सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–3 : 6 राजकुमारी जिसको कभी पेट भर अंजीर नहीं मिलीं // सुषमा गुप्ता

3 राजकुमारी जिसको कभी पेट भर अंजीर नहीं मिलीं[1]

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एक राजा था जिसकी एक बेटी थी। उसको अंजीर बहुत पसन्द थीं। वह टोकरे के टोकरे भर कर अंजीर खा जाती थी। वह कभी भी कितनी भी अंजीर खा कर सन्तुष्ट नहीं होती थी।

सो उस राजा ने अपने राज्य में यह मुनादी पिटवा दी कि जो कोई भी उसकी बेटी को अंजीर दे कर सन्तुष्ट करेगा वह अपनी बेटी की शादी उसी से करेगा।

बहुत सारे लोग राजकुमारी के लिये बहुत सारी अंजीर ले कर आये पर हमेशा ही उसके लिये वे कम पड़ जाती थीं।

एक उम्मीदवार एक पूरी टोकरी भर कर उसके लिये अंजीर ले कर आया पर इससे पहले कि वह उनको उसको खाने के लिये देता उसने उन सब अंजीरों को खा कर खत्म कर दिया। और जब वे खत्म हो गयीं तो वह बोली “और”।

ऐसे ही समय में तीन लड़के एक खेत में खुदायी कर रहे थे कि सबसे बड़े लड़के ने कहा — “अब मैं खेत को और नहीं खोदना चाहता। मैं तो जाऊंगा और राजा की बेटी को उसके मन भर कर अंजीर खिला कर आऊंगा और फिर उससे शादी कर लूँगा।”

वह एक बहुत बड़ी सी टोकरी ले कर एक अंजीर के पेड़ पर चढ़ गया। जब वह काफी भर गयी तो वह उस टोकरी को ले कर राजा के महल को चला।

महल के रास्ते में उसको उसका एक पड़ोसी मिला। वह उस लड़के से बोला — “तुम्हारी अंजीर बहुत अच्छी हैं मुझे एक अंजीर दो न।”

लड़का बोला — “नहीं मैं तुम्हें एक भी अंजीर नहीं दे सकता। ये अंजीर मैं राजकुमारी को खिलाने के लिये ले जा रहा हूँ और तुम्हें देने के बाद तो ये अंजीर कम हो जायेंगीं इसलिये मैं तुम्हें इनमें से एक भी अंजीर नहीं दे सकता।” और यह कह कर वह आगे चल दिया।

वह महल पहुँचा तो उसको राजा की बेटी के पास ले जाया गया। वहाँ पहुँच कर उसने वह अंजीर का टोकरा राजा की बेटी के सामने रख दिया।

जैसे ही उसने वह टोकरा राजा की बेटी के सामने रखा एक पल में ही उसमें से सारी अंजीरें खत्म हो गयीं। अगर उसने वहाँ से वह टोकरा न उठा लिया होता तो शायद वह राजकुमारी वह टोकरा भी खा जाती।

वह लड़का बेचारा दुखी मन से घर वापस चला गया।

अब बीच वाले भाई ने कहा — “मैंने भी काफी खुदायी कर ली अब मैं और खुदायी नहीं करना चाहता। मैं भी राजा की बेटी को उसके मन भर कर अंजीर खिला कर अपनी किस्मत आजमाऊंगा।”

कह कर वह भी पेड़ पर चढ़ा, अंजीरों से अपनी टोकरी भरी और महल की तरफ चल दिया। रास्ते में उसको भी उसका एक पड़ोसी मिला और उसने भी उस लड़के से एक अंजीर माँगी।

उस लड़के ने अपने कन्धे उचकाये और आगे बढ़ गया।

महल पहुँच कर उसने भी अपनी टोकरी राजा की बेटी के सामने रखी। पर जैसे ही उसने वह टोकरी उसके आगे रखी वह उस टोकरी की सारी अंजीरें खा गयी।

अगर वह भी अपनी खाली टोकरी उसके सामने से न उठा लेता तो शायद वह उसको भी खा जाती। वह भी उदास मन से घर वापस आ गया।

अब सबसे छोटे लड़के की बारी थी। उसने कहा कि वह भी महल जा कर अपनी किस्मत आजमाना चाहता है।

सो उसने भी अपनी टोकरी उठायी, पेड़ पर से टोकरी भर के अंजीरें तोड़ीं और राजा की बेटी को उनको पेट भर खिलाने के लिये चल दिया।

वह अपनी टोकरी लिये जा रहा था कि उसको भी अपना वही पड़ोसी मिला जो उसके दोनों भाइयों को मिला था। उसने भी इस लड़के से एक अंजीर माँगी।

लड़के ने अपनी टोकरी उसके सामने करते हुए कहा — “तुम एक ही अंजीर क्यों बल्कि तीन अंजीर भी ले सकते हो।” पर उस पड़ोसी ने उस टोकरी में से केवल एक ही अंजीर खायी।

