गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

राजेश गोसाईं की काव्य रचनाएँ

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1...... दर्द और गम
दर्द और गम की गजल किसके नाम करूं
ये गुल से सजी गजल , किसके नाम करूं
मेरे लफ्जों में मेरे दर्द बहुत पुराने हैं
ये मेरी गजल के मदहोश तराने हैं
यह पैमाने में पड़ी  गजल किसके नाम करूं
लड़खड़ाने की ये गजल , किसके नाम करूं
मैंने किस हालात में प्यार तुझसे  किया था
जो किया था वो वफा का जलता दिया था
रौशन चिरागों की गजल किसके नाम करूं
ये लफ्जों की लड़ी गजल किसके नाम करूं
ये मेरे आखिरी नजराने ,प्यार के अफसाने
ये खुशरंग जमाने मैं तेरे नाम करूं
सजती रहे ये कलियां , तुझे गुलफाम करूं
ये मुरादों की गजल हर शाम मैं तेरे नाम करूं

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2......चलती हुई घड़ी
ना किसी को बता सका
ना किसी को सुना सका
मेरी जिन्दगी है क्या
मैं किसी को बता ना सका
रंज ओ गम की भीड़ ये
सपनों के टुकड़े
कयामत का दरिया
साहिल मैं किसी को बता ना सका
खूं में डूबा खंजर
रिश्तों के मकड़ जाले
मेहमां ये सांसें
अपना किसी को मैं बता ना सका
याद रखना मजबूरी
हबीब था मैं किसी का
मगरूर चांदी की दीवारों में चिना
करीब मैं किसी को बता ना सका
चलती हुई घड़ी ये
मौत की डगर
धड़कनों का मेला
मीत मैं किसी को बता ना सका

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3... आँधियों में

दर्द ने दर्द से पूछा कि तेरा दर्द कहाँ है
जिस सीने में छुपा था वो सीना कहाँ है
लाख कोशिश की थी मिल के आहों ने
बांट लेंगे गम जो मिले थे राहों में
बेवफा जख्मों की चुभन वो वफा कहाँ है
जलती हुई चिता में उम्र भर की गजल कहाँ है
सारी उम्र के नासूर अब तक भरे नहीं हैं
तेरे दिये नमक से अश्कों के गुल हरे नहीं हैं
जल जल के जो बनी थी वो गजल कहाँ है
आँखों से निकली जल की गजल कहाँ है
आग से खेले थे हम प्यार में बर्फ बन कर
जिस्म ओ जां पिघले थे इसमें ही जल कर
सिला खामोशियों का चला वो राख कहाँ है
आँधियों में उड़ी जो , वो गजल कहाँ है
आ लौट के वापिस तू बन के गजल बाकी
दिल ही दिल में - राजेश - खुशदिल कहाँ है
सीने में छुपी छुपी सी ...वो....
प्यार की गजल.... कहाँ है

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4......कातिल कौन
मिलती नहीं है माफी इन प्यार के गुनाहों में
कातिल कौन  है  इन झुकी झुकी निगाहों में
पलकों के खंजर ,  चुभ रहे हैं दिल के अन्दर
कत्ल कर रही है नजर झुकी झुकी निगाहों में
जुल्फों की बात क्या करें दुश्मन हैं ये हमारी
बन्द लबों  ने भी लूटा ,झुकी झुकी निगाहों में
शर्माई हुई अदा में ,  खिले खिले से गुल हम
कातिल , मैं हूँ या तुम झुकी झुकी निगाहों में
इक दिल के अंजुमन में ठहरी सी खामोशियां है
बेचैन कातिल " राजेश " झुकी झुकी निगाहों में

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5.....दर्द की बारिश
कभी आंसुओं में छुपा लो हमें भी
हम हैं तुम्हारे दर्द छुपा लो हमें भी
इन उदास आँखों में तस्वीर है मेरी
कभी हमदर्द निगाहें बना लो हमें भी
गम और खुशी की झील हैं ये आंसू
हम हैं बेचैन आहें डुबा लो हमें भी
अपनों के बीच अपने पराये ही होते
कभी उलझन के तार बना लो हमें भी
जीवन की दौड़ में " राजेश " है कहीं
दर्द की बारिश में बूंदें बना लो हमें भी
 
