रविवार, 19 नवंबर 2017

ऐसे दें अपने सपनों को उड़ान // प्रदीप कुमार साह

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भारत न केवल विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है अपितु वह युवाओं का देश भी है. भारत की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या युवा हैं और लगभग 60.5 करोड़ लोग 25 वर्ष से कम आयुवर्ग के हैं. इस तरह भारत न केवल विश्व का एक बड़ा उपभोक्ता बाजार अपितु एक बड़ा विनिर्माण केंद्र की भूमिका भी बखूबी निभा सकता है, क्योंकि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा उत्पादक आयु समूह में है. यह भारत को सुनहरा अवसर प्रदान करता है. तभी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई ऊर्जा और युवा सपनों से परिपूर्ण भारत आज जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का सबसे युवा देश है.

परंतु वहाँ एक बड़ी चुनौती यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था को इसका लाभ तभी मिलेगा जब हमारी जनसंख्या विशेषकर युवा स्वस्थ, शिक्षित और कुशल होगी. 2014 में संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्ट में कहा गया कि अपनी बड़ी युवा आबादी के साथ विकासशील देश की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाई पर जा सकती है, बशर्ते युवा सशक्तिकरण का ध्यान रखा जाए. वास्तव में किसी भी देश में कौशल विकास कार्यक्रम के लिए मुख्य रूप से युवाओं पर ही जोर होता है. रोजगार के लिए उपयुक्त कौशल प्राप्ति के पश्चात युवा परिवर्तन के प्रतिनिधि हो सकते हैं. वे न केवल अपने जीवन को प्रभावित करने के काबिल होते हैं अपितु दूसरों के जीवन में भी बदलाव ला सकते हैं.

उपरोक्त तथ्य को ध्यान में रखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय युवा नीति-2014 के तहत वर्ष 2014 में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय का गठन किया जिसका काम नौकरी दिलाना नहीं अपितु लोगों को नौकरी लायक बनाना था. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर 15 जुलाई 2015 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) शुरू किया. यह युवाओं के कौशल प्रशिक्षण के लिए एक प्रमुख योजना है. इसके तहत मुख्यतः श्रम बाजार में प्रथम बार प्रवेश कर रहे लोगों और कक्षा 10 व 12 के दौरान स्कूल छोड़ गये छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया.

युवा सशक्तिकरण के लिए कौशल व उद्यम विकास वर्तमान सरकार की उच्च प्राथमिकता में शामिल है. फलत: उपरोक्त योजनांतर्गत युवाओं को विभिन्न उद्योग से संबंधित कौशल प्रशिक्षण पाने का अवसर मिला. उक्त योजना का क्रियान्वयन एनएसडीसी के प्रशिक्षण साझेदारों द्वारा की जाती है. वर्तमान में लगभग 2,300 केंद्रों के एनएसडीसी के 187 प्रशिक्षण साझेदार हैं. प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना के तहत निर्धारित सभी 419 नौकरी पाठ्यक्रमों की अवधि भी बहुत कम है. साथ में सीखने के पूर्व अनुभव को मान्यता है. अतः वैसे उम्मीदवार जो पहले से ही कुछ काम कर रहे हैं, वह भी प्रशिक्षण प्राप्त करने जा रहे हैं.

जुलाई 2017 के पहले हफ्ते तक के आंकड़ा के अनुसार उक्त योजना के तहत 30.67 लाख लोग को कौशल प्रशिक्षण दिया गया. उनमें से 2.9 लाख लोग को नौकरी के प्रस्ताव मिले. यानी योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वालों में 10 प्रतिशत से भी कम को नौकरी हासिल हुआ. केंद्र सरकार अब प्रशिक्षित लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाने पर ध्यान दे रही है. उक्त तथ्य के मद्देनजर यह समझ लेना कि उक्त योजना असफल हुई, कदाचित एक बड़ी भूल है. वास्तव में वर्तमान वैश्विक माहौल में उभरती अर्थव्यवस्था की मुख्य चुनौती से निपटने में वे देश आगे हैं जिन्होंने कौशल का उच्च स्तर प्राप्त कर लिया.

पुनः उक्त योजना का मुख्य उद्देश्य है कि हमारी सरकार युवा को रोजगार मात्र दिलाना नहीं चाहती अपितु वह युवाओं की योग्यता को उस स्तर तक ले जाना चाहती है कि वह अपने दम पर रोजगार पा सके, वह खुद का व्यवसाय भी कर सकते हैं. प्रशिक्षित युवाओं को इस बात का स्मरण होना चाहिए कि उपरोक्त योजना के तहत प्रदान की जानेवाली प्रशिक्षण में अन्य पहलु के साथ व्यवहार कुशलता और व्यवहार में परिवर्तन भी शामिल हैं. पुनः कौशल विकास के लक्ष्य निर्धारित करते समय हाल में ही लागू किये गये प्रमुख कार्यक्रम जैसे कि 'मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा अभियान और स्वच्छ भारत अभियान के मांग को भी ध्यान में रखा गया है.