फिर उसने उस लड़के को एक जादू की छड़ी दी और कहा — “जब तुम वहाँ पहुँच जाओ तो बस तुम्हें यही करना है कि इस छड़ी को जमीन पर मारना है और इसके जमीन पर मारते ही यह टोकरी जैसे ही खाली होगी फिर से भर जायेगी। और तुम्हारी अंजीरें कभी कम नहीं पड़ेंगी।”

वह लड़का यह सुन कर बहुत खुश हुआ और अपनी टोकरी ले कर महल जा पहुँचा। उसको भी और लोगों की तरह से राजा की बेटी के सामने ले जाया गया।

हमेशा की तरह से एक पल में ही राजा की बेटी ने वह अंजीरों की टोकरी खाली कर दी। पर जैसे ही वह टोकरी खाली हुई उस लड़के ने अपनी जादू की छड़ी को जमीन पर मारा और वह टोकरी फिर से अंजीरों से भर गयी।

ऐसा तीन बार हुआ। तीन टोकरी अंजीर खा कर राजा की बेटी ने अपने पिता से कहा — “पिता जी, अंजीर? ओफ मुझे अब और अंजीर नहीं चाहिये।”

राजा उस लड़के से बोला — “तुम जीत गये हो यह तो ठीक है पर अगर तुम मेरी बेटी से शादी करना चाहते हो तो तुमको समुद्र पार उसकी चाची को शादी में बुलाने के लिये उसके पास जाना पड़ेगा।”

यह सुन कर वह लड़का कुछ दुखी सा हो कर अपने घर चला गया। जैसे ही वह घर पहुँचा तो बाहर की सीढ़ियों पर उसका वह पड़ोसी खड़ा था जिसने उसको जादू की छड़ी दी थी। उसने उसको अपना सारा हाल बताया।

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पड़ोसी ने उसको एक बिगुल[2] दिया और कहा — “तुम समुद्र के किनारे चले जाओ और वहाँ जा कर इसे बजाना।

राजकुमारी की चाची जो समुद्र पार रहती है वह इसकी आवाज सुन लेगी और वहाँ आ जायेगी। तब तुम उसको राजा के पास ले जाना।”

लड़के ने उसको बहुत बहुत धन्यवाद दिया और समुद्र के किनारे जा कर उस बिगुल को बजाया। उस बिगुल की आवाज सुनते ही राजा की बेटी की चाची समुद्र पार करके उसके पास आ गयी और वह उसको राजा के पास ले गया।

चाची को महल में देख कर राजा बोला — “बहुत अच्छे। पर मेरी बेटी से शादी करने के लिये तुम्हारे पास वह सोने की अंगूठी भी तो होनी ही चाहिये जो समुद्र की तली में पड़ी है नहीं तो तुम उसे क्या पहनाओगे।”

यह सुन कर तो वह नौजवान बहुत ही नाउम्मीद हुआ और वह फिर घर वापस चल दिया। घर पहुँचने पर वह फिर अपने उसी पड़ोसी से मिला और उसको सारी बात बतायी।

उस पड़ोसी ने उससे कहा कि वह समुद्र के किनारे जाये और फिर से अपना वही बिगुल बजाये।

उसने ऐसा ही किया तो अब की बार एक मछली अपने मुँह में एक अंगूठी दबाये समुद्र में से कूद कर बाहर आ गयी। लड़के ने वह अंगूठी उसके मुँह में से निकाल ली और उसको ले जा कर राजा को दे दिया।

राजा उस अंगूठी को देख कर आश्चर्यचकित रह गया पर फिर बोला — “देखो इस थैले में तुम्हारी शादी की दावत के लिये तीन खरगोश हैं पर वे बहुत ही दुबले पतले हैं। इनको तीन दिन और तीन रात के लिये खाना खिलाने के लिये बाहर जंगल में ले जाओ और फिर इसी थैले में रख कर उनको वापस ले आना।”

पर खरगोश को जंगल में पहले खुला छोड़ने के लिये और फिर दोबारा उनको पकड़ने के लिये किसने सुना है?

वह लड़का बेचारा फिर से अपनी समस्या ले कर उसी पड़ोसी के पास पहुँचा। पड़ोसी ने कहा — “जब अंधेरा हो जाये तब यह बिगुल बजाना तो वे खरगोश वापस इसी थैले में आ जायेंगे।”

लड़का उन खरगोशों को जंगल में ले गया और उसने उनको तीन दिन और तीन रात के लिये वहाँ छोड़ दिया।

पर तीसरे दिन राजा की बेटी की चाची वहाँ वेश बदल कर आयी और उस लड़के से पूछा — “तुम यहाँ जंगल में क्या कर रहे हो बेटा?”

