बुधवार, 29 नवंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–7 : 6 एक पत्नी जो हवा पर ज़िन्दा थी // सुषमा गुप्ता

6 एक पत्नी जो हवा पर ज़िन्दा थी[1]

मसीना[2] में एक राजकुमार रहता था जो जितना अमीर था उतना ही कंजूस भी था। वह दिन में केवल दो बार ही खाना खाता था।

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उसके उस खाने में डबल रोटी का एक टुकड़ा होता था, एक सलामी[3] होती थी जो इतनी पतली होती थी जैसे पापड़ और एक गिलास पानी होता था।

उसके पास केवल एक नौकर था जिसको वह केवल दो पैंस[4], एक अंडा और एक टुकड़ा डबल रोटी का रोज दिया करता था। इस तरह इतनी मजदूरी पर उसके पास कोई भी नौकर एक हफ्ते से ज़्यादा नहीं टिकता था। वे कुछ दिन काम करके ही उसके पास से भाग जाते थे।

एक बार उसने एक ऐसा नौकर रखा जो बहुत ही शैतान किस्म का आदमी था। वह आदमी इतना शैतान था कि उसका मालिक चाहे जितना भी चालाक क्यों न हो वह उसके पैर से उसके जूते मोजे भी चुरा सकता था। इसका नाम था मास्टर जोसेफ[5]।

सो राजकुमार ने जब इस आदमी को अपने यहाँ काम पर रखा और उस आदमी ने वहाँ आ कर देखा कि वहाँ क्या क्या हो रहा था तो वह एक कोयला बेचने वाली के पास गया।

इस कोयला बेचने वाली की दूकान महल के बराबर में ही थी। यह कोयला बेचने वाली एक अमीर औरत थी और इसके एक सुन्दर सी बेटी थी।

उसके पास जा कर उसने उससे पूछा — “मैम, क्या आप अपनी बेटी की शादी करना चाहेंगी?”

उस औरत ने जवाब दिया — “देखो भगवान ने चाहा तो वह कोई अच्छा सा लड़का उसके लिये भेजेगा, मास्टर जोसेफ। तभी मैं उसकी शादी करूँगी।”

मास्टर जोसेफ बोला — “राजकुमार के बारे में आपका क्या खयाल है?”

“क्या? राजकुमार? क्या तुम नहीं जानते कि वह कितना कंजूस है। वह तो इतना कंजूस है कि एक पैनी खर्च करने के लिये किसी की एक ऑख भी ले लेगा।”

मास्टर जोसेफ बोला — “मैम, मेरी सलाह मानिये और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि यह शादी हो जायेगी। आपको बस यही कहना है कि आपकी बेटी केवल हवा खा कर ही ज़िन्दा रहती है।”

कह कर मास्टर जोसेफ वहाँ से चला गया और राजकुमार के पास पहुँचा और उससे बोला — “सरकार आप शादी क्यों नहीं करते? आप बड़े हो रहे हैं और जो समय निकल जाता है वह वापस तो आता नहीं।”

राजकुमार बोला — “ओह, तुम क्या मेरी मौत चाहते हो? क्या तुम नहीं जानते कि एक पत्नी को रखने में कितना पैसा खर्च होता है? पत्नी रखने से पैसा हाथ से पानी की तरह से निकलता चला जाता है।

उसके लिये टोप खरीदो, सिल्क की पोशाकें खरीदो, शाल खरीदो, गाड़ियाँ रखो, उसको नाटक दिखाने ले जाओ आदि आदि। नहीं नहीं जोसेफ। यह सब कुछ नहीं। मैं यह सब नहीं कर सकता।”

“पर, योर मैजेस्टी, क्या आपने कोयला बेचने वाली की लड़की के बारे में सुना है? वह सुन्दर लड़की तो केवल हवा खा कर ही ज़िन्दा रहती है। इसके अलावा उसके पास अपना भी बहुत पैसा है और वह किसी भी तरह के आराम, पार्टियाँ और नाटकों की भी कोई परवाह नहीं करती।”

“ओह क्या तुम सच कह रहे हो? पर कोई भला केवल हवा पर ज़िन्दा कैसे रह सकता है मास्टर जोसेफ?”

