देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 20 निराश मालकस // सुषमा गुप्ता

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

20 निराश मालकस[1]

यह मालकस एक ज्यू[2] था जिसने हमारे लौर्ड[3] को पीटा। यह ज्यू एक ऐसा बेरहम ज्यू था जिसकी बेरहमी को बताया नहीं जा सकता।

जब क्राइस्ट को पाइलेट के घर ले जाया जा रहा था तो इसी मालकस ने जीसस को अपने लोहे के दस्ताने पहने हाथों से एक ऐसा घूँसा मारा जिससे उनको सारे दाँत टूट गये थे।

इस बुरे काम के लिये लौर्ड ने उसको यह सजा दी थी कि वह सारे समय बिना आराम किये जमीन के नीचे के एक कमरे में खड़े खम्भे के चारों तरफ लगातार चलता ही रहे।

यह खम्भा एक गोल कमरे में खड़ा है और मालकस उसके चारों तरफ बिना आराम किये घूमे जा रहा है घूमे जा रहा है।

उनका कहना है कि वह इतना घूम चुका है कि उसके नीचे की जमीन कई गज नीचे तक टूट फूट गयी है और इसी वजह से वह खम्भा अब पहले से काफी ऊँचा दिखायी देता है क्योंकि जबसे लौर्ड को क्रास पर चढ़ाया गया है मालकस तभी से ऐसी ज़िन्दगी गुजार रहा है।

कहते हैं कि मालकस अब अपनी ऐसी ज़िन्दगी से इतना तंग आ चुका है और निराश हो चुका है कि जब वह उस खम्भे के चारों तरफ घूमता रहता हे तो वह उस खम्भे को पीटता रहता है उस पर सिर मारता रहता है गुस्से में भर जाता है और कराहता रहता है।

पर इतना सब होने के बावजूद वह मरता नहीं है क्योंकि लौर्ड ने उसको यही सजा दे रखी है कि उसको जजमैन्ट डे[4] तक ज़िन्दा रहना ही है।


[1] Desperate Malchus (Story No 57) – a folktale from Italy.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free on the Web Site :

https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

In the Bible, Malchus is the servant of the Jewish High Priest Caiaphas who participated in the arrest of Jesus. According to the Bible, one of the disciples, Simon Peter, being armed with a sword, cut off the servant's ear in an attempt to prevent the arrest of Jesus.

[2] Jew – a religion

[3] Here Lord means Jesus Christ

[4] In Christian belief, it is the final and eternal judgment by God of the people in every nation resulting in the glorification of some and the punishment of others.

------------

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 20 निराश मालकस // सुषमा गुप्ता"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.