“मैं खरगोशों की रखवाली कर रहा हूँ माँ जी।”

“इनमें से एक खरगोश मुझे बेच दो।”

“मैं नहीं बेच सकता।”

“तुम एक खरगोश का कितना पैसा लोगे?”

“100 क्राउन[3]।”

चाची ने उसको 100 क्राउन दिये और उससे खरगोश ले कर चली गयी। लड़का जब तक वहीं इन्तजार करता रहा जब तक वह घर नहीं पहुँच गयी।

जैसे ही वह घर पहुँची तो उसने अपना बिगुल बजाया। वह खरगोश चाची के हाथ से फिसल कर जंगल की तरफ भागा और फिर उसके थैले में आ कर बैठ गया।

इसके बाद राजा की बेटी अपना वेश बदल कर जंगल गयी।

उसने उस लड़के से पूछा — “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

“मैं यहाँ तीन खरगोशों की रखवाली कर रहा हूँ।”

“एक मुझे बेचोगे?”

“मैं नहीं बेच सकता।”

“तुम एक खरगोश के कितने पैसे लोगे?”

“300 क्राउन।”

उसने उस लड़के को 300 क्राउन दिये और वहाँ से चल दी।

पर जैसे ही वह अपने घर के पास आयी उस नौजवान ने अपना बिगुल बजा दिया और वह खरगोश उस लड़की के हाथ से फिसल कर जंगल की तरफ भागा और उसके थैले में आ कर छिप गया।

अन्त में राजा खुद वेश बदल कर जंगल गया।

उसने उस लड़के से पूछा — “तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

“मैं यहाँ तीन खरगोशों की रखवाली कर रहा हूँ।”

“एक मुझे बेचोगे?”

“3000 क्राउन में।”

राजा ने उसको 3000 क्राउन दिये और खरगोश ले कर चल दिया।

पर इस बार भी ऐसा ही हुआ। जैसे ही राजा अपने महल के पास पहुँचा उस लड़के ने बिगुल बजा दिया और वह खरगोश तुरन्त ही उसके हाथ से फिसल कर जंगल की तरफ भाग लिया और उसके थैले में आ कर बैठ गया।

तीन दिन और तीन रात खत्म हो गये थे सो वह लड़का महल लौट आया और तीनों खरगोश उसने राजा को वापस कर दिये।

राजा उसे देख कर बोला — “मेरी बेटी से शादी करने से पहले एक आखिरी इम्तिहान और। यह थैला लो। तुमको यह थैला सच से भरना है।”

हालॉकि वह लड़का यह सुन कर बहुत नाउम्मीद हुआ कि राजा की बेटी से शादी करने की केवल एक ही शर्त नहीं थी बल्कि उसकी तो शर्तें ही खत्म नहीं हो रही थीं पर वह क्या करता।

वह लड़का बेचारा वह थैला ले कर फिर अपने घर वापस आ गया। उसका पड़ोसी अभी भी उसके घर के बाहर सीढ़ियों पर खड़ा था।

उसकी समस्या सुन कर वह बोला — “तुम अच्छी तरह जानते हो कि तुमने जंगल में क्या किया था। वही तुम राजा को बता दो तो तुम्हारा थैला सच से भर जायेगा।”

वह लड़का वापस राजा के पास गया। राजा ने थैला खोला और उस लड़के ने बोलना शुरू किया — “पहले आपकी बेटी की चाची आयी और उसने 100 क्राउन में एक खरगोश खरीदा पर वह उससे बच कर भाग गया और थैले में वापस आ गया।

फिर आपकी बेटी आयी और उसने 300 क्राउन में एक खरगोश खरीदा। वह भी उसके हाथ से निकल गया और वापस थैले में आ गया।

आखीर में आप आये सरकार और आपने एक खरगोश 3000 क्राउन में खरीदा। वह आपके भी हाथ से निकल कर भाग गया और मेरे थैले में वापस आ गया।”

जैसे ही वह यह कह कर चुका तो राजा ने देखा कि वह थैला तो पूरा फूला हुआ था।

आखिर राजा की समझ में आ गया कि अब उसके पास अपनी बेटी की शादी उस लड़के के साथ करने के अलावा और कोई चारा नहीं था।[4] सो उसने अपनी बेटी की शादी उस नौजवान से कर दी।

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[1] The King’s Daughter Who could Never Get Enough Figs (Story No 47) – a folktale from Italy from its Romagna area. Adapted from the book: “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[In this tale there were three boys to go to her as her suitors, the princess ate three basketful figs, the King gave him three hares, three people went to disturb him in the forest…]

[2] This is simple Bigul but in English it is called Bugle.

[3] Crown was the name of British Pound in olden days.

[4] My Note - This was very injustice with the boy that after putting only one condition for the marriage of his daughter, the King asked the boy to complete so many tasks before he married her to him.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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