मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

पुस्तक-समीक्षा - बातें बेमतलब : बदलते वक़्त का भैरंट रूप - मनोज कुमार झा

पुस्तक-समीक्षा बातें बेमतलब : बदलते वक़्त का भैरंट रूप - मनोज कुमार झा ‘बातें बेमतलब’ युवा व्यंग्यकार अनुज खरे का तीसरा व्यंग्य संग्रह है। ...

पंकज प्रखर की पाँच लघुकथाएँ

पंकज प्रखर कोटा राज . अकेलापन प्रमोद ने माइक्रोवेव में खाना गरम किया और और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर खाने लगा। जाने क्या बात थी कुछ महीनों से ...

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

वर्षांत की कविताएँ

सुशील शर्मा विदा वर्ष 2017   साल 2017 तुम उतर गए खूंटी से पर मुझे दे गए बहुत कुछ। बहुत प्यारी यादें। बहुत प्यारे अपने छोटों का स्ने...

स्त्री होने का अर्थ // सुशील शर्मा

मैं स्त्री के ऊपर कई साल से कविता लिखने की कोशिश कर रहा हूं मैं अक्सर पुरुष होने के नाते यह समझने की कोशिश में लगा हूँ कि एक महिला होने का क...

बौद्धिक प्रबलता // अखिलेश भारती

  (सकारात्मक विचार ) अगर आपसे कोई यह कहे, कि सादे कागज़ पर अपनी उपलब्धियाँ या नाक़ामियाँ लिखें, तो सवर्प्रथम आपकी नकारात्मक वैचारिक मन आपको अप...

रविवार, 10 दिसंबर 2017

श्रीहनुमान् कथा प्रसंग हनुमान्जी की नटखट लीला एवं गुरू सूर्य देव से वेदाध्ययन // डॉ.नरेन्द्रकुमार मेहता

श्रीराम श्रीहनुमान् कथा प्रसंग हनुमान्जी की नटखट लीला एवं गुरू सूर्य देव से वेदाध्ययन डॉ .नरेन्द्रकुमार मेहता 'मानस शिरोमणि एवं व...

वैदिक कालीन राष्ट्रध्वज // श्रीमती शारदा नरेन्द्र मेहता

वैदिक कालीन राष्ट्रध्वज श्रीमती शारदा नरेन्द्र मेहता (एम.ए. संस्कृत ) भारतीय वैदिक संस्कृति में राष्ट्रध्वज की परम्परा अनादिकाल से चली आ ...

व्यंग्य // बुढापे के मज़े // डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

वह अपनी कोच पर मसनद लगाए बैठे थे। पैर फैला लिए थे। मोज़े उतार दिए थे। पत्नी से रहा नहीं गया। बोली, इतना जाड़ा है पैर फैलाए बैठे हो, मोज़े भी उत...

नाटक // थैंक्यू स्लीमेन // राजेंद्र चंद्रकांत राय

नाटक थैंक्यू स्लीमेन राजेंद्र चंद्रकांत राय पात्र परिचय स्लीमेन : विलियम हेनरी स्लीमेन अंग्रेज अफसर, भारत से ठगों का उन्मूलन करने ...

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