देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 14 सात बच्चों को शाप // सुषमा गुप्ता

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14 सात बच्चों को शाप[1]

एक बार की बात है कि एक राजा और रानी थे जिनके छह बेटे थे। रानी के एक और बच्चा होने वाला था। राजा ने कहा कि अगर यह बच्चा लड़की नहीं हुई तो वह सातों बच्चों को शाप दे देगा।

इत्तफाक की बात कि उसी समय लड़ाई छिड़ गयी और राजा को लड़ाई के लिये जाना पड़ गया।

लड़ाई पर जाने से पहले राजा ने रानी से कहा — “देखो अगर तुम्हारे बेटा हो तो तुम खिड़की के ऊपर एक भाला लटका देना और अगर बेटी हो तो एक अटेरन[2] लटका देना।

इससे जैसे ही मैं लड़ाई से लौट कर आऊँगा तो मुझे पता चल जायेगा कि हमारे बेटा पैदा हुआ है या बेटी।”

यह कह कर राजा लड़ाई पर चला गया। राजा के जाने के एक महीने बाद रानी ने एक बहुत ही सुन्दर बेटी को जन्म दिया।

तुम सब सोच सकते हो कि उस बेटी को देख कर रानी कितनी खुश हुई होगी। वह अपनी खुशी छिपा नहीं सकी और उसने तुरन्त ही बाहर खिड़की पर एक अटेरन लटकाने का हुकुम दे दिया।

पर इस खुशी में कहीं एक गलती हो गयी कि उसके नौकरों ने बाहर अटेरन की जगह भाला लटका दिया।

कुछ समय बाद जब राजा घर लौटा तो उसने देखा कि खिड़की पर तो भाला लटका हुआ है तो उसने अपने सातों बेटों को शाप दे दिया।

पर जब वह महल के अन्दर घुसा तो उसके सारे नौकर उसको बधाई देने के लिये आये और उसको उसकी सुन्दर सी बेटी के जन्म के बारे में बताया। यह सुन कर तो राजा बहुत आश्चर्यचकित हुआ और बहुत दुखी हुआ कि यह उसने क्या कर दिया। पर अब वह क्या कर सकता था। जो होना था वह तो हो गया।

वह रानी के कमरे में गया और बच्ची को देखा तो वह तो उसको वैसी ही एक मोम की गुड़िया लगी जैसी डिब्बों में रखी रहती हैं। और उसके छहों बेटों का तो कहीं कुछ पता ही नहीं था।

यह सब देख कर वह तो रो पड़ा क्योंकि उसके वे बेटे तो दुनियाँ में इधर उधर घूम रहे थे।

इस बीच उसकी बेटी बड़ी होती गयी। उसने देखा कि उसके माता पिता उसको प्यार से उसके ऊपर हाथ तो फेरते थे पर उनकी ऑखों में हमेशा ऑसू भरे रहते थे।

एक दिन उसने अपनी माँ से पूछा — “माँ क्या बात है कि मैं आपको हर समय रोता हुआ ही देखती हूँ।”

तब रानी ने उसको सारी कहानी बतायी और बोली कि उसको डर है कि एक दिन वह भी उसकी ऑखों के सामने से गायब हो जायेगी।

जब लड़की यह सुना तो उसने क्या किया? एक रात वह चुपचाप उठी और अपने भाइयों को ढूँढने के लिये महल छोड़ कर चली गयी।

वह चलती गयी चलती गयी। चलते चलते उसे रास्ते में एक बूढ़ा मिला। उसने उस बच्ची से पूछा — “बेटी तुम ऐसी रात में कहाँ जा रही हो?”

वह बोली — “मैं अपने भाइयों को ढूँढने जा रही हूँ।”

वह बूढ़ा बोला — “बेटी उनको ढूँढना बहुत मुश्किल काम है क्योंकि उसके लिये तुमको सात साल सात महीने सात दिन सात घंटे और सात मिनट तक चुप रहना पड़ेगा।”

लड़की बोली “फिर भी मैं कोशिश करूँगी।”

उसने वहीं जमीन पर पड़ा हुआ एक कागज का टुकड़ा उठाया और कोयले के एक टुकड़े से उसके ऊपर उस समय का साल महीना दिन घंटा और मिनट लिखे और उस बूढ़े को वहीं छोड़ कर आगे अपने रास्ते पर चल दी।

बहुत देर तक चलने के बाद उसको एक रोशनी दिखायी दी। वह वहाँ पहुँची तो उसने देखा कि वहाँ तो एक महल खड़ा था जिसमें एक राजा रहता था।

वह उस महल के अन्दर चली गयी और थके होने की वजह से वहीं उसकी सीढ़ियों पर बैठ गयी और सो गयी। बाद में जब नौकर रोशनी बुझाने आये तो उन्होंने एक बहुत सुन्दर सी लड़की को पत्थरों की सीढ़ियों पर सोते पाया।

