ज़ोर से चिल्लायी - "नहीं, नहीं, नहीं।"

फिर वह रैवन से बोली - "चलो तुम्हारे माता पिता के घर चलते हैं।"

रैवन उसको अपने गाँव ले गया। वे लोग अपने घर में घुसे तो वहाँ उस लड़की ने देखा कि उस घर में तो खाने के लिये केवल हिरन के पेट थे।

वह फिर चिल्लायी - "ओह, यहाँ तो हर जगह रैवन की टट्टी की बू आ रही है।"

रैवन चिल्लाया - "शिकायत मत करो। यहाँ हिरन के कितने सारे पेट हैं खाने के लिये।"

वह फिर चिल्लायी - "मैं अपने घर वापस जा रही हॅ़ू।"

रैवन ने भी कहा - "ठीक है जाओ।"

और वह भी वहाँ से चला गया। इस तरह वह ज़्यादा देर तक शादी शुदा नहीं रहा।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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