सोमवार, 18 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 2 - 3 रैवन और बड़ी बाढ़ : // सुषमा गुप्ता

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यह बहुत पुरानी बात है कि प्रिन्स औफ वेल्स टापू के पश्चिमी किनारे पर सुमेज़ टापू का केप फ़ैलिक्स बहुत ही सुन्दर दिखायी देता था।

उसमें एक जगह ऐसी भी दिखायी देती थी जैसे कोई वहाँ रहता हो। उन दिनों रैवन वहीं रहता था। यह बहुत पुरानी बात है, बड़ी बाढ़ के दिनों की।

रैवन वहाँ आराम से रहता था। उसको सभी चीज़ें वहीं आस पास में ही मिल जाती थीं। वहाँ उसके बहुत सारे दोस्त भी थे। पर एक समय ऐसा आया जब सब कुछ बदल गया।

एक दिन रैवन को सब कुछ बदला बदला सा लगा। रैवन को तुरन्त ही पता चल गया कि वहाँ क्या हुआ था। उस दिन काफी गरम दिन था। भाटा अपनी सीमा से बाहर चला गया था और ज्वार बहुत जल्दी जल्दी आने लगा था।

रैवन ने अपने दोस्त औटर मछली को सावधान कर दिया कि वह अपना ख्याल रखे क्योंकि अगर कोई परेशानी हुई तो रैवन तो उड़ जायेगा पर उसका क्या होगा।

बड़ी बाढ़ आ चुकी थी। सब कुछ डूब गया था सिवाय सबसे ऊॅचे पहाड़ के। रैवन यहीं उस ऊॅचे पहाड़ पर आ कर बैठ गया था और औटर मछली भी उसके पास ही बैठ गया था।

जब बाढ़ कुछ कम हुई तो रैवन ने देखा कि वहाँ का तो सब कुछ नष्ट हो चुका था और एक भी पेड़ नहीं बचा था। तब रैवन ने सब कुछ ठीक करने की तैयारियाँ शुरू कर दीं। उसने औटर से सलाह मशवरा किया।

औटर ने रैवन को बताया कि समुद्र में एक बहुत सुन्दर टापू था जिस पर उस टापू की आत्मा का राज था। हो सकता है कि वह टापू इस बाढ़ में भी ठीक हो तो उस टापू पर चलते हैं। इस टापू का नाम फौरेस्टर टापू था।

रैवन तुरन्त ही औटर के बताये टापू की तरफ उड़ गया और देखा कि वह टापू तो बिल्कुल ठीक था।

यह औटर मछली भी समुद्र के बाहर उस टापू पर आ गया और दूसरे औटर मछलियों और अपने दूसरे दोस्तों से मिला। फिर सब कुछ पहले जैसा हो गया। उस टापू की आत्मा ने सबको अपने टापू पर रहने के लिये जगह दे दी।

रैवन ने उस टापू की आत्मा को बताया कि उनके साथ क्या हुआ था क्योंकि रैवन उस टापू की आत्मा के साथ बहुत ही अच्छे तरीके से पेश आया था तो टापू की आत्मा ने भी उन सबको खाना रहना सभी कुछ दिया और पेड़ों के बीज आदि देने का भी वायदा किया।

रैवन ने एक ऐसी टोकरी बनायी जिसमें से पानी बाहर न जाये। उसने इस टोकरी को पानी से भरा और उसको ले कर अपने पुराने घर गया। वहाँ जा कर उसने पूरे टापू पर वह पानी छिड़का और उसकी जमीन को ताजा किया। इससे नाले भी वहाँ फिर से बहने लगे।

फिर वह बीज ले कर आया और उनको वहाँ बो दिया। जल्दी ही उनमें से पौधे निकल आये और उसने उन पौधों की देखभाल करनी शुरू कर दी।

बाद में उसने सारे टापुओं पर पेड़ों के कोन फेंक दिये। इससे वहाँ पर बहुत सारे पेड़ उग आये इसी लिये आज वह टापू पेड़ों से भरा पूरा है। इस तरह से रैवन और औटर ने उस टापू को बचाया।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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