उन्होंने उसको जगाया और उससे पूछा कि वह वहाँ क्या कर रही थी। उसने उनसे इशारों से बात की और उसको वहाँ ठहरने की जगह देने की प्रार्थना की। उन्होंने उसकी इशारों की भाषा समझ ली और कहा कि वे राजा से उस बारे में बात करेंगे।

वे तुरन्त ही राजा से यह सब कहने गये और तुरन्त ही लौट भी आये। उन्होंने कहा कि राजा उसको उसके कमरे तक ले जाने से पहले उससे मिलना चाहता है।

जब राजा ने उस सुन्दर सुनहरे बालों वाली लड़की को देखा जिसका रंग दूध और शराब जैसा था दाँत मोती जैसे थे और उसके छोटे छोटे हाथ इतने कोमल थे कि कोई चित्रकार भी उतने सुन्दर हाथ नहीं बना सकता था तो उसको लगा कि वह तो किसी लौर्ड[3] की बेटी होनी चाहिये।

सो उसने उसको बहुत अच्छे से रखने का और उसकी हर तरह से अच्छी देखभाल करने का हुकुम दे दिया।

उसके बाद वे उसको एक बहुत ही सुन्दर और आरामदेह कमरे में ले गये। वहाँ एक दासी आयी और उसके कपड़े उतार कर उसको सोने के लिये लिटा गयी।

अगले दिन जब वह उठी तो उसने अपने पास एक फ्रेम देखा जिसमें कढ़ाई के लिये कपड़ा लगा हुआ था तो उसने उस कपड़े पर कढ़ाई करनी शुरू कर दी।

राजा उसको देखने के लिये आया और उससे पूछा कि क्या उसको कुछ चाहिये तो उसने उसको इशारों से बताया कि उसको कुछ नहीं चाहिये।

राजा को वह लड़की इतनी ज़्यादा पसन्द आयी कि वह उससे प्यार करने लगा। और एक साल बाद तो वह उससे शादी करने की भी सोचने लगा।

पर रानी माँ एक बहुत ही ईर्ष्यालु स्त्री थी। वह इस रिश्ते से खुश नहीं थी। उसका कहना था कि उस लड़की का तो यही पता नहीं था कि वह आयी कहाँ से है। इसके अलावा वह तो गूँगी भी है। इससे लोग सोचेंगे कि एक राजा ने ऐसी लड़की से शादी ही क्यों की।

पर राजा तो जिद्दी था सो उसने उससे शादी कर ली। जब रानी माँ ने देखा कि अब उसका कुछ बस नहीं चल रहा तो वह चुप हो कर बैठ गयी।

कुछ समय बाद ही रानी माँ को पता चला कि लड़ाई छिड़ने वाली है। तो उसने राजा को इस लड़ाई के बारे में बताते हुए कहा कि अगर वह लड़ाई पर नहीं गया तो उसके हाथ से उसका राज्य जा सकता था।

सो राजा को लड़ाई पर जाना ही पड़ा पर वह अपनी पत्नी को अकेला छोड़ कर जाते हुए बहुत दुखी था। इसलिये उसने रानी माँ से प्रार्थना की कि उसके पीछे वह उसकी पत्नी का खास खयाल रखें।

रानी माँ ने कहा — “तू चिन्ता मत कर बेटे। मैं उसको खुश रखने के लिये उसका पूरा पूरा ध्यान रखूँगी।” राजा ने अपनी माँ और पत्नी को गले लगाया और लड़ाई के लिये चला गया।

राजा लड़ाई पर गया ही था कि रानी माँ ने एक राज[4] को बुलवाया और उससे रसोईघर के सिंक के पास एक दीवार बनाने के लिये कहा जिससे वह एक बक्सा जैसा बन गया।

डायना[5] को बच्चे की आशा थी सो रानी माँ को यह बहाना मिल गया कि वह राजा को यह लिख दे कि उसकी पत्नी बच्चे को जन्म देते समय मर गयी।

उसने राजकुमारी को उस दीवार में रख दिया जो उसने रसोईघर के सिंक के चारों तरफ बनवायी थी। उसमें न तो रोशनी थी और न हवा थी तो उस नीच स्त्री ने सोचा कि वह वहाँ मर जायेगी। पर ऐसा नहीं हुआ।

बरतन धोने वाला उसी सिंक में रोज बरतन धोने आता था जहाँ डायना को दफ़नाया गया था। जब वह अपना काम कर रहा था तो उसने वहाँ कुछ कराहने की आवाज सुनी। उसने उसे ध्यान से सुनने की कोशिश की वह आवाज कहाँ से आ रही थी।

पहले तो उसको समझ में ही नहीं आया कि वह आवाज कहाँ से आ रही थी। फिर ध्यान से सुनने पर पता चला कि वह आवाज तो उस दीवार से आ रही थी जो अभी अभी नयी बनवायी गयी थी।

