मंगलवार, 24 अक्तूबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–4 : 4 एक बुढ़िया की खाल // सुषमा गुप्ता

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4 एक बुढ़िया की खाल[1]

यह कुछ पुरानी बात है कि एक देश में एक राजा राज करता था। उसके तीन बेटियाँ थीं।

एक बार वह एक मेले में जा रहा था तो जाने से पहले उसने अपनी तीनों बेटियों से पूछा कि वह मेले से उनके लिये क्या ले कर आये।

उसकी सबसे बड़ी बेटी बोली कि उसको एक रूमाल चाहिये। उसकी दूसरी बेटी बोली कि उसको बहुत बढ़िया जूता चाहिये। उसकी तीसरी और सबसे छोटी बेटी बोली कि उसको एक डिब्बा नमक चाहिये।

दोनों बड़ी बहिनें अपनी सबसे छोटी बहिन से बहुत जलती थीं सो उन्होंने अपने पिता से कहा — “पिता जी आपको पता है कि यह बेवकूफ लड़की आपसे नमक क्यों मॅंगवा रही है? क्योंकि यह आपका अचार डालना चाहती है।”

पिता बोला “अच्छा तो वह मेरा अचार बनाना चाहती है। क्या सचमुच में? ठीक है। अगर इसका ऐसा ही इरादा है तो मैं इसको बाहर निकाल दूँगा।”

और उसने उसको एक दासी के साथ एक सोने के सिक्कों का बटुआ दे कर बाहर निकाल दिया। सारे आदमी और नौजवान तो नौजवान लड़कियों को तंग करने वाले होते ही हैं सो उस बेचारी लड़की को यही पता नहीं था कि वह जाये कहाँ।

वे दोनों एक कब्रिस्तान से गुजर रहे थे कि दासी ने देखा कि एक 100 साल की बुढ़िया अभी-अभी मरी थी और लोग उसको वहाँ दफ़ना रहे थे। उसको देख कर दासी को एक विचार आया।

दासी कब्र खोदने वाले के पास गयी और उससे पूछा — “क्या तुम हमको इस बुढ़िया की खाल बेचोगे?”

कब्र खोदने वाला बोला “यह मैं कैसे कर सकता हूँ?”

काफी पीछे पड़ने के बाद वह उस बुढ़िया की खाल उनको बेचने पर राजी हो गया। उसने चाकू लिया, उस बुढ़िया की खाल निकाली और उसके चेहरे, सफेद बाल, उंगलियों और नाखूनों के साथ उसकी पूरी खाल उसने उन लोगों को बेच दी।

दासी ने उस खाल का चमड़ा बनाया उसको कपड़े की तरह से सिला और उसको उस लड़की को पहना दिया। उस खाल को पहन कर वह लड़की अब बिल्कुल बुढ़िया लगती थी पर . . .

अब लोग उस बुढ़िया को देखते नहीं थकते थे। क्यों? क्योंकि इतनी बुढ़िया होने के बावजूद उसकी आवाज घंटी की तरह साफ थी।

अब उनको किससे मिलना था – राजा के बेटे से। सो वे दोनों एक ऐसे राजा के महल में गयीं जिसके एक ही बेटा था। जब वे राजा के बेटे से मिली तो उसने दासी से पूछा — “यह तो बताओ कि वह बुढ़िया कितनी बूढ़ी है।”

दासी बोली — “यह आप उसी से पूछ लीजिये न।”

राजकुमार ने उस लड़की से पूछा — “दादी, क्या आप मेरी बात सुन सकती हैं? आपकी क्या उम्र होगी?”

लड़की ने हँस कर जवाब दिया — “मेरी उम्र 115 साल की है।”

“ओह मेरे भगवान। और आप आयीं कहाँ से हैं?”

“अपने शहर से।”

“आपके माता पिता कौन थे?”

“मैं अपनी माता पिता खुद ही हूँ।”

“और आप करती क्या हैं?”