मास्टर जोसेफ बोला — “सरकार, दिन में तीन बार वह अपना पंखा उठाती है और अपनी तरफ झलती है और उसी से उसकी भूख मिट जाती है। पर अगर आप उसके भरे हुए चेहरे की तरफ देखें तो आपको लगेगा कि वह वह तो बहुत सारा माँस खाती है।”

“तो तुम मेरे लिये उसको देखने का इन्तजाम करो।”

मास्टर जोसेफ ने तुरन्त ही हर तरह का इन्तजाम कर दिया और एक हफ्ते के अन्दर अन्दर दोनों की शादी हो गयी। इस तरह से एक कोयला बेचने वाली एक राजकुमारी बन गयी।

वह हर रोज खाने की मेज पर जाती, अपना पंखा झलती और वहाँ से बिना खाना खाये उठ आती। उधर राजकुमार उसकी तरफ खुशी से देखता कि राजकुमारी तो वाकई हवा पर ज़िन्दा थी।

पर ऐसा नहीं था। बाद में राजकुमारी की माँ छिप कर उसके लिये भुना मुर्गा और कटलेट ले कर आती और वह और उसके नौकर उनको चटखारे ले ले कर खाते।

इस तरह से एक महीना बीत गया। अब कोयला बेचने वाली ने शिकायत करना शुरू किया कि कब तक वह इतना भारी खर्चा उठाती रहेगी। “कब तक मैं इस तरह से अपनी बेटी को खिलाती रहूँगी। उस बेवकूफ राजकुमार को भी तो इसमें कुछ पैसा देना चाहिये।”

सो एक दिन मास्टर जोसेफ ने राजकुमारी से कहा — “सुनो मेरी प्यारी[6], अब तुम्हें करना यह है कि एक दिन तुम राजकुमार से यह कहो कि बस अपनी उत्सुकता को शान्त करने के लिये तुम उसकी सम्पत्ति देखना चाहती हो।

अगर वह यह कहे कि वह इस बात से डरता है कि उसके सोने के कुछ टुकड़े तुम्हारे जूतों में चिपक जायेंगे तो उसको कहना कि तुम उसके खजाने में नंगे पैर जाने के लिये तैयार हो।”

राजकुमारी ने राजकुमार से जब यह कहा तो उसने अपना चेहरा कुछ गुस्से वाला सा बना लिया। राजकुमारी ने उससे बहुत जिद की कि वह उसको अपना खजाना कम से कम दिखा तो दे पर वह उसको उसका खजाना दिखाने पर न मना सकी।

पर जब उसने उससे यह कहा कि वह उसका खजाना नंगे पैर देखने भी जा सकती थी तब कहीं जा कर वह उसको अपना खजाना दिखाने पर राजी हुआ।

अब मास्टर जोसेफ राजकुमारी से बोला — “जब तुम उसका खजाना देखने जाओ तो अपनी लम्बी स्कर्ट के सारे किनारे पर गोंद लगा लेना।” राजकुमारी ने ऐसा ही किया।

राजकुमार राजकुमारी को अपना खजाना दिखाने ले गया। उसने फर्श पर लगे हुए तख्तों में से एक तख्ता हटाया और एक चोर दरवाजा खोला। वहाँ से नीचे की तरफ सीढ़ियाँ जाती थीं। उसने राजकुमारी को उन सीढ़ियों से नीचे उतरने के लिये कहा।

नीचे जा कर तो राजकुमारी आश्चर्यचकित रह गयी जब उसने वहाँ सोने के डबलून्स[7] के ढेर के ढेर देखे। उस समय दुनियाँ का कोई भी राजा उसके राजकुमार पति से आधा अमीर भी नहीं था। उसके मुँह से तो आह और ऊह निकल गयी और इस आह ऊह में उसने अपने स्कर्ट को चारों तरफ हिला दिया।