फिर उसने क्या किया? उसने दीवार में एक छेद किया तो देखा कि वहाँ तो राजकुमारी बन्द थी। उसने राजकुमारी से पूछा कि वह वहाँ कैसे आयी पर उसने केवल इशारों से उसे यह बताया कि वह एक बच्चे को जन्म देने वाली है।

उस गरीब काम करने वाले ने अपनी पत्नी से राजकुमारी के लिये एक सबसे ज़्यादा आरामदेह गद्दा बिछाने के लिये कहा और उसको उस पर लिटा दिया। वहाँ उसने एक बहुत ही सुन्दर लड़के को जन्म दिया।

इस बीच उस काम करने वाले की पत्नी उसको बार बार देखने के लिये आती रही। वह उसके लिये माँस का सूप[6] भी बना कर लाती रही और उसके बच्चे की भी देखभाल करती रही।

थोड़े में कहो तो वह काम करने वाला और उसकी पत्नी दोनों राजकुमारी को आराम देने के लिये जो कुछ भी कर सकते थे करते रहे। वह भी उनको इशारों से समझाती रही कि उसको क्या चाहिये।

एक दिन डायना को याद आया कि वह यह देखे कि अभी उसको कितने दिन और चुप रहना है। उसने अपना वह कागज निकाला और देखा तो बस अब तो उसके चुप रहने के केवल दो मिनट ही रह गये थे।

दो मिनट तो जल्दी ही बीत गये। जैसे ही उसके दो मिनट बीते तो उसने उस काम करने वाले को सब कुछ बता दिया। तभी राजा भी लड़ाई से लौट कर आ गया। काम करने वाले ने भी राजकुमारी को उस छेद में से बाहर निकाल लिया और उसे राजा के पास ले गया।

तुम सोच सकते हो कि राजा डायना को फिर से देख कर कितना खुश हुआ होगा जिसको कि वह यह सोच चुका था कि वह मर गयी है। वह तो उन दोनों को देख कर ही पागल सा हो गया था। उसने डायना और अपने बेटे दोनों को गले लगाया।

डायना ने उसको सब बताया कि क्यों तो उसने अपना घर छोड़ा। क्यों वह इतने दिनों तक बोली नहीं। और रानी माँ ने उसके साथ कैसा बरताव किया।

जब राजा ने यह सब सुना तो बोला “अब तुम सब मेरे ऊपर छोड़ दो। मै देखता हूँ।”

अगले दिन राजा ने अपने राज्य के सारे राजकुमारों और कुलीन लोगों को दावत के लिये बुलवाया।

उस दावत में नौकरों ने दूसरी प्लेटों के अलावा छह प्लेटें और लगायीं। जब सारे मेहमान बैठ गये तो छह सुन्दर नौजवान वहाँ आये और आ कर पूछा कि ऐसी बहिन को क्या दिया जाना चाहिये जिसने अपने भाइयों के लिये इतना सब कुछ किया हो।

यह सुन कर राजा अपनी सीट से उछल पड़ा और बोला — “और ऐसी माँ के साथ क्या किया जाये जिसने अपने बेटे की पत्नी के साथ ऐसा किया?” और फिर उसने अपनी माँ की सारी कहानी उनको सुना दी।

एक बोला — “उसको ज़िन्दा जला दो।”

दूसरा बोला — “उसको एक लकड़ी के बक्से में बन्द करके लोगों से अपमानित होने के लिये चौराहे पर छोड़ दो

तीसरा बोला — “उसको चौराहे पर गरम तेल में डाल कर भून दो।”

यह बात मान ली गयी।

उन छह नौजवानों ने राजा को बताया कि उनको उस बूढ़े ने ही बताया था कि उनकी बहिन कहाँ है और उसने उनके लिये क्या किया था। यह वही बूढ़ा था जो उनकी बहिन को रास्ते में मिला था। असल में वह बूढ़ा एक जादूगर था।

तब उन्होंने अपना परिचय दिया और डायना और अपने राजा बहनोई को गले लगाया। उसके बाद वे सब अपने माता पिता से मिलने गये।

सोचो ज़रा कि अपने उन सातों बच्चों को देख कर उन राजा और रानी को कितनी खुशी हुई होगी।

clip_image006clip_image007clip_image008डायना उसका पति और बेटा वहाँ कुछ दिन रहे फिर वे सब अपने राज्य को चले गये जहाँ उन्होंने खुशी खुशी बहुत दिनों तक राज किया।

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clip_image007[1]clip_image010


[1] The Curse of the Seven Children (Story No 11)– a folktale from Italy.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free on the Web Site :

https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[This tale is taken from the Web Site : http://www.surlalunefairytales.com/authors/crane/cursechildren.html]

[2] Translated for the word “Distaff” – see its picture above.

[3] Lord is a rank given to noble people in European countries.

[4] Translated for the word “Mason”. He builds the buildings.

[5] Diana was the name of the Princess.

[6] Translated for the word “Broth”. Broth is the soup consisting of meat or vegetable chunks, and often rice.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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