बुधवार, 20 दिसंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 2 सूरज, चाँद और तालिया // सुषमा गुप्ता

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2 सूरज, चाँद और तालिया[1]

एक बार की बात है कि इटली में एक लौर्ड रहा करता था जिसकी एक बेटी थी। उसका नाम उसने तालिया रखा। उसके जन्म पर उसने अपने देश के ज्योतिषियों को बुलवा भेजा ताकि वे उसका भविष्य बता सकें।

वे वहाँ आ कर इकठ्ठा हुए, उस बच्ची की जन्म कुंडली बनायी और वे सब आखिर इस नतीजे पर पहुँचे कि उसको अलसी के पौधे की फाँस[2] से बहुत खतरा है। इसलिये उसको अलसी या और दूसरी तरह की रुइयों से बचा कर रखना चाहिये ताकि वह उस खतरे में पड़ ही न सके।

समय निकलता गया और तालिया बड़ी होती गयी। वह अब एक सुन्दर जवान लड़की हो गयी थी। एक दिन वह अपनी खिड़की से बाहर झाँक रही थी कि उसने रास्ते पर जाती एक बुढ़िया देखी जो कुछ कातती जा रही थी।

clip_image004तालिया ने पहले कभी तकली[3] देखी नहीं थी सो जब वह बुढ़िया उस तकली को घुमाती थी तो उसको उसे घूमते हुए देखने में बहुत अच्छा लग रहा था। उसको आश्चर्य भी हुआ और उत्सुकता भी कि वह चीज़ क्या थी और वह क्या कर रही थी क्योंकि उसने पहले कभी तकली देखी नहीं थी।

उसने उस बुढ़िया को अपने पास बुलाया। वह बुढ़िया उसके पास आयी तो उसने उसके हाथ से वह तकली ले ली और उसने खुद ने रुई को उस तकली में लगा कर तकली को घुमाना शुरू कर दिया।

किस्मत की बात कि उस रुई का एक टुकड़ा तालिया के नाखून के नीचे लग गया और वह जमीन पर नीचे गिर गयी और मर गयी। बुढ़िया ने जब यह देखा तो वह बहुत डर गयी और सीढ़ियों से नीचे भागी और फिर भागती ही गयी।

जैसे ही तालिया के बदकिस्मत पिता ने यह सुना तो वह बहुत रोया बहुत रोया। उसने तालिया को बाहर के एक बहुत बड़े मकान में मखमल के एक सिंहासन पर बिठा दिया। उस सिंहासन पर ब्रोकेड[4] की बनी छतरी लगी हुई थी।

अपनी बदकिस्मती की इस याद के बारे में सब कुछ भूल जाने की इच्छा से उसने घर के दरवाजे बन्द कर दिये और वह घर भी हमेशा के लिये छोड़ दिया जिसमें उसके साथ यह दुख भरी घटना घटी थी।

कुछ समय बाद की बात है कि एक राजा शिकार के लिये उधर आ निकला जिस मकान में तालिया बैठी थी।

असल में उस राजकुमार के हाथ से एक फाख्ता उड़ गया था और उड़ कर वह उस मकान की एक खिड़की पर जा कर बैठ गया जिसमें तालिया बैठी थी। उसने उस फाख्ता को काफी बुलाने की कोशिश की पर वह उसके पास नहीं आया।

सो उसने यह सोच कर कि उस मकान में कोई लोग तो रहते होंगे अपने एक आदमी को उस मकान का दरवाजा खटखटाने और फाख्ता लाने के लिये भेजा।

उसने वहाँ जा कर काफी देर तक दरवाजा खटखटाया पर किसी ने दरवाजा ही नहीं खोला। तो राजा ने एक सीढ़ी मँगवायी ताकि वह खुद उस मकान में चढ .कर उसमें अन्दर पहुँच सके और देख सके कि उसके अन्दर क्या है जिसका दरवाजा ही कोई खोल नहीं रहा है।

सो वह सीढ़ी लगा कर उस मकान पर चढ़ा और उसके अन्दर घुसा। उसने उस मकान के सारे कमरे देखे सारे कोने देखे पर उसको वहाँ कोई दिखायी ही नहीं दिया। वहाँ किसी भी ज़िन्दा आदमी को न देख कर वह बहुत आश्चर्यचकित हुआ।

आखिर वह उस मकान के एक बड़े कमरे में आया जहाँ तालिया बैठी हुई थी। वह वहाँ बैठी हुई ऐसी लग रही थी जैसे किसी ने उस पर जादू डाल रखा हो।

