बुधवार, 29 नवंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–7 : 4 मटर और बीन्स का व्यापारी // सुषमा गुप्ता

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4 मटर और बीन्स का व्यापारी

[1]

यह बहुत दिन पुरानी बात है कि इटली के पलेरमो शहर[2] में डौन जिओवानी मिसिरान्ती[3] नाम का एक आदमी रहता था।

वह दोपहर को शाम के खाने के सपने देखता था और शाम को रात के खाने के सपने देखता था और रात को दोनों समय के खाने के सपने देखता था। यानी वह हर समय खाने के ही सपने देखता रहता था।

एक दिन जब भूख उसका पेट एंठ रही थी तो वह बाहर गया और बोला — “ओह मेरी भी क्या किस्मत है। तूने तो बस मुझे छोड़ ही रखा है।”

तभी चलते चलते उसको अपने सामने एक बीन का दाना पड़ा दिखायी दे गया। उसने उसको उठा लिया और सोचा कितनी सुन्दर बीन है। मैं इसको एक बरतन में बो दूँगा। फिर इसमें से बीन का एक पौधा निकल आयेगा और फिर उसमें बहुत सारी सुन्दर फलियाँ लगेंगी।

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उन फलियों को मैं सुखा लूँगा। उसमें से निकली बीन्स को मैं फिर एक बड़े से बरतन में बो दूँगा। उसमें फिर और बहुत सारी फलियाँ आ जायेंगी।

clip_image006तीन साल के अन्दर अन्दर मेरा एक बहुत बड़ा बीन्स का बागीचा[4] हो जायेगा। और चौथे साल में तो मैं एक भंडारघर भी किराये पर ले लूँगा और मैं बीन्स का एक बहुत बड़ा व्यापारी बन जाऊँगा।

इस बीच वह चलता चलता सेन्ट ऐन्थोनी गेट[5] से आगे निकल गया। अब वहाँ तो बहुत सारे भंडारघर थे। उनमें से एक भंडारघर के सामने एक स्त्री बैठी हुई थी।

उसने उस स्त्री से पूछा — “मैम, क्या ये भंडारघर किराये पर देने के लिये हैं?”

“जी हाँ जनाब। किसको चाहिये?”

“मेरे मालिक को चाहिये। इस बारे में वह किससे बात करें?”

“ऊपर एक स्त्री रहती है उससे।”

डौन पहले तो कुछ देर सोचता रहा फिर वह अपने एक दोस्त से मिलने चल दिया। उसने अपने दोस्त से कहा — “सेन्ट जौन की खातिर[6] मेरे दोस्त तुम मुझको ना मत करना। तुम मुझे अपने एक जोड़ी कपड़े 24 घंटे के लिये उधार दे दो।”

“ओह नहीं नहीं, बिल्कुल नहीं। तुम यकीनन मेरे कपड़े उधार ले सकते हो।” कह कर उसने डौन को अपने एक जोड़ी कपड़े एक दिन के लिये उधार दे दिये।

डौन ने अपने दोस्त के कपड़े पहने – यहाँ तक कि उसके दस्ताने और घड़ी भी। फिर वह एक नाई के पास अपनी हजामत बनवाने गया।

वहाँ से फिर वह सेन्ट ऐन्थोनी गेट के पास आ गया। वह बीन अभी भी उसकी जेब में थी और वह उसको बार बार हाथ डाल कर देख लेता था कि वह वहाँ है कि नहीं।

वह स्त्री अभी भी वहीं बैठी हुई थी। उसने उससे कहा — “क्या वह स्त्री तुम ही हो जिससे मेरे नौकर ने भंडारघर के बारे में बात की थी?”

