गुरुवार, 26 अक्तूबर 2017

बाल कहानी // घिर गया बंटा // संजीव ठाकुर

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बंटा की शरारतें बढ़ती जा रही थीं। आज तो उसने सभी हदें पार कर दीं।

किसी को नाली में धकेल देना, किसी की साइकिल गिरा देना, किसी को बकरी पर चढ़ाकर दौड़ा देना और गिराकर सिर फोड़वा देना अब उसकी मामूली गलतियाँ लगने लगी हैं।

उस दिन हीरा के माथे पर भगवान लाकर ही उसने सिद्ध कर दिया था कि वह बदमाशों का सिरमौर होता जा रहा है। क्या बहाने से उसने हीरा को रेलवे लाइन पर बुलवाया था?.... ''भगवान देखना चाहते हो?” उसने हीरा से पूछा था। हीरा के खुशी-खुशी तैयार होने पर उसे अपने घर से एक मुट्ठी नमक लेकर रेलवे लाइन पर बुलाया था। हीरा के माथे के बीचों-बीच नमक लगाकर वह पत्थर से घिसता जा रहा था। हीरा का माथा धीरे-धीरे फूलता जा रहा था। जब उसके माथे पर एक बड़ा-सा गूमड़ निकल आया तब बंटा ने कहा था—''छूकर देखो, यही हैं भगवान!”

दर्द से कराहता हीरा अपने घर आया था और उसकी माँ ने जाकर बंटा की माँ से महाभारत किया था।

और उस दिन हनुमान की तरह पूँछ बनाकर, उसमें आग लगाकर पूरी गली में दौड़ते हुए जब उसने फेंकू की झोंपड़ी में आग लगा दी थी, महाभारत तब भी मचा था।

लेकिन आज जो उसने भोले-भाले पप्पू के साथ किया, उसे किसी से कहा भी नहीं जा सकता है। उसने पप्पू से पूछा—''क्या तुम उड़ना चाहते हो?”

यह सुनकर पप्पू रोमांचित हो गया। उसे चिड़िया और तितली का उड़ना बहुत अच्छा लगता था। कई बार सपने में वह इनकी तरह उड़ भी चुका था। उसने बंटा से उड़ना सिखा देने को कहा।

बंटा पप्पू को उसी रेलवे लाइन पर ले गया जहाँ कभी-कभार ही रेलगाड़ी आती थी, लोग भी कम ही आते थे। बंटा अपने साथ एक डंडा और रस्सी लेता गया था। उसने पप्पू के दोनों हाथ सीधे फैला दिए और डंडे से उन्हें बाँध दिया। उसने कहा—''थोड़ी ही देर में तुम उड़ने लगोगे। अब बस सामने देखो!”

इतना कहकर बंटा पप्पू के पीछे गया और उसकी पैंट खोल दी। फिर कहा—''अब उड़ो!”

पप्पू बंटा की शरारत समझ चुका था लेकिन हाथ बँधे होने के कारण वह अपनी पैंट उठा नहीं पा रहा था। पप्पू को उसी हाल में छोड़कर बंटा जाने लगा। पप्पू उसके पीछे-पीछे चलने लगा, हाथ खोलने को कहने लगा लेकिन बंटा को दया नहीं आई। वह वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

यह तो संयोग ही था कि डबलू उधर से आ रहा था। उसी ने पप्पू के हाथ की रस्सी खोली तब जाकर वह पैंट पहन पाया।

पप्पू और डबलू अपने मित्रों के पास गए। सबको बंटा की हरकत के बारे में बताया। सबने बंटा से लड़ने की ठानी। ढेर सारे पत्थर इकट्ठे किए और बंटा पर बरसाने लगे। लेकिन बंटा पत्थर चलाने में भी उस्ताद था। अकेले इन सब पर बीस पड़ने लगा। सभी बच्चे वहाँ से भागे और दूसरा उपाय सोचने लगे।

सबने विचार किया कि स्कूल से लौटते वक्त आम के बगीचे में चारों तरफ से बंटा को घेरा जाए और उसकी कुटम्मस की जाए।

अगले दिन सभी बच्चे अपनी-अपनी कमर में बेल्ट या बिजली के तार का कोड़ा बनाकर लपेटे हुए थे। बगीचे में उन्होंने बंटा को घेर भी लिया। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी उस पर हाथ उठाने की। आखिर सबसे कमजोर पप्पू ने ही दिलेरी दिखाई। बंटा मजबूत था। उसने पप्पू का कोड़ा पकड़कर उसे खींच लिया और घेरा तोड़कर भाग पड़ा। सभी बच्चे उसके पीछे दौड़े। बंटा भागता जा रहा था, भागता जा रहा था।

भागते-भागते वह एक कच्चे कुएँ में गिर पड़ा। खेतों के बीच बने इस कुएँ का उसे ध्यान ही नहीं रहा।

हालाँकि कुएँ का पानी उसके गले तक ही आया था लेकिन कुएँ की दीवारें कच्ची होने के कारण उसके निकलने का कोई उपाय नहीं था।

सभी बच्चे वहाँ पहुँच गए और बंटा को इस हालत में देखकर घबरा गए। बंटा कुएँ से निकलने के लिए छटपटा रहा था। किसी बच्चे को कुछ सूझ नहीं रहा था।

आखिर हीरा ही आगे आया। उसने सभी लड़कों से अपने-अपने कोड़े और बेल्ट निकालने को कहा। बेल्ट और कोड़ों को जोड़कर उसने रस्सी तैयार की। इस रस्सी का एक छोर उसने बंटा को पकड़ाया और कसकर पकड़े रहने को कहा। इधर दूसरे छोर को सभी लड़कों ने पकड़ लिया और खींचकर बंटा को निकालने लगे।

बंटा भारी था, वह बार-बार कुएँ में गिर जाता था। बच्चे बार-बार जोर लगाते थे। काफी देर की मेहनत के बाद बच्चों ने बंटा को निकाल ही लिया।

बंटा अब बहुत शर्मिंदा था। लड़के चाहते तो कुएँ में उसे छोड़कर भाग सकते थे। लेकिन उन्होंने उसे निकाला, इस बात का अच्छा असर उस पर हुआ था। वह सबसे माफी माँगने लगा। अब वह सबका दोस्त हो गया।

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