रविवार, 24 सितंबर 2017

रैवन की लोककथाएँ - 3 - : 2 रैवन ने तेल बेकार किया // सुषमा गुप्ता


यह उन दिनों से बहुत दिनों बाद की बात नहीं है जब से रैवन ने धरती पर दुनिया बनायी थी लोग अपनी अपनी ज़िन्दगी जी रहे थे। इस शान्ति के समय में रैवन को भी कुछ करने का मौका मिला जिससे वह लोगों की सहायता कर सकता था।

एक बार ऐसा हुआ कि वह और उसका भतीजा ग्रे जे दोनों एक कुत्ते का ढाँचा खा रहे थे कि उसको लगा कि मैदान में कोई अजीब आदमी खड़ा था।

ग्रे जे बोला - "वे तो कुछ अजीब से दिखने वाले दो टाँगों वाले थे और उनके सिर पर गोल नारंगी टोप थे। वे लोग तीन थे और वे टुंड्रा में किसी काली चीज़ के ऊपर झुके हुए थे।

तभी उनमें से एक ने वह काली अजीब सी चीज़ छुई, उसे सूँघा और फिर ज़ोर से बोला - "अरे, यह तो तेल है।" यह सुन कर उनमें से दूसरा आदमी बहुत खुश हो कर हँसा।

और जब उसने यह कहा तो ग्रे जे ने यह बात रैवन को भी बतायी।

रैवन को इस सबको जानने की उत्सुकता हुई सो वह वहाँ से उड़ कर उस मैदान की तरफ ग्रे जे की कहानी को जाँचने के लिये उड़ गया कि वह ठीक कह रहा था या गलत।

जब उसने उन तीनों दो टाँगों वालों को ढूँढ लिया तो उसने देखा कि उन लोगों ने एक बहुत बड़ा तम्बू लगा रखा था और उनके पास ही उनका एक हवाई जहाज खड़ा था।

वह उस तम्बू के आस पास उड़ता रहा और फिर उसने वह बड़ा सा काला सा धब्बा भी देखा जो उसको ग्रे जे ने तेल के नाम से बताया था।

फिर उसने इधर उधर देखा तो उसको वे तीनों आदमी कहीं दिखायी नहीं दिये। उसने सोचा कि शायद वे तम्बू के अन्दर होंगे क्योंकि उसको उनकी आवाज तो सुनायी दे रही थी पर वे दिखायी कहीं नहीं दे रहे थे।

वह तम्बू के पास ही नीचे आ कर बैठ गया और उन लोगों की बातें सुनने लगा। जो कुछ उसने सुना उससे तो उसके पंख ही खड़े हो गये।

"यह काफी बड़ा लगता है, सैम। हम लोग यहाँ के तेल से करोड़ों डौलर कमा सकते हैं। मगर हम यह जमीन खरीदें कैसे? यह तो उस पास वाले गाँव की है।"

"पैटे, तुम चिन्ता न करो हमारी कम्पनी इसे इस गाँव से खरीद लेगी। वे लोग इसे हमें दे देंगे। आजकल हर आदमी को पैसे चाहिये और उस पैसे से वह अमीर बनना चाहता है। और अगर वे लोग नहीं भी माने तो हमारे पास दूसरा तरीका भी है।"

तीसरा आदमी जिसके दाढ़ी भी थी और वह उन दोनों से उम्र में बड़ा भी था सोच रहा था कि वे दोनों ऐसा कह भी कैसे सकते थे।

वे लोग उन आदमियों के बारे में बात कर रहे थे जो वहाँ पर उस गाँव में हजारों साल से रहते चले आ रहे हैं। उसको नहीं लगता था कि यह सब उन गाँव वालों को लिखना ठीक था।

इस पर पैटे बोला - "रूटन, तुम इस बारे में चुप रहो। तुम केवल हमारे जहाज चलाने वाले हो। और अगर तुमने इस खोज के बारे में एक शब्द भी मुँह से निकाला तो समझ लो कि तुम ज़िन्दा नहीं बचोगे।"

लेकिन रूटन बोला - "जैसा तुम कहो साथियों। पर फिर बैथैल पहुँचने पर तुम कोई दूसरा जहाज चलाने वाला ढूँढ लेना। मैं तुम जैसे लोगों के साथ काम नहीं कर सकता।"

रैवन को यह बातचीत सुन कर बड़ा आश्चर्य हुआ और वह सोचने लगा कि रूटन को अब आगे से बहुत सावधानी से रहना होगा। और रूटन को ही क्यों यहाँ आस पास में रहने वाले सभी लोगों को सावधानी से रहना होगा।

यह सोचना ज़्यादा मुश्किल नहीं था कि अगर उस कम्पनी ने यह जमीन खरीद ली तो इस जमीन का और यहाँ के लोगों का क्या हाल होने वाला था।

