शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

व्यंग्य - तरंग // फेसबुक के संसार में भांत भांत के लोग…… // प्रो.(डॉ.) अजय जोशी

व्यंग्य - तरंग

फेसबुक के संसार में भांत भांत के लोग……

प्रो.(डॉ.) अजय जोशी

प्रो.(डॉ.) अजय जोशी

लेखक -सम्पादक

हाल ही में एक खबर पढ़ी कि कुछ भाइयों ने पहले कत्ल किया फिर लाश के साथ डांस किया और उसके बाद खुद फेसबुक पर लाइव ही जुर्म को कबूल कर लिया। यह तो फेसबुक पर विराजमान भाई लोगों की बानगी भर है। फेसबुक एक ऐसा संसार है जिस पर भांत भांत के लोग हैं। ये सभी महानुभाव पूरी दुनिया के हैं और फेसबुक को अपनी भड़ास निकालने और अपनी भांति भांति की गतिविधियां करने का अड्डा बनाये हुए ।

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लाइव जुर्म के कबूलनामे के अनोखे कारनामे के बाद सीधे आते हैं उन सीधे साधे भाई बहिनों पर जो फेसबुक पर चुपचाप अपना अकाउंट बना कर बैठ जाते हैं। न अपनी फ़ोटो अपलोड करते हैं और न ही अपना स्टेटस डालते है। फ्रेंड बन जाते हैं, सबके फ़ोटो और स्टेटस को एक मौन साधक की तरह देखते रहते है। न लाइक, न कमेंट। ये सभी को निरपेक्ष भाव से देखते हैं। इसके विपरीत बहुत एग्रेसिव श्रेणी के लोग भी हैं जो रोजाना अपना फ़ोटो या कोई स्टेटस डालते ही हैं। चाहे वह गुड मोर्निंग या गुड इवनिंग का ही क्यों न हो। इसके आलावा अपने या दूसरों के फ़ोटो डालना हर मित्र की पोस्ट या फ़ोटो पर लाइक या कमेंट या दोनों करना अपना धर्म समझते हैं। वैसे तो इस केटेगरी के लोग अच्छे कॉमेंट ही डालते हैं लेकिन यह जरूरी नही है। कई बार ऐसे गूढ़ वाक्य लिख जाते हैं जिनका मतलब उनको खुद हो पता नही होता। अब जिसने पोस्ट डाली है वह ढूंढता रहे इसका मतलब। ये खुद अपनी या किसी दूसरी तरह की ढेरों फ़ोटो डालना भी पसंद करते हैं चाहे इनकी फ़ोटो को कोई पसंद करे या नही।

फेसबुक पर ऐसे लोगों का भी एक बहुत बड़ा समूह या यो कहें कि गिरोह है जो किसी सुन्दर बाला के रूप में अपना फेसबुक आईडी बनाते हैं और उसपर सुन्दर बाला की ही प्रोफाइल फ़ोटो लगा देते हैं। फिर उस पर लगाए गए फ़ोटो पर आने वाले लाइक और कॉमेंट का मजा पाते है। सुन्दर फ़ोटो लगी है तो नॉइस ,क्यूट, सेक्सी जैसे शब्दों वाले कमेंट तो आने ही हैं, वे भाई लोग अपने आप को सुन्दर बाला मान इसका आंनद प्राप्त करते हैं। मौका पड़ने पर उस सुन्दर बाला के रूप में चैट भी करते हैं। यह चैट प्यार भरी बातों वाली चैट तक भी जा सकती है। इस किस्म के भाई किसी शायर की उन पंक्तियों वाली श्रेणी के होते है जिनमे कहा गया है "वो हमे ठगते रहे हम उन्हें ठगते रहे" क्योंकि ये लोग मानते हैं कि दूसरा जो उनसे चैट कर रहा है वह उसको लड़की मान रहा है जबकि दूसरा भी यह जान रहा होता है कि बंदा है तो लड़का लेकिन बना हुआ है लड़की, लेकिन टाइम पास में अपना क्या जाता है।

मेरे जैसे लिखने पढ़ने वालों को तो भाई मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक के रूप में वरदान ही दिया है। हम अपनी हर तरह की भड़ास चाहे वह कहानी हो या कविता या बड़ा लेख या भाषण, हम बिना रोकटोक के फेसबुक रूपी अखबार या पत्रिका या कुछ भी मानो वहीँ छापते रहते है। अब हमे अपनी रचना छपवाने के लिए किसी संपादक की न गरज करनी पड़ती है और न ही उसकी बेरहमी से की गई काट छाँट का शिकार होना पड़ता है। न ही दस रचनाएं भेजने पर एक छाप कर अहसान जताने वाले संपादकों की जरुरत रह गई है। हम मर्जी आये जितनी संख्या में और जितनी लंबी रचना को पोस्ट करके उसको छपने के समान आंनद की अनुभूति प्राप्त कर सकते हैं। अब आप कहोगे की भाई इतनी बड़ी रचना को कौन पढेगा फेसबुक पर। तो भाई अख़बार में भी कौन पढता है हमारी पूरी रचना को। ज्यादातर तो देखते ही हैं। यहाँ भी देख लेंगे। कुछ दोस्त और शुभचिंतक लोग लाइक कर देंगे। कुछ अच्छी रचना ,अच्छी कविता,वाह क्या कहने जैसे कॉमेंट भी दे देंगे। अपना काम तो बन गया।

अपने फ़ोटो को खुद खींचा उसको तो सेल्फी नाम मिल गया पर मैं उस तकनीकी शब्द को ढूंढ़ रहा हूँ जिसको अपने फ़ोटो पर आत्ममुग्ध होने वाले लोगों के लिए काम में लिया जा सके । फिलहाल तो मैं यह बता रहा हूँ कि इस तरह के भाई बहिनों की भी सशक्त उपस्थिति है फेसबुक पर। ये लोग अपना हर तरह का हर पोज का हर परिस्थिति या अवसर पर अपना फ़ोटो फेसबुक पर अपलोड कर के परम सुख की अनुभूति करते हैं। इनका सुख तब और बढ़ जाता है जब मित्र लोग उस फ़ोटो को लाइक कर दे ,अच्छे कॉमेंट कर दे। इस हेतु वे फ़ोटो को ज्यादा से ज्यादा मित्रों को टैग करते हैं, उनको इनबॉक्स में लाइक और कमेंट करने के लिए लिखते हैं। जरुरत पड़ने पर फोन और व्हाट्सअप का सहारा भी लेते हैं। ज्यादा से ज्यादा लाइक और कॉमेंट पाकर उनकी आत्ममुग्धता का लेवल बहुत हाई हो जाता है और वे इससे परमानन्द की प्राप्ति करते हैं। फेसबुक पर उपस्थित लोगों की कथा का यह तो एक छोटा सा पार्ट समझिये मैं भी फेसबुक रूपी इस संसार का एक छोटा सा हिस्सा ही हूँ । यह कथा तो " हरि अनंत हरी कथा अनंता" जैसी है। फिर कभी मौका मिला तो फिर लिखेंगे। फिलहाल इतना ही।

सम्पादक,

मरु व्यवसाय चक्र और मरु नवकिरण ,

बिस्सों का चौक, बीकानेर-३३४००१

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