“जी हाँ जनाब। आप क्या उस स्त्री को देखने के लिये आये हैं जो ये भंडारघर किराये पर देती है? आप मेरे साथ साथ आइये मैं आपको अपने मालिक की पत्नी के पास ले चलती हूँ।”

डौन का दिल बहुत धड़क रहा था पर वह उस स्त्री के पीछे पीछे चल दिया। वहाँ पहुँच कर उसने खुद को भंडारघरों के मालिक की पत्नी को अपना परिचय दिया।

एक भले से आदमी को देख कर वह स्त्री उससे बहुत प्रभावित हुई। वह आदमी जो बहुत अच्छी तरीके से कपड़े पहने था – टोप, दस्ताने, सोने की घड़ी और सोने की जंजीर भी। वह उसको बहुत ही भला आदमी लगा।

उस स्त्री ने उसका बहुत अच्छे से स्वागत किया और फिर वे भंडारघर के बारे में बात करने बैठे।

उनकी बातचीत के बीच में एक नौजवान लड़की उस कमरे में घुसी तो डौन तो उसको देखता ही रह गया। उसने मालिक की पत्नी से पूछा कि क्या वह लड़की उसकी कोई रिश्तेदार थी?

मालिक की पत्नी ने जवाब दिया — “यह मेरी बेटी है।”

“अकेली है?”

“हाँ अभी तक तो अकेली ही है।”

“यह सुन कर मुझे बहुत खुशी हुई। मैं भी अभी तक अकेला ही हूँ।

कुछ देर बाद डौन ने कहा — “भंडारघर के बारे में तो हम लोग तय कर ही चुके हैं अब हम इस बेटी के बारे में भी कुछ तय कर लें। वह लड़की क्या सोचती है?”

“देखेंगे।”

इतने में ही उस स्त्री का पति आ गया। डौन उठा और उसने उसको झुक कर नमस्ते की और बोला — “मैं एक जमींदार हूँ और मैं आपके 13 भंडारघर अपनी मटर और बीन्स और बाकी की उपज को रखने के लिये किराये पर लेना चाहूँगा। इसके अलावा मैं आपकी बेटी का हाथ भी माँगना चाहता हूँ।”

“आपका नाम क्या है?”

“मेरा नाम है डौन जिओवानी मिसिरान्ती है और मैं मटर और बीन्स का व्यापारी हूँ।”

“ठीक है डौन जिओवानी। मुझे सोचने के लिये 24 घंटे का समय दो फिर मैं तुम्हारी बात का जवाब दे पाऊँगा।”

“खुशी से।” कह कर डौन वहाँ से चला गया।

उस रात माँ अपनी बेटी को एक अलग जगह ले गयी और उसको डौन जिओवानी के बारे में बताया जो मटर और बीन्स दोनों का व्यापारी था। उसने अपनी बेटी से कहा कि वह उससे शादी करना चाहता है। वह लड़की तुरन्त तैयार हो गयी।

अगले दिन डौन जिओवानी फिर अपने दोस्त के घर गया और उससे उसकी एक दूसरी पोशाक उधार ली। पर पहला काम उसने यह किया कि वह बीन उसने उस पुरानी पोशाक में से निकाल कर अपनी नयी पोशाक में रखी।

सो दूसरी पोशाक पहन कर वह फिर से उन भंडारघरों के मालिक के घर गया। लड़की का जवाब हाँ में पा कर तो बस वह सातवें आसमान पर पहुँच गया था।

वह बोला — “तब मैं उससे जितनी जल्दी हो सकता है उतनी जल्दी शादी करना चाहूँगा। क्योंकि मेरे पास इतने काम हैं कि मेरे पास बहुत ज़्यादा समय नहीं है।”

लड़की के माता पिता ने जवाब दिया — “हाँ हाँ क्यों नहीं मिस्टर डौन जिओवानी। क्या आप इस समझौते के कागज पर एक हफ्ते में दस्तखत कर देंगे?”