राजा को लगा कि वह सो रही थी सो उसने उसको पुकारा भी पर वह तो बेहोश ही रही कुछ बोली नहीं। वह उसको देख कर ज़ोर से रो पड़ा और उसकी सुन्दरता को ही देखता रहा। उसके शरीर में उसका गरम खून बड़ी तेज़ी से बहता रहा।

उसने तालिया को अपनी बाँहों में उठा लिया और उसको वहाँ पड़े एक पलंग पर ले गया और वहाँ ले जा कर उसे लिटा दिया।

उसको उससे प्यार हो गया था। उसने उसको वहीं पलंग पर लिटा दिया और अपने राज्य लौट गया। वहाँ राज्य में उसको काफी काम लग गया तो वह इस घटना के बारे में सब कुछ भूल गया।

नौ महीने बाद तालिया ने दो खूबसूरत बच्चों को जन्म दिया – एक लड़का और एक लड़की। उसके दोनों ही बच्चे एक कीमती मणि की तरह थे। उनकी देख भाल दो परियाँ कर रही थीं जो उस मकान में उनका पालन पोषण करने के लिये ही आयी थीं।

बच्चों को भूख लगी थी सो उन्होंने अपना मुँह इधर उधर मारना शुरू कर दिया। अचानक उनके मुँह में उनकी माँ का अँगूठा आ गया। उसको उन्होंने इतना चूसा कि उसके अँगूठे में फँसी अलसी की रुई की फाँस निकल कर बाहर आ गयी।

जैसे ही अलसी की रुई की फाँस निकली तालिया जाग गयी जैसे वह किसी बहुत लम्बी नींद से जागी हो। अपने बराबर में दो सुन्दर बच्चों को देख कर उसने उनको अपनी छाती से लगा लिया और उनको अपना दूध पिलाया। वे बच्चे उसको अपनी जान से भी ज़्यादा प्यारे थे।

पर उतने बड़े मकान में अपने आपको अकेला पा कर वह सोचने लगी कि उसको हुआ क्या था। तभी उसने देखा कि वहाँ खाने की मेज लगी हुई है और उसके लिये खाना पीना भी वहाँ लाया रखा था हालाँकि उसको वहाँ कोई दिखायी नहीं दिया।

इस बीच राजा को तालिया की याद आयी तो वह यह कह कर कि वह शिकार के लिये जाना चाहता है उस बड़े मकान में वापस लौटा।

वहाँ उसने देखा कि तालिया तो जाग गयी थी और वहाँ दो बहुत सुन्दर बच्चे भी थे। उन सबको देख कर वह बहुत खुश हुआ और उसने तालिया को बताया कि वह कौन था और वह उसको कैसे मिला और उसके साथ क्या हुआ था।

जब तालिया ने यह सब सुना तो उन दोनों का प्रेम और गहरा हो गया। राजा वहाँ कुछ दिन रहा। उसके बाद उसने उससे विदा ली और फिर जल्दी ही वापस आने का और उसको अपने महल ले जाने का वायदा करके अपने घर चला गया।

वह अपने राज्य चला गया पर वहाँ उसको फिर से समय नहीं मिला पर उसके मुँह पर तालिया और सूरज और चन्दा जो उसके बच्चों के नाम थे के ही नाम थे। जब भी उसको ज़रा सा भी समय मिलता तो बस वह उन्हीं को याद करता रहता।

राजा की पत्नी को शक हुआ कि इस बार राजा के शिकार करते समय में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर थी। वह तालिया, सूरज और चन्दा का ही नाम लेता रहता था। यह सुन कर वह बहुत गुस्सा हो गयी।

उसने सेक्रेटरी को बुलाया और उससे कहा — “सुनो मेरे बेटे। तुम दो चट्टानों के बीच में खड़े हो। अगर तुम मुझे यह बताओगे कि तुम्हारे मालिक और मेरे पति किस दूसरी स्त्री से प्यार करते हैं तो मैं तुमको बहुत सारा खजाना दूँगी।

और अगर तुम मुझसे सच्चाई छिपाओगे तो देख लो तुम कहीं दिखायी नहीं दोगे – न तो ज़िन्दा न मुर्दा।”

यह सुन कर वह बेचारा सेक्रेटरी तो बहुत डर गया। लालच और डर ने उसको सारी इज्ज़त और न्याय की तरफ से अन्धा कर दिया। उसने पता लगा कर रानी को सब सच सच बता दिया।

