370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

लघुकथा - कंधों का बोझ // अविनाश कुमार तिवारी

image


पार्क की एक बेंच पर अपनी धर्मपत्नी के साथ बैठे शर्मा जी आज अपने कंधों को कुछ जादा भारी महसूस कर रहे थे। हालाँकि वो उम्र के उस पड़ाव पर थे जहाँ बहुत सी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाती है और कंधों का बोझ बहुत हद तक कम भी हो जाता है. लेकिन उनके कंधों पर इतना बोझ क्यों था??

दरअसल वो दम्पत्ति एक मुंबई में नशा मुक्ति केंद्र के पास के पार्क में बैठे हुए थे जहाँ उनका 28 वर्षीय पुत्र वरुण भर्ती था।

कुशाग्र बुद्धि और बहुमुखी प्रतिभा का धनी था वरुण। 7 पूर्व आईआईटी की परीक्षा पास करने के बाद मुम्बई आईआईटी में प्रवेश मिल गया था। बहुत ख़ुशी के साथ मुंबई विदा किया था शर्मा दंपत्ति ने बेटे को की 5-6 सालोx बाद उसे बड़ी मल्टी नेशनल कम्पनी में बड़े अफसर के रूप में पाकर गर्व करेंगे।

पहले वर्ष में ही आकर्षक व्यक्तित्व का धनी वरुण सबका चहेता बन गया। कॉलेज के तीसरे वर्ष में उसकी दोस्ती रेहान से हुई, कुछ दिनों बाद वो रेहान के मित्रों से भी दरअसल वो 10-12 लड़के लड़कियों का समूह था जो सुकून पाने के लिए नशे का सहारा लेते थे। ऐसा कोई नशा नहीं था जो वो लोग न करते हों। अपने समूह का नाम उन्होंने "घेट्टो" रखा था उनके अनुसार उनके इस नाम का अर्थ था "समाज से घृणा" ये लोग समाज से उकताया हुआ महसूस करते थे स्वयं को और अपनी ही दुनिया में रहकर मात्र नशे को अपना साथी मानते थे ।साथ ही साथ बाहर से आय नए लड़के लड़कियों को अपने समूह का हिस्सा बना लेते थे। कुछ दिनों में वरुण उनके समूह का हिस्सा बन ही गया।

वो भी इनके तमाम कृत्यों में बराबर का साझेदार बन गया। उसके घर जाने पर उसके माता-पिता ने उसके चेहरे को तेज को उतरा हुआ महसूस भी किया लेकिन बाहर रहने का असर होगा सोचकर बात को टाल भी दिया। इसी बीच वरुण की दोस्ती नायरा से हुई जो की उसी घेट्टो समूह का हिस्सा थी। बातें आगे बढ़ी और दोनों के बीच प्यार भी पनप गया। कॉलेज खत्म होने के बाद वरुण का चयन जल्द ही एक बड़ी आईटी कंपनी में हो गया. इसके बाद वो नायरा के साथ लिव इन रिलेसनशिप में रहने लगा।

इसी बीच उनका समूह नशे में मस्त था और उन्हें पुलिस का रेड का सामना करना पड़ा। हालाँकि वो जमानत पर छूट गए किन्तु बदनामी भी हुई और साथ ही साथ वरुण को अपनी जॉब से भी हाथ धोना पड़ा। भविष्य में पैसों के अभाव के कारण नशे के आदि हो चुके वरुण और नायरा अपनी जरुरतों को पूरा करने में असमर्थ थे। नशे की प्यास न बुझने के कारण नायरा ने समुद्र में डुबकी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद बात शर्मा दम्पत्ति तक पहुँचने में देर नहीं लगी। और 2 दिनों बाद सीधे मुंबई पहुँचे तब तक एक समाजसेवी संस्था का माध्यम से उनका बेटा वरुण एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती था। उसे देखने का बाद भारी कंधे के साथ शर्मा दंपत्ति बैठे हुए थे उस बेंच पर बेटे की स्वस्थता की कामना लिए।
शर्मा जी कह रहे थे -

" कितनो घरों को खाता है ये नशा, कितने भविष्यों को गर्त में डालता है, ये कैसा सुकून है जो जीवन तबाह कर जाता है "

जिम्मेदारियों के बोझ से छूटने के इस समय में आज उन्हें और जादा बढ़ा हुआ महसूस कर रहा हूँ,कितने बोझिल हो गये हैं कंधे मेरे।

अविनाश कुमार तिवारी

रायपुर (छत्तीसगढ़)

लघुकथा 4089335304010222427

एक टिप्पणी भेजें

  1. मेरी रचना को प्रकाशित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव