शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

मथुरा के साहित्यकार डॉ.दिनेश पाठक शशि को मिला -उ.प्र.हिन्दी संस्थान का "अमृत लाल नागर बाल कथा सम्मान"

_.___.______ _______ ____ __ _____ ______ ___ ______ __________ ______ ______ ___ __._____ ____ ___ _____ __ ________ ____ _______ __ _________ _______ __._____________ _____, ______ _____ __ ___ _____

गत चार दशक से हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं यथा-बाल कहानी,बाल उपन्यास, लघुकथा,व्यंग्य,समीक्षा और बड़ों के लिए कहानी, रेडियो नाटक, रेडियो झलकियां, हाइकु आदि में लिख रहे ,oa   "जुलाई-2017 में मथुरा जंक्शन रेलवे से सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए" मथुरा के साहित्यकार डॉ.दिनेश पाठक शशि को बाल दिवस के अवसर पर लखनऊ में उ.प्र.हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक शिशिर जी, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ.सदानन्द प्रसाद गुप्त व प्रख्यात साहित्यकार डॉ.सूर्यप्रसाद दीक्षित जी ने डॉ.दिनेश पाठक शशि को शाल उड़ाकर एवं सम्मान पत्र व इक्यावन हजार की राशि प्रदान कर सम्मानित किया।

डॉ.दिनेश पाठक शशि की हजारों रचनाएं देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित एवं आकाशवाणी के मथुरा, ग्वालियर, रोहतक , दिल्ली एवं राष्ट्रीय चैनल दिल्ली से प्रसारित हुई हैं।

उनकी मूल एवं संपादित दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है साथ ही उनकी एक बाल कथा "भूल" पर डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाई गई है।

आगरा विश्वविद्यालय से उनके साहित्य पर एक छात्रा द्वारा -"कथा साहित्य शिल्पी डॉ.दिनेश पाठक शशि  : व्यक्तित्व एवं कृतित्व" विषय में शोध करके डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।

उनकी की बाल कहानी कक्षा एक,चार व छह के हिन्दी पाठ्य पुस्तकों में समाहित की गई है।

भारत सरकार के"प्रेमचंद पुरस्कार" एवं "लाल बहादुर शास्त्री पुरस्कार" सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा उन्हें पुरस्कृत/सम्मानित किया जा चुका है।

उनकी अनेक रचनाओं का नौ भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है।

गत बीस वर्ष से वह अपने पिता श्री की स्मृति में गठित "पं.हरप्रसाद पाठक-स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार समिति मथुरा के सचिव के रुप में तथा "तुलसी साहित्य अकादमी मथुरा के संरक्षक के रूप में अनेक साहित्यकारों को पुरस्कृत कर चुके हैं।

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------