उसने अपने उत्तर में रहने वाले भाइयों से उनकी कई भयानक कहानियाँ सुनी थीं कि अलास्का के उत्तर के देश में क्या हुआ था। वहाँ की जमीन और आदमियों की ज़िन्दगी दोनों का ही बहुत बुरा हाल हुआ था।

हालाँकि उन जगहों में रैवन आदमियों की ऐसी सब बातों से दूर ही रहता था पर यह सब सुन कर उसकी अक्लमन्दी यह कह रही थी कि उसको इस मामले में दखल देना ही पड़ेगा।

अचानक उस तम्बू का दरवाजा खुला और उनमें से दो तेल वाले आदमी उस मशीन की तरफ चले। वे आपस में बात करते जा रहे थे। पैटे बोला - "सैम, हमें रूटन को निकालना पड़ेगा। वह कुछ ज़्यादा ही जानता है।"

सैम बोला - "हाँ यह तो है। बैथेल चल कर देखेंगे। चिन्ता मत करो। वह आसानी से गायब हो जायेगा। जरा हमको बैथेल पहुँचने दो। हो सकता है कि वह डूब ही जाये।" कह कर वह मुस्कुराया।

यह सुन कर रैवन ने सोचा कि अच्छा होगा कि वह रूटन को इन लोगों के इरादों के बारे में पहले से बता दे सो जैसे ही पैटे और सैम दोनों अपने तम्बू में फिर से घुस गये और रूटन अपना जहाज देख रहा था तो रैवन ने अपनी चोंच ऊपर उठायी और एक आदमी का रूप ले लिया।

फिर उसने रूटन को हाथ हिला कर अपने पास आने के लिये कहा। रूटन उसको वहाँ देख कर आश्चर्यचकित तो हो गया पर फिर उसके पास चला गया और उसके फुसफुसाते शब्दों को ध्यान से सुना।

रैवन ने उससे कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है सब ठीक हो जायेगा और फिर उसने उसको उसके तम्बू में वापस भेज दिया। जब तम्बू का दरवाजा बन्द हो गया तो फिर वह चिड़िया के रूप में आ गया और बैथैल की तरफ उड़ गया।

जैसा कि पहले से ही पक्का था जैसे ही वे तीनों बैथैल पहुँचे सैम ओर पैटे ने रूटन को बाँध दिया और अपनी वैन में डाल दिया। फिर वे कुस्कोक्विम नदी की तरफ चले।

जब वे लोग नदी के एक ऊँचे से किनारे पर रुके जहाँ पर नदी के पानी का बहाव बहुत तेज़ था उन्होंने उससे पूछा कि वह कुछ कहना चाहता था क्या?

कि अचानक उनके पीछे से रैवन की बहुत ज़ोर की आवाज आयी। जैसे ही उन दोनों ने पीछे मुड़ कर देखा तो उन्होंने वहाँ उसी आदमी को खड़े पाया जो रूटन को उसके तम्बू के पास मिला था।

उस आदमी ने अपनी काली आँखों से उन दोनों की तरफ घूरा तो वे दोनों बेजान से हो कर उसके पैरों में गिर गये।

फिर रैवन ने रूटन को खोला और अपनी असली शक्ल दिखायी। फिर उसने रूटन से पूछा कि उन दोनों ने कितनी खबर अपनी तेल की कम्पनी को भिजवायी है।

रूटन ने जवाब दिया - "अभी तक तो उन्होंने कोई खबर अपनी कम्पनी को नहीं पहुँचायी पर इनके सारे कागज और कम्प्यूटर डिस्क जिन पर इनकी यह सब खबर है वह सब इस वैन में एक लोहे के बक्से में बन्द है। ये लोग यह सब कल टैक्सास ले कर जाने वाले थे।"

रैवन हँसा और यह सुन कर उसको थोड़ा सी शान्ति मिली कि उस तेल की सारी खबर अभी वहीं थी। अब उसका काम आसान हो गया था।

फिर उसने रूटन को समझाया कि किस प्रकार उसको तेल की इस खोज की खबर को दुनिया को बताने से बचाना हैं। रूटन मान गया और उसने रैवन की हर तरह से सहायता करने का वायदा किया।

रैवन केवल यही एक सहायता सोच सका और बोला - "एक तो लोहे का बक्सा छिपा कर रख लिया जाये और दूसरे जो कुछ भी तुमने देखा है उसके बारे में तुम बिल्कुल चुप रहो। किसी से कुछ न कहना।"

जब रूटन वह लोहे का बक्सा वैन में से निकाल रहा था तो रैवन फिर से चिड़िया के रूप में बदल गया और वैन के ऊपर बैठ कर कुछ सोचने लगा।

"ठीक है ऐसा ही होना चाहिये।" कह कर वह वहाँ से आसमान में उड़ गया और कुछ देर वहीं चक्कर काटता रहा। रूटन ने ऊपर देखा पर उसे वह वहाँ कहीं दिखायी नहीं दिया।