इससे उसके स्कर्ट के घेरे में दर्जनों डबलून्स चिपक गये। जब वह वहाँ से लौटी तो उसने अपने स्कर्ट में से वे डबलून्स निकाल लिये। वह एक छोटा सा डबलून्स का ढेर था जो मास्टर जोसेफ उसकी माँ को दे आया।

इस तरह वे लोग वहाँ से वे सिक्के निकालते रहे जबकि राजकुमार राजकुमारी को मेज पर पंखा झलते देखता रहा और उस हवा से उसका पेट भरते देखता रहा। वह बहुत खुश था कि उसकी पत्नी हवा पर ज़िन्दा थी।

एक दिन जब राजकुमार राजकुमारी के साथ बाहर घूमने गया हुआ था तो रास्ते में उसे अपना एक भतीजा मिला जिसको उसने शायद ही कभी देखा हो।

उसने उस नौजवान से कहा — “पिप्पिनू, क्या तुम इस लड़की को जानते हो? यह राजकुमारी है।”

वह नौजवान बोला — “अरे चाचा जी, मुझे नहीं मालूम था कि आपने शादी कर ली है।”

“अरे तुमको पता नहीं था? चलो अब तो तुमको पता चल गया। अगले हफ्ते तुम हमारे साथ खाना खाने के लिये आना।”

जब राजकुमार ने उसको खाने के लिये बुला लिया तब उसने सोचा कि अरे उसने उस नौजवान को खाना खाने के लिये क्यों बुला लिया। अब इस बात को जानने का तो कोई तरीका नहीं था कि उसको खाना खिलाने में कितना खर्चा होगा। “मैंने उसको खाने पर क्यों बुलाया? मैं भी कितना बेवकूफ हूँ।”

पर अब तो कुछ हो नहीं सकता था। उसको उसके लिये खाने का इन्तजाम तो करना ही था।

राजकुमार को एक विचार आया। उसने राजकुमारी से कहा — “तुम्हें मालूम है राजकुमारी? माँस तो बहुत मँहगा है। और अगर हम उसे खरीदेंगे तो हम तो बहुत गरीब हो जायेंगे।

सो बजाय माँस खरीदने के मैं शिकार के लिये जाता हूँ और वहाँ से कुछ माँस ले कर आता हूँ। मैं अपनी बन्दूक ले जाता हूँ और 5–6 दिन बाद मैं बिना एक सैन्ट खर्च किये बहुत सारा शिकार ले कर आता हूँ।”

राजकुमारी बोली — “ठीक है राजकुमार। पर जल्दी आना।”

जैसे ही राजकुमार शिकार पर गया राजकुमारी ने मास्टर जोसेफ से एक ताला खोलने वाले को बुलाने के लिये कहा।

जब वह आ गया तो उसने ताला खोलने वाले से कहा कि वह उसको तभी तभी एक ऐसी चाभी बना कर दे जो उस चोर दरवाजे को खोल सके क्योंकि उसकी अपनी चाभी खो गयी थी और अब वह इस दरवाजे को खोल नहीं सकती थी।

तुरन्त ही उस ताला खोलने वाले ने एक चाभी बना दी जिससे उस चोर दरवाजे का ताला खुल गया। राजकुमारी नीचे गयी और डबलून्स के कुछ थैले ले कर वापस लौटी।

उस पैसे से उसने सब कमरों में चारों तरफ टैपेस्ट्री के परदे लगवाये। उन सब कमरों के लिये फर्नीचर, झाड़फानूस, शीशे, कालीन और वे सब चीज़ें खरीदीं जिनकी उन कमरों में जरूरत थी।

उसने एक चौकीदार भी लगाया जिसको उसने सिर से पैर तक सजा दिया। उसने उसको एक डंडा भी दिया जिसकी मूठ सोने की बनी थी।

राजकुमार जब शिकार से वापस आया तो अपने ही महल को पहचान नहीं सका।

उसने पूछा — “यह सब क्या है? और मेरा घर कहाँ है?”