“कुछ नहीं, बस आनन्द करती हूँ।”

राजकुमार को यह सब सुन कर बहुत मजा आया। उसने राजा और रानी से कहा — “पिता जी हम इस बुढ़िया को अपने महल ले चलते हैं। जब तक यह ज़िन्दा रहेगी तब तक यह हमारा दिल बहलाती रहेगी।”

दासी ने उस लड़की को महल में छोड़ दिया और वहाँ से चली गयी। वहाँ उन्होंने उस बुढ़िया को सबसे नीचे वाले छज्जे पर एक कमरा दे दिया और वह लड़की वहाँ रहने लगी।

अब जब भी वह राजकुमार खाली होता और अपना दिल बहलाना चाहता तो वह उस बुढ़िया के पास पहुँच जाता, उससे बातें करता और उसकी उलटी सीधी बातों पर हँसता।

उन्होंने उस लड़की को उसकी बूढ़ी आँखों की वजह से “सड़ी हुई आँखों वाली” नाम दे दिया।

एक दिन रानी ने उस “सड़ी हुई आँखों वाली” से कहा — “कितनी बुरी बात है कि तुम अपनी इन धुँधली आँखों से कुछ भी नहीं कर सकतीं।”

सड़ी आँखों वाली ने जवाब दिया — “पर मैं एक लड़की की तरह से धागा कात सकती हूँ।”

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इस पर रानी बोली — “तो लो यह थोड़ी सी अलसी[2] की रुई लो और इसको कात कर देखो – बस समय गुजारने के लिये और कुछ करने के लिये। कोई खास बात नहीं अगर न भी कर सको तो।”

जैसे ही रानी वहाँ से गयी और वह लड़की अपने कमरे में अकेली रह गयी तो उसने अपना दरवाजा बन्द किया और अपनी बुढ़िया वाली खाल उतार दी।

फिर उसने उस अलसी की रुई का इतना बढ़िया धागा काता जैसा कि कभी किसी ने देखा भी नहीं होगा।

उस धागे को देख कर राजा, रानी, राजकुमार और सारे दरबारी आश्चर्यचकित रह गये कि उस बुढ़िया ने जो हमेशा हिलती रहती थी और आधी अन्धी थी उस उम्र में भी उसने इतना बढ़िया धागा काता।

अब रानी ने उसको एक कपड़ा दिया और उससे कहा कि वह उसका एक ब्लाउज़ बनाये। अगर वह आसानी से बना सकती है तभी बनाये और नहीं बना पाये तो कोई बात नहीं। उसके लिये उसको चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं।

फिर वह जैसे ही अपने कमरे में अकेली हुई उसने कपड़ा काटा और उसका एक ब्लाउज़ सिल दिया।

फिर उसने उस पर आगे की तरफ बहुत ही सुन्दर और बारीक सुनहरे फूलों वाली कढ़ाई कर दी। लोगों को तो पता नहीं चला कि वह उसके बारे में क्या सोचें पर राजकुमार को कुछ शक हो गया।

अगली बार जब उस बुढ़िया ने दरवाजा बन्द किया तो राजकुमार ने सोचा कि वह उसका भेद पता लगा कर ही रहेगा।

सो जब उस बुढ़िया ने अपने कमरे का दरवाजा बन्द कर लिया तो राजकुमार ने उस कमरे के चाभी के छेद से उसके अन्दर झांका तो लो उसने क्या देखा कि उस बुढ़िया ने अपनी बुढ़िया वाली खाल उतारी और वहाँ तो बहुत सुन्दर सूरज की तरह चमकती हुई एक नौजवान लड़की खड़ी थी।

यह देख कर राजकुमार ने तुरन्त ही वह दरवाजा तोड़ दिया और अन्दर जा कर उस लड़की को गले लगा लिया। अचानक इस सबको देख कर वह लड़की चौंक गयी और कुछ झिझक भी गयी। उसने अपने आपको ढकने की बहुत कोशिश की पर सब बेकार।

राजकुमार ने पूछा — “तुम कौन हो और तुमने इस तरह से अपना वेश क्यों बदल रखा है?”