उस सारे समय में डौन जिओवानी अपने दोस्त से रोज नये नये कपड़े उधार लेता रहा और रोज अलग अलग कपड़े पहन कर उनके घर जाता रहा ताकि उसके ससुराल वाले उसको एक अमीर आदमी समझते रहें।

फिर उन दोनों ने एक कौन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किये जिसके अनुसार 2000 सोने के क्राउन नकद, चादरें, और बिस्तर के दूसरे कपडों का दहेज तय हुआ।

इतना सारा पैसा हाथ में देख कर जिओवानी को लगा कि वह तो एक नया ही आदमी हो गया है। अब वह शादी की खरीदारी करने के लिये निकला।

उसने अपनी पत्नी के लिये कुछ भेंटें खरीदीं, अपने लिये कुछ कपड़े खरीदे और और भी कुछ खरीदारी की जो उसको अमीर दिखाने के लिये जरूरी थी।

कौन्ट्रैक्ट पर दस्तखत करने के एक हफ्ते के बाद उसने बहुत बढ़िया कपड़ों में शादी कर ली। पर बीन का वह दाना हमेशा उसकी जेब में ही रखा रहा।

नये शादीशुदा जोड़े ने दावतें कीं और डौन ने उनमें पैसा खूब दिल खोल कर खर्च किया जैसे कि वह कोई बहुत बड़ा आदमी हो। पर उसकी सास उसके इस तरीके से पैसा खरचने के ढंग से कुछ बेचैन हो उठी।

एक दिन उसने डौन से कहा — “तुम मेरी बेटी को अपने खेत दिखाने कब ले जा रहे हो डौन। अब तो फसल की कटाई का समय भी आ गया है।”

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डौन को पहले तो कुछ अटपटा लगा और वह कोई सफाई नहीं दे सका। फिर उसने अपनी अच्छी किस्मत से कहा कि “ओ मेरी अच्छी किस्मत तुमको एक बार फिर मेरी सहायता करनी है।”

उसके पास अपनी पत्नी और सास के लिये एक सीडान कुरसी[7] तैयार थी।

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सो उसने उनसे कहा — “चलिये, अब चलने का समय आ गया। हम लोग मसीना[8] की तरफ चलेंगे। मैं आगे आगे घोड़े पर चलूँगा और आप लोग मेरे पीछे पीछे आना।”

सो डौन जिओवानी अपने घोड़े पर सवार हो कर आगे आगे चला और उसकी सास और पत्नी सीडान कुरसी में बैठ कर उसके पीछे पीछे चलीं।

चलते चलते जब वह एक ऐसी जगह आया जहाँ उसको लगा कि वहाँ वह उनको अपने खेत दिखा सकता है वह वहाँ रुक गया।

उसने एक किसान को बुलाया उसको 12 क्राउन दिये और कहा कि यह तुम्हारे लिये हैं। जब तुम एक सीडान देखो जिसमें दो स्त्रियाँ बैठी हों और वे पूछें कि ये खेत किसके हैं तो उनसे कहना कि ये खेत डौन जिओवानी मिसिरान्ती के हैं जो मटर ओर बीन्स दोनों का व्यापारी है।

इतने में ही वह सीडान भी वहाँ आ गयी। उसमें बैठी स्त्रियों ने पूछा ये सुन्दर खेत किसके हैं। उस किसान ने जवाब दिया कि ये खेत डौन जिओवानी मिसिरान्ती के हैं जो मटर और बीन्स दोनों के व्यापारी हैं।

माँ और बेटी दोनों ही यह सुन कर बहुत खुश हुईं और आगे बढ़ीं। एक दूसरी जगह भी ऐसा ही हुआ। डौन जिओवानी इस तरह घोड़े पर आगे आगे चलता रहा और कुछ किसानों को 12–12 क्राउन देता रहा और उनके खेतों को अपने खेत बताता रहा।

यह सब उसकी उस लकी बीन की करामात थी जो उसकी जेब में रखी हुई थी। जब वे एक ऐसी जगह पहुँचे जहाँ से आगे कुछ और दिखाने को नहीं था तो उसने सोचा कि अब वह किसी सराय में पहुँच कर उन दोनों का इन्तजार करता है।

उसने चारों तरफ देखा तो उसको वहाँ पर एक बहुत बड़ा सा महल दिखायी दिया। उसकी खिड़की पर एक नौजवान लड़की हरे रंग की पोशाक पहने खड़ी थी।

उस लड़की ने इशारे से उसे अन्दर बुलाया। डौन जिओवानी चमकती हुई सीढ़ियों से ऊपर जाने में हिचकिचा रहा था कि कहीं ऐसा न हो कि उस महल की वे सीढ़ियाँ उसके पैरों से गन्दी हो जायें।

कि इतने में वह लड़की नीचे आयी और उसको महल का सब कुछ दिखाते हुए बोली “क्या तुमको यह महल पसन्द आया?”