रानी समझ गयी कि मामला क्या था सो उसने सेक्रेटरी को राजा के नाम से तालिया के पास भेजा कि वह बच्चों को राजा के पास भेज दे क्योंकि वह उनको देखना चाहता था। तालिया ने बड़ी खुशी से अपने दोनों बच्चों को राजा के पास भेज दिया।

रानी ने बड़ी बेरहमी से उन मासूम बच्चों को शाही रसोइये को मारने के लिये दे दिया। उसने उससे कहा कि वह उनके माँस से उसके नीच पति के लिये बहुत स्वाददार खाना बनाये।

पर रसोइया बहुत ही नरम दिल वाला आदमी था। जब उसने उन सुनहरी सेब जैसे प्यारे बच्चों को देखा तो उसको उनके ऊपर दया आ गयी। वह उनको अपने घर ले गया और उनको अपनी पत्नी को दे दिया और कहा कि वह उनको छिपा कर रखे।

उनकी जगह पर उसने दो बकरों की बहुत सारी स्वादिष्ट चीज़ें तैयार कर दीं। जब राजा आया तो रानी ने वह खाना बड़ी खुशी से राजा के लिये परसा।

राजा ने भी उस खाने को बड़ी खुशी से खाया। वह बोला — “यह खाना तो आज बहुत ही स्वादिष्ट है।” वह जितनी बार भी खाने की तारीफ करता रहा रानी हर बार यही कहती रही — “खाओ खाओ तुम तो अपना ही खाना खा रहे हो।”

दो तीन बार तो राजा ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया पर जब रानी ने यह कई बार कहा तो वह बोला — “मुझे मालूम है कि मैं अपना ही खाना खा रहा हूँ क्योंकि तुम तो इस घर में कुछ ले कर आयी नहीं हो।”

यह कह कर वह गुस्से में आ कर उठ गया और अकेले रहने के लिये और अपने गुस्से को शान्त करने के लिये अपने महल से कुछ दूरी पर बने एक मकान में चला गया।

इस बीच रानी अपने इस नीच काम से अभी सन्तुष्ट नहीं थी। उसने सेक्रेटरी को फिर बुलाया और उसको तालिया को वहाँ यह कह कर लाने के लिये कहा कि अब राजा उसको देखना चाहता है और उसका इन्तजार कर रहा है।

तालिया यह सुन कर बहुत खुश हुई। वह तुरन्त ही उस सेक्रेटरी के साथ चल दी। वह यह सोच कर ही उसके साथ जा रही थी कि वह तो अपने राजा का हुकुम मान रही थी।

उसकी खुद की भी राजा से मिलने की बहुत इच्छा हो रही थी पर उसको यह नहीं पता था कि उसके लिये आगे क्या इन्तजार कर रहा था।

महल जा कर वह रानी से मिली तो उसने देखा कि उसका चेहरा तो गुस्से के मारे जला जा रहा है। रानी ने तालिया का स्वागत किया — “आओ आओ। तुम तो बहुत ही अच्छी हो। ओ नीच, तो तुम मेरे पति के साथ आनन्द मना रही हो।

तुम तो कूड़ा हो कूड़ा जिसने मेरा सिर घुमा दिया है। अपने तौर तरीके बदल लो क्योंकि तुम इस समय परगेटोरी[5] में खड़ी हो जहाँ मैं तुमको तुमने मेरे साथ जो कुछ भी बुरा किया है उसका बदला दूँगी।”

यह सुन कर तालिया ने उससे माफी माँगी और कहा कि इस सब में उसकी कोई गलती नहीं है क्योंकि राजा यानी उसके पति ने उसके अपने राज्य पर अधिकार कर लिया था जब वह सो रही थी। इसमें उसका कोई दोष नहीं।

पर रानी उसकी कोई बात सुनने वाली नहीं थी। उसने ऑगन में एक बहुत बड़ी आग जलवायी और हुकुम दिया कि तालिया को उस आग में डाल दिया जाये।

तालिया ने देखा कि यह तो सारा मामला उलटा ही पड़ रहा है तो वह रानी के सामने झुक कर बैठ गयी और उससे प्रार्थना की कि वह उसको आग में फेंकने से पहले उसको अपने कपड़े उतारने की इजाज़त दे दे।

रानी ने उस दुखी स्त्री के ऊपर दया दिखाने के लिये नहीं बल्कि इसलिये कि इस तरह से वे कपड़े भी उसके हो जायेंगे उसको अपने कपड़े उतारने की इजाज़त दे दी। तालिया के कपड़े सोने के तारों और मोतियों से कढ़े हुए थे।

