रविवार, 8 अक्तूबर 2017

देश भक्ति बालगीत // खेलन प्रसाद कैवर्त ‘‘अभिनव’’


image


01. बाबा फिर से आओ न


चलना हमको, सिखाओ न
बाबा फिर से, आओ न

हम भी चलें, तेरे रास्ते
पढ़े-लिखें, देश के वास्ते
तेरे बिन, भटक गए हैं
अब राह हमें, दिखाओ न

चलना हमको, सिखाओ न
बाबा फिर से, आओ न

एक दूजे संग, नहीं चलते
मनमाने सब लोग करते
लूट रहे हैं, बाबा हमें
हक की लड़न, सिखाओ न

चलना हमको, सिखाओ न
बाबा फिर से, आओ न

शपथ लेते हैं, जन सेवा के
दावत वो, उड़ाते हैं जी
लौट आए, फिर से अंग्रेज
आजादी की राह दिखाओ न

चलना हमको, सिखाओ न
बाबा फिर से, आओ न



02. बच्चे हैं हम हिन्दुस्तान के

हम फूल खिले हैं प्यार के
  बच्चे हैं हम हिन्दुस्तान के ।

सर्व धर्म संविधान हमारा
मिट्टी है बलिदान हमारा
श्रमिक, कृषक और जवान हम
जन-सेवा पहचान हमारा
गीत हैं हम, श्रम महान के

हम फूल खिले हैं प्यार के
बच्चे हैं हम हिन्दुस्तान के ।

काहू से न बैर हमारा
दोस्ती है जहान सारा
आँख दिखाये मातृभूमि को
टूट पड़ते हैं सिंहनी-पुत्र
शोले हैं हम तूफान के

हम फूल खिले हैं प्यार के
  बच्चे हैं हम हिन्दुस्तान के ।



03. बन जाऊँ मैं चाँद

उड़ जाऊँ मैं आसमान
सुंदर हो मेरा काम
हाँ जी हाँ, देश के लिए
बन जाऊँ जी मैं चाँद।

दीन-हीन के साथ चलूँ
भरूँ फूलों की मुस्कान
खिल जाएँ मलिन चेहरे
सौरभ हो हिन्दुस्तान।

देश एक है, एक विधान
अपना यह संविधान
सर्व-धर्म हमारे प्राण
छू पाये न अभिमान।

सबसे अच्छा अवसर यह
देश हित में, आऊँ काम
अर्पित कर दूँ तन-मन-धन
हो देश के लिए यह प्राण।



04. सम्मान करो

सम्मान करो, सम्मान करो
सम्मान करो
जननी अपनी जन्म-भूमि का
जन्म-भूमि के, बलिदानी का
सम्मान करो

सम्मान करो, सम्मान करो
सम्मान करो
वीर सपूत, जाबाजों का
देश के, पहरेदारों का
सम्मान करो

सम्मान करो, सम्मान करो
सम्मान करो
देश भक्त, दीवानों का
अमर शहीद, जवानों का
सम्मान करो

सम्मान करो, सम्मान करो
सम्मान करो
भारत माँ के सुरबालों का
देश प्रेमी मतवालों का
सम्मान करो

सम्मान करो, सम्मान करो
सम्मान करो, हर नारी का
लोकतंत्र का, सम्मान करो
सम्मान करो, आजादी का
तिरंगे का सम्मान करो




05 देश मेरा प्राण

आसमान में खिला चाँद
होठों पे जी मुस्कान
न जी, न जी भूलूँ मैं
देश है मेरा प्राण।

सोचूँ मैं- देश के लिए
करूँ जी- बढ़िया काम
पढ़ूँ जी मैं- ज्ञान-विज्ञान
बनूँ-तिरंगे की शान।

बोलूँ मैं- मीठी-मीठी
हूँ जी- मैं इंसान
चलूँ जी मैं- साथ-साथ
रचूँ- गीता कुरान।

मेरा देश, मेरा प्राण
है मेरा स्वाभिमान
हाँ जी, हाँ जी- रखूँ याद
धरा में- हूँ मेहमान।




06. नमन् शहीदों को

आओ करें, नमन् शहीदों को
भारत माँ के वीर सपूतों को

पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस
उदित हुआ भारत भूमि में
स्वतंत्रता का सूरज ‘‘न्यारा’’
अंग्रेजों के दमन-चक्र से
मुक्त हुआ जी भारत प्यारा
अमर हुआ, सपूतों का बलिदान
कमल खिला, प्यारा हिन्दुस्तान