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6....शंख और सीपों पे
चलती है सांसों की लहरों पे ये जिन्दगी
कश्ती है ये दिल की ,डूब जायेगी कभी
सांसों के सफर में, उम्र का ही पड़ाव है
मौत ही तो आखिरी , मंजिल है जिन्दगी
प्यासा है ये समन्दर , किसी के प्यार का
आंसू भरी उदास , नमकीन है ये जिन्दगी
गले लगा के मुझे भी , रो ले आज कोई
तरसती निगाहें , ढूंढ रही है , ये जिन्दगी
उजड़ी हुई तमन्नायें ,बिखरी दिल के सागर में
शंख और सीपियों पे " राजेश ", गर्द है ये जिन्दगी

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7..... खामोश अंधेरे
अंधेरे बहुत छायें हैं जिन्दगी में मेरी
कतरा एक रोशनी का ढूंढने चला हूँ
खामोशियों का कोई गम नहीं है मुझे
खामोशियां खामोश क्यों हैं जानने चला हूँ
कोशिश है उठा लूं एक टुकड़ा कहीं से
दुश्मन है मुट्ठी की रोशनी मैं लाने चला हूँ
चुपके से अंधेरों ने हर आँख से पूछा
कहाँ से लाई रोशनी मैं खोजने चला हूँ ।
थकी थकी सी नजरें भी लड़ने लगी - 'राजेश'
कहाँ छुपा रखा है रोशनी को जलाने चला हूँ
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8....सलवटें
खामोश तालाब में डुबा दिल का पत्थर
मत मारो कोई इसमें ...लम्हों के कंकर
ठहरी हुई लहरों की , सलवटों में छुपा...
घुट घुट के मेरी है जिन्दगी का  सफर ....
सांसों के समन्दर हैं मेरे दिल के अन्दर
कश्ती में खुशी की भरे हैं गम के मंजर
परेशां हवाओं में उड़ती आहों का समा
साहिल नहीं कोई ना कोई है हमसफर
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9....कारवां
डूबे हुये हैं हम भी जिन्दगी के दरिया
इस जहां में देखो हर शख्स है परेशां
कुछ बह रहें हैं कुछ ने किया किनारा
कुछ खुशी के लम्हे , हैं गम भी गवाह
सांसों की लहरों पे दिल की है कश्ती
साहिल भी परेशां , है परेशान ये हवा
सहारा पतवार का है तो क्या एतबार
डुबा जो गया ,रह गया है तो बह गया
जिन्दगी -"राजेश"- की खुद है गजल
इक अकेला ही चलता हुआ -कारवां
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10..... आग
क्यूं छोड़ के तू मेरी दुनिया चली गई
तेरे साथ मेरी भी जिन्दगी चली गई
मोहब्बत की आग में हम दोनों जले थे
शिकवों के खंजर क्यों दिल पे चले थे
ये इश्क का वादा था आयेगी इक दिन
रूठ कर वफाओं से तु क्यों चली गई
अब लौट के आ , फिर हो ना खफा
मना ले जरा दिलों को
जख्म ए प्यार के बहाने
एक बार तु फिर से चली आ
तेरे संग मेरी भी चिता जहाँ जली थी
है इंतजार तेरा , तेरी रुह कहाँ जली थी
आत्मा मेरी भी तू  रुला के चली गई
उस जहां में तू ये जहां जला के चली गई
जिन्दगी के खामोश तालाब में डूबे हुये पत्थर
खून ए दरिया में मिल के तडपते ही रहे
अश्कों की दुनिया में डुबे थे दोनों ही
इश्क की दुनिया से तू क्यूं चली गई
नग्में हमदर्द बन के भर दे दिलों में जां
जान मेरी भी तेरे साथ ही चली गई
आ जा सांसों की गजल बन के आ
है दर्द की आवाज "राजेश" तू चली गई
दास्तां तू गम की सुना के चली गई
दर्द में अकेला तू छोड़ के चली गई

