मंगलवार, 12 सितंबर 2017

व्यंग्य // फर्जी नेताओं की सूची की प्रतीक्षा // राकेश अचल

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फर्जी नेताओं की सूची की प्रतीक्षा

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाबों की फेहरिस्त जारी कर देश के जनमानस में एक नयी उम्मीद जगा दी है .फर्जी बाबाओं की ही तरह देश फर्जी नेताओं के बारे में भी जानने को उत्सुक है .फर्जी बाबाओं में से जिस तरह अनेक जेलों में हैं और बाकी मेलों-ठेलों में ,उसी तरह देश में तमाम फर्जी नेता जेलों में तो हैं लेकिन उन्हें फर्जी घोषित नहीं किया गया है.

बदकिस्मती से देश में नेताओं का कोई अखाड़ा परिषद नहीं है .नेताओं के अपने अखाड़े तो हैं लेकिन किसी ने अब तक इन अखाड़ों को एक कर परिषद बनाने का काम नहीं किया .ये भागीरथ प्रयास है जो कोई करना ही नहीं चाहता .इसके बिना नेताओं की अधिमान्यता की कोई भरोसेमंद व्यवस्था कायम नहीं हो पा रही .बिना परिषद के अखाड़ेबाजी को अपराध माना जाना चाहिए था ,लेकिन युगों से सवाल ये है की नाइयों की बरात में हजामत बनाये कौन ?

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देश में जिस तरह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ले-देकर किसी को भी मंडलेश्वर और महामंडलेश्वर की उपाधि दे देती है ठीक उसी तरह किसी को भी नेता बनाने का काम अखाड़ेबाज नेता करते हैं .आपके मॉस मंहगी कार,मोटा चन्दा और माफिया होने का बिल्ला हो तो कोई भी सियासी अखाड़ा आपको नेता घोषित कर देगा .अब देश में पहले की तरह नेता बनने के लिए जन आंदोलनों में शरीक होने,पुलिस की गोलियां खाने या जेल जाने की जरूरत नहीं .हाँ अगर आप किसी और कारण से जेल गए हों और आपके पास जेल जाने का प्रमाणपत्र हो तो भी आप इसका इस्तेमाल विशेष योग्यता की तरह कर सकते हैं .

हमारे देश में नेता बनने की कोई विशेष योग्यता है ही नहीं. आपने चाहे चाय बेचीं हो या स्मैक,इससे कोई फर्क नहीं पड़ता .नेता बनने और बनाने में हमारा देश परम उदार है. देश को ये उदारता बिरासत में मिली है .इसी उदारता के कारण देश में नेतागिरी का उद्योग तेजी से फल फूल रहा है. रोज नए दल बन रहे हैं और रोज नए नेता .नए नेता किसी भी समय,किसी भी मुद्दे पर पुराने नेता को धूल चटा सकते हैं .बैसे अधिकाँश नेता चाटने-चूमने में बाबाओं की तरह ही सिद्धस्त होते हैं .कोई तलवे चाटता है तो कोई कुछ और .

तो बात हो रही थी असली और फर्जी नेताओं की. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने तो फर्जी नेताओं की फेहरिस्त जारी कर अपना सामाजिक दायित्व पूरा कर लिया लेकिन फर्जी नेताओं की फेहरिस्त कौन बनाये ? वैसे ये काम चुनाव आयोग को करना चाहिए लेकिन चुनाव आयोग के पास पहले से बहुत काम है इसलिए मुमकिन नहीं की चुनाव आयोग ये पुण्य काम करे !.देश की अदालतें जनहित में ये काम कर सकतीं हैं किन्तु इसके लिए पहले किसी को जनहित याचिका दायर करना पड़ेगी .सवाल ये है की ये जोखिम भरा काम करेगा कौन ?

भारत में फर्जी नेताओं की शिनाख्त का काम सरकार भी कर सकती है. इसके लिए सरकार को केवल एक आयोग बनाना पडेगा .ये आयोग एक न एक दिन इस पुण्य काम को अंजाम दे सकता है. ये बात और है की सरकार इस आयोग द्वारा बनायीं गयी फर्जी नेताओं की फेहरिस्त को मंजूर करे या न करे . प्राय:सरकारें किसी भी आयोग की सिफारिशों को मंजूर नहीं करतीं. ये सिफारिशें संसद पटल पर रखने काबिल भी नहीं होतीं,क्योंकि इन्हें काबिल लोग बनाते हैं

.फर्जी नेताओं को खोजने का काम हम किसी चीनी कम्पनी को दे सकते हैं .राष्ट्रहित के अनेक काम हम विदेशियों को देते ही हैं. हमने सरदार वल्लभ भाई पटेल की दुनिया की सबसे लम्बी प्रतिमा बनाने का काम चीन को दिया ही है. बुलेट ट्रेन का काम हम जापान को दे ही रहे हैं तो ऐसे ही फर्जी नेताओं को तलाशने का काम हम अपने किसी पड़ोसी देश को देकर अपने रिश्ते भी सुधर सकते हैं और देश की नेतागिरी को भी .

अखाडा परिषद की फेहरिस्त को देश के फर्जी नेता या उनके समर्थक मानेंगे इसमें मुझे सन्देह है क्योंकि हमारे यहां तो लोग देश की सबसे बड़ी अदालत का फैसला भी आसानी से नहीं मानते , हमारी सरकारें सबसे बड़ी अदालतों के फैसले आने के बाद क़ानून बदल कर ऐसे फैसलों को बेअसर कर देतीं हैं .फर्जी नेताओं की फेहरिस्त को तो इस देश की संसद ही सर्व सम्मति से खारिज कर सकती है .

आपको याद होगा की हमारी संसद और हमारे सांसद उन मुद्दों पर युगों से एकमत होते हैं जिनमें उनका सीधा नफ़ा-नुकसान जुड़ा होता है .संसद भले ही महिला आरक्षण विधेयक पारित न कर पाए लेकिन सांसदों के वेतन-भत्तों का विधेयक ध्वनिमत से पारित कर लेती है .ये नेताओं का परस्पर सद्भाव है .बहरहाल हम आशावादी लोग हैं,भाग्य पर हमारा भरोसा है. पुनर्जन्म को हम मानते हैं इसलिए हमें यकीन है की एक न एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब हम फर्जी नेताओं की फेहरिस्त हासिल कर पाएंगे .जिस दिन ऐसी कोई फेहरिस्त बनेगी वो दिन लोकतंत्र के लिए स्वर्णिम दिन होगा .

@ राकेश अचल

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