डौन जिओवानी हँस कर बोला — “अरे यह तुम क्या कह रही हो। क्या मैं इसको नापसन्द करूँगा? अरे इस महल में तो मैं लाश बन कर भी रहना पसन्द करूँगा।”

वह लड़की फिर बोली — “तो जाओ और जा कर इस महल को इधर उधर देखो। तुम दूसरी मंजिल तक जाओ और वहाँ भी इस महल को देखो।”

फिर उसने उसको सारे कमरे दिखाये। वहाँ तो सारे में रत्न ही रत्न लगे हुए थे, बढ़िया परदे लगे हुए थे और वहाँ की सारी चीज़ें ऐसी थी जैसी कि डौन जिओवानी ने कभी सपने में भी नहीं देखीं थीं। वह तो अब तक केवल खाने के ही सपने देखता रहा था।

“तुमने यह सब देखा? यह सब तुम्हारा है इसको ठीक से रखना। यह कौन्ट्रैक्ट है और यह मेरी तरफ से एक छोटी सी भेंट है। मैं ही तो वह बीन हूँ जिसको तुमने जमीन से उठा कर अपनी जेब में रख लिया था। तुम इसमें रह कर आनन्द करो और मैं अब चलती हूँ।”

डौन जिओवानी उसके पैरों पर गिरने ही वाला था और उससे कहने ही वाला था कि इस सबके लिये वह उसका कितना आभारी था पर वह हरी पोशाक वाली लड़की तो उसके ऑखों के सामने सामने ही गायब हो गयी।

और वह और वह सुन्दर महल वहीं का वहीं खड़ा रह गया। और अब वह महल उसका था – डौन जिओवानी मिसिरान्ती का।

जब डौन की सास ने वह महल देखा तो बोली — “ओह मेरी बेटी, तुम्हारी किस्मत तो कितनी अच्छी है। ओह डौन जिओवानी, मेरे बेटे, मुझे नहीं मालूम था कि तुम्हारे पास इतना अच्छा महल है। और तुमने इसके बारे में कभी बताया भी तो नहीं।”

“आप ठीक कहती हैं माँ जी। मैं तो आपको आश्चर्यचकित कर देना चाहता था।” फिर वह उनको उस महल को दिखाने के लिये ले गया हालाँकि वह तो खुद भी उसको पहली बार ही देख रहा था।

उसने उनको चारों तरफ लगे रत्न दिखाये, एक तहखाना दिखाया जो सोने और चाँदी से भरा हुआ था। उसके बीच में एक फावड़ा रखा हुआ था। फिर उन्होंने उसकी घुड़साल देखी जिसमें बहुत सारी गाड़ियाँ भी रखी हुईं थीं और सबसे बाद में देखे उन्होंने अपने बहुत सारे नौकर चाकर।

उन्होंने उसके ससुर को लिखा कि वह अपना सब कुछ बेच दे और अब वहीं उसके पास आ कर ही रहे।

डौन जिओवानी मिसिरान्ती ने कुछ इनाम उस औरत को भी भेजा जिसने उसको अपने मालिक की पत्नी से मिलवाया था।

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[1] Dealer in Peas and Beans (Story No 154) – a folktale from Italy from its Palermo area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980.

[2] Palermo city is in Italy on its Sicily Island.

[3] Don Giovanni Misiranti – name of the trader

[4] Bean farm – see the picture of a bean farm above

[5] St Anthony Gate

[6] For the sake of St John

[7] Sedan chair is like palanquin which is carried by two or sometimes four people

[8] Messina – a locality on Scicily Island of Italy. See its map above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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