उसने अपनी ऑखें मलीं और चारों तरफ देखा और फिर बोला — “कहाँ गया?” और यह कह कर वह चारों तरफ घूम घूम कर देखता रहा।

चौकीदार बोला — “सरकार, आप यहाँ क्या ढूँढ रहे हैं? आप अन्दर जाइये न। यह आप ही का घर है।”

राजकुमार बोला — “क्या यह मेरा ही घर है?”

“अगर यह आपका घर नहीं है तो फिर किसका घर है? अन्दर चलिये न सरकार।”

राजकुमार अपने सिर पर हाथ मारता हुआ बोला — “ओह मेरे भगवान। लगता है कि मेरा तो सारा पैसा इन चीज़ों को खरीदने में ही चला गया। उफ़ यह राजकुमारी।”

वह घर में घुसा तो उसको सफेद संगमरमर की सीढ़ियाँ दिखायी दीं दीवारों पर टैपेस्ट्री दिखायी दी तो वह फिर बोला — “ओह मेरा तो सारा पैसा गया। ओह।”

फिर उसने शीशे देखे, तस्वीरें देखीं, सोफा और दीवान देखे तो वह एक बार फिर दुखी हो गया। मेरा तो सारा पैसा गया। वह अपने सोने वाले कमरे में गया और जा कर पलंग पर लेट गया।

तभी उसकी पत्नी आयी और उसने उससे पूछा — “राजकुमार क्या बात है?”

“ओह मेरे भगवान। मेरा तो हर सैन्ट गया।”

उसकी पत्नी ने तुरन्त ही एक नोटरी[8] और चार गवाहों को बुलवा भेजा। नोटरी आया तो उसने राजकुमार से पूछा — “राजकुमार, क्या बात है? क्या आपको अपनी वसीयत लिखवानी है?”

“मेरा सारा पैसा . . . मेरी पत्नी . . .।”

“क्या? फिर से कहिये।”

“मेरा सारा पैसा . . . मेरी पत्नी . . .।”

“क्या आप अपना सारा पैसा अपनी पत्नी के नाम करना चाहते हो? हाँ मैं समझ सकता हूँ। क्या यह इस तरह से ठीक है?”

“मेरा सारा पैसा . . . मेरी पत्नी . . .।”

जैसे जैसे नोटरी यह लिख रहा था कि राजकुमार ने एक दो बार गहरी साँस ली और उसका दम निकल गया।

अब राजकुमारी राजकुमार की सम्पत्ति की अकेली वारिस थी। जब उसका दुख का समय बीत गया तो उसने मास्टर जोसेफ से शादी कर ली।

तो आखिर में उस कंजूस की सम्पत्ति किसको मिली? उस चाल खेलने वाले मास्टर जोसेफ को न।


[1] The Wife Who Lived on Wind (Story No 156) – a folktale from Italy from its Palermo area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980

[2] Messina is a portal city on Sicily Island of Italy in Europe.

[3] Salami is a type of cured sausage consisting of fermented and air-dried meat, typically beef or pork. Historically, salami was popular among Southern and Central European peasants because it can be stored at room temperature for up to 40 days once cut. See its picture above.

[4] Pence – the currency of Italy in those days

[5] Master Joseph

[6] In public he used to call her “Princess” but in private he used to call her “My Girl”.

[7] Doubloon means “double”. Special gold coins. Means 2-escudo or 32 real gold coins (of 6.77 gms each). Doubloons were minted in Spain, Mexico, Peru and New Granada. The term was first used to describe the golden excellents either because of its value of two ducats or because of the double portrait of Ferdinand and Isabella

[8] A notary public of the common law is a public officer constituted by law to serve the public in non-contentious matters usually concerned with estates, deeds, powers-of-attorney, and foreign and international business. A notary's main functions are to administer oaths and affirmations, take affidavits and statutory declarations, witnesses and authenticate the execution of certain classes of documents, take acknowledgements of deeds and other conveyances, protest notes and bills of exchange, provide notice of foreign drafts, prepare marine or ship's protests in cases of damage.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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