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11...शक्तिपुंज भारत
सारा भारत बोल रहा है
जय हिन्द जय हिन्द रस घोल रहा है
उठा कर देखो नजर विश्व वालों
कण कण में भगवान दिखेगा
आँख उठाओगे जिधर भी
जन जन में हिन्दुस्तान दिखेगा
ये हमारा मात पिता है
यही सबका बन्धु भ्राता है
विशाल आँचल में ममता जिसके
यही तो भाग्यविधाता है
खुशहाली में यह मुस्काता
जन जन का ये अन्न दाता है
सुन लो कान खोल के दुनियावालों
हर तरफ यही पैगाम मिलेगा
सागर से भी बड़ा हृदय जिसका
गागर में आसमान दिखेगा
नजर डालोगे जिधर भी
कण कण में हिन्दुस्तान दिखेगा
सुन लो सारे देश के प्यारों
जय हिन्द का रसपान करते हो
तृप्त हो जाती है आत्मा तुम्हारी
जब स्वराज का गुणगान करते हो
शक्तिपुंज है भारत का जन गन मन
सारे जग में कीर्तिमान दिखेगा
कह दो दुनियावालों से
धरती अम्बर में सिर्फ
भारत का नाम गूंजेगा
जो मिलने आयेगा प्यार से
जान से प्यारा मेहमान दिखेगा
नजर उठा के देखो जिधर भी
रग रग में हिन्दुस्तान दिखेगा
******
  12...     लोरी
सुन के लोरी तेरी माँ
      जब हम सो जाते थे
           तेरा हाथ सर पे होता था
               हम दुनिया से लड़ जाते थे
आज गीत देश के गाकर
         तेरे साथ साथ हम में
                 माँ भारती का भी
                         बल हो जाता है
परन्तु......
लड़ते हैं सारे जग से
           तेरी रक्षा खातिर
              मगर भाई भाई होकर भी
                 क्यूं आपस में लड़ जाते हैं
जर जोरू और जमीं के लिये
              तो खून सदा बहाते हैं
                   पर मातृ भूमि के लिये
                        हम खून कहाँ बचाते हैं
           
            
********
13...पंजाबी कविता
अज लोरी तु सुणा माँ
गोदी च तेरी आया हाँ
फुल गोलियां दे छाती च
ले के माँ तेरी लोरी
सुनन नु आया हाँ
सौं तेरे दूध दी
दुशमन इक वी नी
छडया ए माँ
फखर ए है के तेरी
गोद च सोण आया माँ
एस पवित्र मिट्टी च
मिल के मैं
तेरे दूध दा कर्ज
चुकान आया माँ
बनी रवे शान तेरी
आसमां च
उडदा रवे तिरंगा
मैं ते गोद च तेरी
थकान मिटान आया हाँ

********


14....चिड़ियां  ( पंजाबी )
चिड़ियां चुग-चुग चम्बे च आंदियां
फिर चंगे-चंगे परां नाल उड जांदियां
रखड़ी-टिके ते वीर घर आ के
बाबुल दी मेहमान बन जांदियां
छांवां माँ दिया बण के औ
महलां च जांदियां
महलां ते चम्बे दे मान लई
सब सुख-दुख गले नाल लगांदियां
चम्बे तो मार उडारी
बाबुल दे गले भर जांदियां
चिड़ियां महलां  दी
रौनकां बन के
चहक -चहक
खुशियां लांदियां
********
15.....हिन्दी
हिन्दी हिन्द की बिन्दी
भाल देश का सजाये
मिल कर सारी वर्ण माला
भारत की राज भाषा बनाये
ये राष्ट्र की शान बढ़ाये
हिन्दी अपनाओ
हिन्द का मान बढ़ाओ
मिल कर सारे हिन्दुस्तान में
माँ भारती का गौरव बनाओ
सारे विश्व में हिन्दी का
गुणगान करते जाओ
:
:
चमकती रहे भारत माँ की बिन्दी
सम्भाल के रखिये अपने देश की हिन्दी
:
सजती है हिन्द के भाल
ये बिन्दी
पूर्ण करती है वर्ण माल
ये हिन्दी
शान ए हिन्दुस्तान ये
गौरव जहान का
ज्ञान की दौलत
स्वाभिमान है हिन्दी


राजेश गोसाईं

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