आशय यह है कि जनसंख्या के सकारात्मक कारकों और उच्च गुणवत्ता वाले कार्यबल की सतत उपलब्धता की मदद से हमारा देश विश्व अर्थव्यवस्था में विशेष छाप छोड़ सकता है. बशर्ते युवाओं को उनके कौशल-प्रशिक्षण का भरपूर उपयोग करने की आवश्यकता है. भारत अपनी विशाल आबादी के साथ-साथ एक बड़ा उपभोक्ता है. उस स्थिति में स्वदेशी उत्पाद और सेवाओं के लिए स्वयं ही अनेक अवसर, एक विशाल बाजार या एक बड़ा मंच (प्लेटफार्म) मौजूद हैं. आवश्यकता यह है कि रोजगार के अवसर तलाश करने का तरीका बदला जाए. आज उन्हें एक आधुनिक मंच से जुड़ने की आवश्यकता है, जहाँ प्रत्यक्ष रूप में एक मंच पर सेवादार, सेवा-प्रदाता और उपभोक्ता मौजूद हो.

बिग फॉक्स उसी तरह का आधुनिक मंच (प्लेटफॉर्म) प्रदान करता है जिसका विस्तार शीघ्र ही संपूर्ण भारत में प्रत्येक गांव और प्रत्येक शहर तक होगी. यह एक स्वदेशी कंपनी है जो सर्वाधिक उन्नत तकनीक के साथ ऑन लाइन सेवा प्रदान करती है. यह एस.जी.बी.एस.लिमिटेड का बेहतरीन उपक्रम है. यह पूर्णरूपेण पारस्परिक लाभ, सहभागिता और संपूर्ण पारदर्शी प्रक्रिया के सिद्धांत पर कार्य करती है. यह अपने सेवादार को उनके स्थानीय स्तर पर ही रोजगार दिलाती है. इसका लक्ष्य पारदर्शी प्रक्रियान्तर्गत देश के सभी लोगों तक अपनी पहुँच और सामान्य उपभोग की सभी सुविधाएँ पहुंचाना है. निःसंदेह इस उपक्रम से अखिल भारतीय स्तर तक अपनी बेहतरीन सेवा पहुंचाने के उद्यम में और उसकी सफलता में देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर का सृजन होगा.

वह मंच एक तरफ तो उपभोक्ताओं को बिना भाग-दौड़ के वाजिब मूल्य पर अपने कुशल सेवादार (एम्प्लॉइज) से सेवा उपलब्ध करवाती है तो दूसरी तरफ बहुसंख्य कामगारों, कुशल कारीगरों और सेवादारों को सेवा (स्वरोजगार) का समुचित अवसर उपलब्ध कराता है और उसे उचित पारिश्रमिक अर्जित करने में मदद करती है. इस मंच से जुड़ने के बहुत सारे फायदे हैं. मान लीजिए कि आप एक पलम्बर हैं या बढ़ईगिरी करते हैं और मंच से जुड़े हैं. आपको संबंधित काम की तलाश है. तभी आपके संबंधित क्षेत्र से मंच से जुड़ा कोई उपभोक्ता अपने आवश्यकतानुसार पलम्बर या बढ़ई की तलाश करता है तो मंच के माध्यम से तत्काल उसकी सीधी (ऑन लाइन) बातचीत आपसे हो जाती है. ततपश्चात आपसी सहमति से आपको अपना काम प्राप्त हो जाता है. इस तरह बिग फॉक्स से जुड़कर आप अपने सपनों को नई उड़ान दे सकते हैं.

(समाप्त)

(1)http://www.narendramodi.in/hi/text-of-the-pm-s-address-at-the-foundation-stone-laying-ceremony-of-iiit-guwahati-399960

(2)http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=34970

(3)http://googleweblight.com/i?u=http://www.jansatta.com/national/30-67-lakh-got-skill-training-during-narendra-modi-flagship-project-pradhan-mantri-kaushal-vikas-yojana-only-2-9-lakh-got-job/436987/&grqid=BivQWmn6&hl=en-IN

1 blogger-facebook:

  1. महाराज कितनो को नौकरी मिली ?? हकीकत तो बिलकुल अलग है बेरोज़गारो की संख्या बढ़ी है जुमलों से बहार आकर सही स्थिति प्रस्तुत करे

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