आओ करें, नमन् शहीदों को
भारत माँ के वीर सपूतों को

नई जागरण, नये आह्वान
ताजी हवा, खुला जहान
आजादी के अभिनव वरदान
बढे़ कदम हमारे जल-थल-नभ
तिरंगा हमें पहचान मिला
न क्रंदन, न कोई बंधन
स्वतंत्रता हमें उपहार मिला

आओ करें, नमन् शहीदों को
भारत माँ के वीर सपूतों को


07. मैं तिरंगा हूँ

जनगण की आशा
आमजन की परिभाषा
वतन की अभिलाषा
लहराता हिम शिखर में
मैं तिरंगा हूँ।

सपूतों की गाथा
भारत भाग्य-विधाता
वतन का चिर गौरव
लहराता विजय पथ में
मैं तिरंगा हूँ।

आच्छादित हरीतिमा
रंग भरती नव तुलिका
वतन का अभिनंदन
लहराता श्रम सीकर में
मैं तिरंगा हूँ।

चट्टानों में खिलता
माँ भारती का सपूत
वतन का रखवाला
लहराता हौसले में
मैं तिरंगा हूँ।

केसरिया रंग में
नितप्रति रंगते जाता
वतन का धड़कन
लहराता लहर तुंग में।



08 मेरा भारत है महान
मेरा भारत है महान
मिट्टी है पहचान
प्रकृति का मिला है वरदान
नित करूँ जी मैं गुणगान

मेरा भारत है महान
जहाँ रत्नों की खान
खिल-खिलाते फूल जहाँ
सुरभित होता है संसार ।

मेरा भारत है महान
जहाँ गुरू का प्रकाश
माँ की रक्षा के लिए जहाँ
सपूत लेते हैं अवतार ।

मेरा भारत है महान
जहाँ अन्न के भंडार
मजदूर, किसान, जवान जहाँ
माँ का करते हैं श्रृँगार ।


09 सुंदर बनेगा भारत अपना
मैं शपथ लेता हूँ आज
चलूँगा स्वच्छता की राह
सबको ले चलूँगा साथ-साथ
बढ़ाएँगे कदम साथ-साथ
एकता के हम गुलाब
खिलेंगे हम साथ-साथ

मैं शपथ लेता हूँ आज
जहाँ भी जाऊँ, जहाँ भी रहूँ
डालूँगा कूड़ा-करकट
सदैव नियत स्थान
पूरा करूंगा मैं गाँधी का सपना
सबसे सुंदर बनेगा भारत अपना

मैं शपथ लेता हूँ आज
प्रिय जन सहपाठियों के साथ
लिखेंगे हम नया इतिहास
स्वच्छता होगी हमारी पहचान
हम बनाएँगे अपना भारत
स्वच्छ सुंदर और महान ।



10 गणतंत्र दिवस हमारा
लिए हाथ में इकतारा
आसमान से नन्हीं तारा
गाएँ जी, नई तराना
है गणतंत्र दिवस हमारा

मिलजुल कर, रहना-बसना
जाति धर्म का न हो बंधना
एकता का गूँजे तराना
है गणतंत्र दिवस हमारा

छोटा बड़ा का न ताना
साथ-साथ आना जाना
स्नेह प्रेम का हो तराना
है गणतंत्र दिवस हमारा

काम करो ऐसा न्यारा
सबल हो गणतंत्र हमारा
भातृभाव का हो तराना
है गणतंत्र दिवस हमारा

जन-जन को हो यह नारा
झंडा ऊँचा हो हमारा
ज्ञान-विज्ञान का तराना
है गणतंत्र दिवस हमारा


11. देश का मैं लाल

जय हो, जय हो भारती
गाऊँ मैं नित आरती

देश मेरा है कर्म
देश मेरा है धर्म

देश के लिए जीता हूँ
देश मेरा है जीवन

न मैं छोटा, न मैं बड़ा
न मैं आम, न खास हूँ

भारत का मैं रहने वाला
भारतीय, मैं इंसान हूँ

देश मेरा अभिमान
देश मेरा है प्राण

देश का मैं लाल हूँ
देश मेरा है पहचान

न मैं हिन्दू, न मैं मुस्लिम
न मैं सिक्ख, न ईसाई हूँ

भारत का मैं रहने वाला
भारतीय, मैं सिपाही हूँ

--

   खेलन प्रसाद कैवर्त ‘‘अभिनव’’
                              बलगीत कार
                            व्याख्याता (अंग्रेजी)
                           शा.हा.स्कूल. बड़ेदेवगांव
                            जिला- रायगढ़ (छ.ग.)

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------