November 2017

रचनाकार.ऑर्ग : संघर्ष जारी है... // रवि रतलामी

अगर मैं ग़लत हूँ, तो मुझे टोकिए, और रोकिए - आज का अधिकांश लेखन कंप्यूटिंग उपकरणों पर हो रहा है, और हिंदी भाषी लेखन के लिए भी यह बात लागू है....

व्यंग्य // चाय-चर्चा // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

जब से भारत में, कभी अपने आरंभिक जीवन में, चाय बेचने/पिलाने वाला एक शख्स प्रधानमंत्री बन गया है, लोग इतने प्रसन्न हो गए हैं कि हर तरफ मोद ही ...

*"लेखन क्षमता" विकास हेतु साहित्यिक आयोजन*

     नारायणी साहित्य अकादमी एवं  फाफाडीह  स्थित विवेक कान्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में स्कूल के सभागार  में  दिनांक 29 ...

- व्यंग्य // ढाई आखर से आगे // कमलानाथ

15वीं शताब्दी में एक प्रसिद्ध संत कवि पैदा हुए थे जिनको आमलोग कबीर के नाम से जानते हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण साखियाँ और कालजयी दोहे लिखे। ...

मैं रात की गोद में सितारे नहीं, शरारे बखेरता हूं ! // डॉ.चन्द्रकुमार जैन

इश्क का नगमा जुनूं के साज़ पर गाते हैं हम अपने गम की आंच से पत्थर को पिघलाते हैं हम जिंदगी को हमसे बढ़कर कौन कर सकता है प्यार और अगर मरने पर ...

एकांकी // जिन्‍दा मौत // डॉ0 हरिश्‍चन्‍द्र शाक्‍य

एकांकी जिन्‍दा मौत पात्र परिचय अनिल : एक शहरी नवयुवक, उम्र लगभग 25 वर्ष। रेखा : एक शहरी नवयुवती, अनिल की प्रेमिका, सोमनाथ की पुत्री, उम्र लग...

राहुल प्रसाद की ग़ज़लें

1 उदासी का सबब न पूछो यारों बहाने बहुत हैं रहने की चिंता नहीं मुझे कहीं भी ठिकाने बहुत हैं उसके सुर में है एक अजीब सी झंकार लगता है उसके प...

आत्मसम्मान (लघुकथा) पंकज ‘प्रखर’

आत्मसम्मान (लघुकथा) पंकज ‘ प्रखर ’ कोटा ,राज. ‘तो क्या हो गया बेचारी विधवा है खुश हो जाएगी |’ ये शब्द जैसे ही सोनम के कानों में पड़े, सहसा उ...

" सामाजिक आन्दोलन के पर्याय:ज्योतिबाराव फूले " // वीरेन्द्र त्रिपाठी

ज्योतिबा फूले के पुण्यतिथि 28नवम्बर पर विशेष भारतीय समाज में व्याप्त जात-पात एवं सामंती शोषण- उत्पीड़न के खिलाफ तथा नारी शिक्षा, विधवा विवाह...

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–7 : 12 फाख्ता लड़की // सुषमा गुप्ता

12 फाख्ता लड़की [1] एक बार एक लड़का बेचारा अपनी ज़िन्दगी से बहुत परेशान था क्योंकि वह बहुत गरीब था। एक दिन जब वह बहुत ही ज़्यादा परेशान था यानी ...

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–7 : 11 तीन व्यापारियों के तीन बेटों की तीन कहानियाँ // सुषमा गुप्ता

11 तीन व्यापारियों के तीन बेटों की तीन कहानियाँ [1] एक बार तीन व्यापारी थे जिनके तीन बेटे थे। तीनों आपस में बड़े अच्छे दोस्त थे। एक दिन उन ती...

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–7 : 10 लँगड़ा शैतान // सुषमा गुप्ता

10 लँगड़ा शैतान [1] एक बार नरक में एक लँगड़ा शैतान रहता था। लोग मरते थे और सीधे नरक जाते थे और लँगड़े शैतान के सामने पहुँचते थे। वह उनसे पूछता ...