सो तालिया ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये। अपने हर कपड़े को उतारने के साथ ही वह ज़ोर से चिल्लाती। पहले उसने अपना ऊपर का गाउन निकाला, फिर स्कर्ट निकाली और फिर ब्लाउज़ निकाला।

अब जब वह अपना आखिरी कपड़ा उतार रही थी तो उसने एक बहुत ज़ोर की चीख मारी – अपनी पहली चीखों से भी बहुत तेज़ चीख। फिर लोग उसको जला कर राख करने के लिये आग की तरफ घसीट कर ले जाने लगे।

इतने में राजा वहाँ आ गया और यह द्दश्य देख कर उसने पूछा कि यह सब वहाँ क्या हो रहा था।

उसने अपने बच्चों के बारे में पूछा तो उसकी पत्नी ने उसकी नीचता बताते हुए उससे कहा कि उसने उन दोनों को मरवा दिया और उनका माँस उसी को खाने में परस दिया।

जब उस अभागे राजा ने यह सुना तो वह बहुत ही दुखी हो गया और बोला — “ओह मैं तो अपने बकरों के लिये भेड़िया बन गया। मेरी नसों में बहते खून ने अपने ही खून के फव्वारे को क्यों नहीं पहचाना? तूने यह नीच काम क्यों किया ओ डायन? जा चली जा यहाँ से।”

यह कहते हुए उसने नौकरों को हुकुम दिया कि वह रानी और सेक्रेटरी दोनों को ही उस आग में डाल दें जो रानी ने तालिया के लिये जलवायी थी।

वह रसोइये के साथ भी यही करने जा रहा था क्योंकि उसको विश्वास था कि उसी ने उसके बच्चों को मारा होगा कि वह उसके पैरों पर गिर पड़ा और बोला — “मालिक सचमुच में ऐसे लोगों के clip_image006लिये यह आग का ढेर ही ठीक है और उनको कोई सहायता भी नहीं मिलनी चाहिये सिवाय पीछे से भाले के।

और उनके लिये कोई और मनोरंजन भी नहीं होना चाहिये सिवाय आग में इधर उधर अलटे पलटे जाने के।

मुझे आपसे कुछ और नहीं चाहिये मालिक सिवाय अपनी राख के, रानी की राख के साथ। यह नीच रानी जो आपके उन बच्चों को मारना चाहती थी जो आपका ही शरीर थे। पर मेरे आपके बच्चों को बचाने का यह इनाम तो नहीं हो सकता है।”

यह सुन कर राजा आश्चर्य में पड़ गया। उसको लगा कि वह कहीं सपना तो नहीं देख रहा। उसको अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ।

वह बोला — “अगर यह सच है कि तुमने मेरे बच्चों को बचाया है तो तुम मेरा विश्वास करो तो मैं तुमको यहाँ की गन्दी जगह से निकाल कर किसी अच्छी सी जगह रखूँगा। और तुमको इतना इनाम दूँगा कि तुम अपने आपको दुनिया का बहुत खुशनसीब आदमी समझोगे।”

राजा जब यह सब कह रहा था तो रसोइये की पत्नी अपने पति की जरूरत समझ कर राजा के दोनों बच्चों सूरज और चन्दा को वहाँ ले आयी।

राजा तो फिर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खेलता थकता नहीं था। उसने रसोइये को बहुत इनाम दिया।

उसने उसको कुलीन घरों की देख भाल करने वाला बना दिया। उसने खुद ने तालिया से शादी कर ली और फिर वे दोनों बहुत दिनों तक खुशी खुशी रहे।

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[1] Sun Moon and Talia – a folktale from Italy, Europe. Taken from the book “Pentameron”, by Giambattista Basile. Translated by Richard F Burton. Privately printed in 1893. Day 5, Tale 5. In this book 10 women tell 5 stories each say for 10 days, hence in this book there are 50 stories.

Its English version may be read at http://www.pitt.edu/~dash/type0410.html

[2] Splinter of the flax plant. Flax plant is used in its seed form for its oil and fiber for making cloth (linen). See the picture of flax seeds above.

[3] Translated for the word “Spindle” – see its picture above.

[4] Brocade is an expensive cloth woven with golden and silvery threads.

[5] Purgatory – According to Catholic Church doctrine, Purgatory is an intermediate state after physical death in which those destined for Heaven undergo purification, so as to achieve the holiness necessary to enter the joy of Heaven.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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