सोमवार, 23 अक्तूबर 2017

मथुरा में काव्य गोष्ठी आयोजित

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मथुरा. सौंख रोड स्थित महाराजा ग्रीन्स में डॉ0 धनंजय तिवारी के आवास पर तुलसी साहित्य अकादमी के तत्वाधान में सरस काव्य संगोष्ठी आयोजित की गयी। कार्यक्रम का प्रारम्भ ,कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.वृषभान गोस्वामी, मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’ विशिष्ट अतिथि डॉ0 विवेकनिधि तथा अकादमी के अध्यक्ष आचार्य नीरज शास्त्री ने माँ शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं पुष्पार्चन कर किया।

माँ सरस्वती की सस्वर वंदना आचार्य निर्मल जी ने इन स्वरों में की-

माँ हंस वाहिनी हो स्वरदा हो वीणा पाणि, कर दो कृपा की दृष्टि माँ, शारदे भवानी।।


मंगलम तिवारी एवं जाहनवी तिवारी के उपरान्त योगेश पंकज ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कविता पढ़ी -

‘जीवन की सुई चले निरन्तर । तिल-तिल घटता समय का अंतर।।

कवि प्रमोद लवानिया ‘बादल’ ने शेर यूँ पढ़े -

‘दुनिया के घेरे में फंसाने खोजता हूँ।

गुजरे हुए सही नजराने खोजता हूँ।।’

डॉ0 नीतू गोस्वामी ने श्रृंगार गीत प्रस्तुत करते हुए अपने भाव यूँ व्यक्त करते हुए वाह-वाही प्राप्त की -

‘प्रेम का गीत अमर मैं गाऊँ।

मेरे मन के मीत तुझे मैं एक पल भी भूल न पाऊँ।।’

आचार्य निर्मल ने मुक्तक प्रस्तुत करते हुए समां यूँ बांधा -

‘आपके आगमन से हो सबका भला।

आपके बल पे दी, यह लेखती चला।।’


डॉ0 धनंजय कुमार तिवारी ने अपनी रचना यूँ पढ़ी -

‘प्रकृति का कत्लखाना हमारा सुरक्षा तंत्र हो गया है।

अत्यधिक उपभोग ही अब जीवन का मंत्र हो गया है।।’

आचार्य नीरज शास्त्री ने करूण स्वरों में शेर यूँ पढ़े -

‘इस पेट में जलती है जो यह आग है रोटी।

चरित्र पर शैतानियत का दाग है रोटी।।’


डॉ0 विवेक निधि ने समसामयिक रचनाओं की प्रस्तुति इस प्रकार की -

नूतन सदी के चांद तू घूंघट से निकल।

दुनियादारी से ऊब तेरी आंखें हैं सजल।।

इस प्रकार उन्होंने नारी शक्ति का आहवान किया।

फर्रूखाबाद से पधारे अनुराग मिश्र ने रचना पढ़ते हुए सम्बोधित किया -

‘पत्थरों के शहर में रोशनदान कौन रखता है’

श्रीमती विनीता तिवारी ने अपने भावों को शब्दों में यूँ ढाला -

सबके अपने अपने, अपने अरमान हैं।

स्वार्थ ही अब इंसान की पहचान है।।


इस अवसर पर श्रीमती पूनम शास्त्री भी उपस्थित थी। मुख्य अतिथि डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’ ने कहा कि साहित्य की प्रत्येक विधा के लिए गोष्ठियों का आयोजन साहित्य का सम्मान है। उन्होंने दोहे पढ़े -

घर ना दीखे आपनों देवें जग उपदेश।

सुख की खातिर भटकते, फिरते हैं परदेश।।


कार्यक्रम के अध्यक्ष वृषभान गोस्वामी जी ने अध्यक्षीय भाषण में कहा, हम साहित्य से सदैव जुड़े रहे और साहित्य के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करें। कार्यक्रम तालियों की गड़गड़ाहट के मध्य सम्पन्न हुआ। संचालन अनुराग मिश्र ने किया। आभार डॉ0 धनंजय कुमार तिवारी ने किया।

प्रस्तुति- डॉ0 धनंजय तिवारी

महाराजा ग्रीन्स,सौंख रोड,मथुरा

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