अचानक उसकी आँखों के सामने एक बिजली सी चमकी और वह बक्सा आसमान में ऊपर उठता चला गया।

वह बक्सा फिर एक पेड़ों के झुंड की तरफ चला और वहाँ जा कर एक सबसे ऊँचे पेड़ के पास पहुँच कर उसकी सबसे ऊँची शाख पर जा कर बैठ गया और एक बड़ी चील का घोंसला बन गया।

जब रूटन ने धरती की तरफ देखा तो उसने देखा कि सैम और पैटे भी अपना रूप बदल रहे थे। वे क्रिसमस के पेड़ के पुराने लठ्ठों में बदल गये थे और नदी की तरफ लुढ़कने लगे थे।

जल्दी ही वे नदी में गिर पड़े और बेरिंग सागर की तरफ चल पड़े जहाँ वे किसी घर को गरम रखने के लिये जलाने के काम आयेंगे।

अब रैवन को ध्यान आया कि इस तरह तो रूटन को उस तेल की कम्पनी से खतरा हो जायेगा क्योंकि वह उसके ऊपर कत्ल का इलजाम लगा देगी। सो वह उड़ कर नीचे आया, अपनी चोंच उठायी और आदमी के रूप में आ गया।

आदमी के रूप में आ कर उसने रूटन से पूछा - "क्या तुम रैवन लोगों के साथ मिलना पसन्द करोगे? इस तरह से तुम यहाँ की जमीन और यहाँ के लोगों को तेल जैसी कम्पनियों से और उसी तरह के दो टाँगों वाले जानवरों से बचा कर रखोगे।"

रूटन ने कुछ सोचा फिर हाँ कर दी। इस पर उसने भी वही रूप लेना शुरू कर दिया जो रैवन का था। फिर दोनों ने अपनी अपनी चोचें टकरायीं और उस जगह की तरफ उड़ गये जहाँ तेल मिलने वाला था।

कुछ घंटे उड़ने के बाद रैवन और उसका नया दोस्त रूटन वहीं पहुँच गये जहाँ वह तेल का तालाब था और वे दोनों उस काले चिकने तालाब के पास जा कर बैठ गये जो अब पहले से भी बड़ा हो चुका था।

वे वहाँ थोड़ी देर बैठे रहे और यह सोचते रहे कि इस काले शाप से हमेशा के लिये कैसे छुटकारा पाया जाये। वे सोचते रहे, सोचते रहे और आपस में काफी देर तक इसके बारे में बात भी करते रहे। आखिर में उनको इसका हल मिल ही गया।

रैवन ने बताया कि उसके पास ऐसी ताकत थी कि वह वहाँ से तेल हमेशा के लिये गायब कर सकता था। यहाँ तक कि पूरी धरती के अन्दर से गायब कर सकता था। पर अपने दोस्त से बात करने के बाद उसने अपना यह विचार छोड़ दिया।

रूटन ने उसको यह करने से मना कर दिया क्योंकि वह आजकल के आदमियों की जरूरतों को जानता था। क्योंकि गाँवों में भी तो आजकल यह तेल सभी लोग इस्तेमाल करते हैं।

किसी दिन जब यह तेल और सब जगह खत्म हो जायेगा तो फिर यह यहीं से निकला हुआ काम आयेगा। पर अभी वह रैवन के विचारों से राजी था।

रैवन बोला - "तुम ठीक कहते हो दोस्त। मैं इसे पूरी धरती से गायब नहीं करूँगा। तुम बहुत अक्लमन्दी की बातें करते हो। मैं केवल धरती के ऊपर जो यह काला शाप है जिसे तुम तेल कहते हो केवल उसी को गायब करूँगा।

क्योंकि आगे आने वाले समय में जैसा तुम कहते हो अगर आदमी को इसकी जरूरत होगी तब मैं बड़े लोगों से बात करके उनको बता दूँगा कि वह कहाँ है। पर अभी मैं अपने पंख फड़फड़ा कर इस तेल को यहीं सुखा देता हूँ।"

उसने चार बार अपने पंख उस तेल के ऊपर फड़फड़ाये और वह तेल वहाँ से तुरन्त ही गायब हो गया।

उसके बाद रैवन ने चारों दिशाओं में अपना जादू फेंका जिससे कोई तेल कहीं भी न पाया जा सके जब तक कि वह भगवान की इस दुनिया की इज़्ज़त करना न सीख ले।

अगर ऐसा कभी हुआ तभी वह अपना जादू धरती के ऊपर से हटायेगा और यह काला तेल दुनिया वालों को इस्तेमाल करने देगा।

पर अभी के लिये इतना ही काफी है क्योंकि अभी इससे कम से कम आदमी जानवर आदि सभी ज़िन्दा लोग सुरक्षित रहेंगे।


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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया की 45 लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी...)

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