तब उस लड़की ने उसको अपनी कहानी सुनायी और कहा कि वह भी उसी की तरह एक राजा की बेटी है और उसके पिता ने उसको महल से बाहर निकाल दिया है।

राजकुमार तुरन्त ही अपने माता पिता के पास गया और बोला — “माँ, पिता जी, मैंने शादी के लिये एक राजा की बेटी ढूँढ ली है और अब मैं उससे शादी करने वाला हूँ।”

बस शादी की तैयारियाँ होने लगीं। आस पड़ोस के सारे राजा और रानियाँ शादी में बुलाये गये। इनमें लड़की के पिता को भी बुलाया गया पर वह अपनी बेटी को परदे के पीछे और ताज पहने देख कर पहचान नहीं सका।

लड़की ने अपने पिता के लिये खास तरीके से अलग खाना बनवाया। उसमें नमक नहीं था।

सूप लाया गया और सब लोगों ने पिया और उसकी बहुत तारीफ की पर उसके पिता ने वह सूप केवल एक चम्मच ही पिया और उसने अपनी चम्मच नीचे रख दी।

उसके बाद उबला हुआ माँस आया पर उस लड़की के पिता ने उसमें से बस ज़रा सा ही चखा। बाद में उससे वह खाया ही नहीं गया। उसके बाद मछली परसी गयी तो अब की बार उस लड़की के पिता ने उसे छुआ तक नहीं।

लोगों ने जब देखा कि लड़की का पिता तो कुछ खा ही नहीं रहा है तो उससे पूछा कि क्या उसको खाना अच्छा नहीं लगा। इस पर उसने कहा नहीं ऐसा नहीं है बस उसको कुछ भूख ही नहीं थी।

उसके बाद भुना हुआ माँस परसा गया तो उसको वह इतना अच्छा लगा कि उसने वह अपने हाथ से तीन बार लिया।

तब उसकी बेटी ने उससे पूछा कि उसने दूसरी चीज़ें क्यों नहीं छुईं और यह भुना हुआ माँस ही क्यों इतना पसन्द किया।

वह बोला — “मुझे पता नहीं पर यह भुना हुआ माँस तो सचमुच में बहुत स्वादिष्ट था और बाकी चीज़ें सब बहुत ही बेस्वाद थीं।”

लड़की बोली — “अब देखा आपने पिता जी कि बिना नमक के खाना कितना बेस्वाद होता है। पहले जो चीज़ें आपको परोसी गयीं थीं उनमें किसी भी चीज़ में नमक नहीं था इसी लिये वे सब आपको बेस्वाद लगीं। और इस भुने हुए माँस में नमक था इसी लिये आपको यह इतना स्वाद लगा कि आप इसको अपने हाथ से तीन बार ले कर खा गये।

इसी लिये जब आप मेले जा रहे थे तो मैंने आपसे नमक मंगवाया था। पर मेरी उन दोनों नीच बहिनों ने आपसे यह कह दिया कि मैंने वह नमक आपका अचार डालने के लिये मंगवाया था और आपने उनके कहने पर मुझको घर से बाहर निकाल दिया।

पिता जी ज़रा सोचिये क्या में आपका अचार डाल सकती थी और क्या नमक केवल अचार में ही इस्तेमाल होता है?”

यह सुन कर पिता ने अपनी छोटी बेटी को पहचान लिया। उसको उस जगह देख कर उसको बहुत खुशी हुई।

पिता ने फिर अपनी बेटी को गले से लगा कर उससे माफी माँगी और उन दोनों बड़ी बेटियों को उनके इस नीच काम की कड़ी सजा दी।

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[1] The Old Woman’s Hide (Story No 70) – a folktale from Italy from its Montale area.

Adapted from the book “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin, 1980.

[2] Translated for the word “Linseed or Flaxseed”. See its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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