गुरुवार, 5 अक्तूबर 2017

इटली की लोक कथाएँ–2 : 10 - सेन्ट जोसेफ का भक्त // सुषमा गुप्ता

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एक बार एक आदमी था जो सेन्ट जोसेफ का बहुत बड़ा भक्त था। वह केवल सेन्ट जोसेफ को ही मानता था और किसी सेन्ट को नहीं जानता था।

वह अपनी सारी प्रार्थनाएँ सेन्ट जोसेफ के नाम करता था। उसी के लिये मोमबत्ती जलाता था। उसी के नाम का दान देता था। उसी को याद करता था। कहने का मतलब यह है कि वह सेन्ट जोसेफ के अलावा और किसी भी सेन्ट को जानता ही नहीं था।

जब उसके मरने का दिन आया तो वह सेन्ट पीटर के सामने गया। सेन्ट पीटर ने उसको अन्दर लेने से मना कर दिया क्योंकि उसके पास जितनी भी प्रार्थनाएँ थीं जो उसने अपनी ज़िन्दगी में कही थीं वे सब सेन्ट जोसेफ के नाम की थीं।

उसने बताने के लिये कोई अच्छा काम भी नहीं किया था और ऐसे बरताव किया था जैसे कि वह कोई बहुत ही बड़ा मालिक था। उसके लिये दूसरे सेन्ट जैसे कहीं कुछ थे ही नहीं।

सेन्ट जोसेफ के भक्त ने सोचा “यह तो मुझे अन्दर आने नहीं दे रहा पर जब मैं यहाँ तक आ ही गया हूँ तो लौटने से पहले मुझे सेन्ट जोसेफ से कम से कम मिल तो लेना ही चाहिये।”

सो उसने सेन्ट पीटर से सेन्ट जोसेफ से मिलने की इच्छा प्रगट की कि अगर हो सके तो वह उसको सेन्ट जोसेफ से मिलवा दे। सेन्ट पीटर ने सेन्ट जोसेफ को बुलवाया। सेन्ट जोसेफ आया तो उसने देखा कि वहाँ तो उसका भक्त खड़ा है।

वह बोला — “अरे तुम? बहुत अच्छे। मैं तुमको यहाँ अपने साथ देख कर आज बहुत खुश हूँ। आओ अन्दर आ जाओ।”

वह आदमी बोला — “मै अन्दर नहीं आ सकता क्योंकि यह सेन्ट पीटर मुझे आने नहीं दे रहे।”

“पर यह तुमको अन्दर क्यों नहीं आने दे रहे?”

“क्योंकि इनका कहना है कि मैंने केवल आपको ही पूजा है और किसी दूसरे सेन्ट को नहीं।”

“पर मैं तो तुमको अन्दर बुला रहा हूँ। इससे क्या फर्क पड़ता है कि तुमने किसी और सेन्ट को पूजा है या नहीं। जब मैं तुमको अन्दर बुला रहा हूँ तो तुम अन्दर आ जाओ। सब सेन्ट एक जैसे हैं।”

पर सेन्ट पीटर उसको अन्दर आने से रोकते ही रहे। इस बात पर सेन्ट पीटर और सेन्ट जोसेफ दोनों सेन्ट में बहुत ज़ोर की लड़ाई हो गयी।

अन्त में सेन्ट जोसेफ ने सेन्ट पीटर ने कहा — “या तो तुम मेरे इस भक्त को अन्दर आने दो या फिर मैं अपनी पत्नी और अपने बेटे को अपने साथ ले कर यह स्वर्ग कहीं और ले जा रहा हूँ।”

अब सेन्ट जोसेफ की पत्नी तो “आवर लेडी” थी और उसका बेटा “लौर्ड” था। और यह सब तो सेन्ट पीटर को बिल्कुल भी मान्य नहीं था।

सो यह सुन कर सेन्ट पीटर ने इसी में अपनी अक्लमन्दी समझी कि वह सेन्ट जोसेफ के भक्त को अन्दर आने दे। और उसने उसको अन्दर आने दिया।

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं की एक अन्य पुस्तक - रैवन की लोक कथाएँ में से एक लोक कथा यहाँ पढ़ सकते हैं. इथियोपिया इटली की बहुत सी अन्य लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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