रविवार, 19 नवंबर 2017

ऐसे दें अपने सपनों को उड़ान // प्रदीप कुमार साह

भारत न केवल विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है अपितु वह युवाओं का देश भी है. भारत की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या युवा हैं और लगभग 60.5 क...

कवि मुक्तिबोध की जन्मशती // मनोज कुमार

साहित्य समाज में किसी कवि की जन्मशती मनाया जाना अपने आपमें महत्वपूर्ण है और जब बात मुक्तिबोध की हो तो वह और भी जरूरी हो जाता है। मनुष्य की अ...

शबनम शर्मा की कविताएँ

सोने की चिड़िया सोने की चिड़िया कहलाने वाला, ऋषियों का देश बतलाने वाला, यह भारत देश क्या से क्या हो गया, सोना मिट्टी बनता चला गया, और ऋषि...

शनिवार, 18 नवंबर 2017

हास्य-व्यंग्य // परमानेंट गवरमिंट ऑफ इंडिया // आशा रावत

मैं अपने प्रिय देश के एक सरकारी विभाग में चपरासी हूँ । मुझे अपने ओहदे पर बहुत गर्व है । बचपन में एक कविता पढ़ी थी जिसका अर्थ था कि हिमालय देश...

कहानी - राजपूतानी // मूल गुजराती लेखक - धूमकेतु // अनुवादक - डॉ. रानू मुखर्जी

अपने दोनों किनारों से छलकती रुपेण नदी बरसात के दिनों में भयंकर बन जाती है। जो भी इसके चपेट में आता है वह गोता खाता हुआ इसकी भंवर में पड़कर प...

देश में लोकतंत्र वास्तविक कैसे बनें ? // वीरेन्द्र त्रिपाठी

हमारे प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव का बिगुल बज गया है और तरह -तरह के प्रत्याशी अपने-अपने विकास योजनाओं के साथ मैदान में डट गये है। विकास क...

शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

संभावना की संगोष्ठी कहानी - नेचुरल ’रिंगटोन’ का पाठ

चित्तौडगढ। सम्भावना द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहानीकार कर्नल मुकुल जोशी ने अपनी कहानी नेचुरल ’रिंगटोन’ का पाठ किया। मंगलवार को विजन स्क...

मथुरा के साहित्यकार डॉ.दिनेश पाठक शशि को मिला -उ.प्र.हिन्दी संस्थान का "अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान"

गत चार दशक से हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं यथा-बाल कहानी,बाल उपन्यास, लघुकथा,व्यंग्य,समीक्षा और बड़ों के लिए कहानी, रेडियो नाटक, रेडियो ...

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

समीक्षा : 'गीत अपने ही सुने' का प्रेम-सौंदर्य - अवनीश सिंह चौहान

हिन्दी साहित्य की सामूहिक अवधारणा पर यदि विचार किया जाए तो आज भी प्रेम-सौंदर्य-मूलक साहित्य का पलड़ा भारी दिखाई देगा; यद्यपि यह अलग तथ्य है क...

कुंवर नारायण और कविता की ज़रुरत // डॉ. चन्द्रकुमार जैन

बहुत कुछ दे सकती है कविता क्यों कि बहुत कुछ हो सकती है कविता जिंदगी में अगर हम जगह दें उसे जैसे फलों को जगह देते हैं पेड़ जैसे तारों को जगह ...

उद्गार-६ (सन्त शतक) डॉ० 'कुसुमाकर' आचार्य

                                                    मंगलाचरण सर्वसमर्थ परमात्मा  तू ही है नाथ ,                 तू ही जगकर्ता और सब का आधार...

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