बुधवार, 20 दिसंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 3 डौन फ़िरीयूलीडू // सुषमा गुप्ता

3 डौन फ़िरीयूलीडू[1]

एक बार की बात है कि एक किसान था। वह अपनी बेटी के साथ रहता था। उसकी बेटी उसके लिये रोज खेत पर खाना ले कर जाती थी।

एक दिन पिता ने अपनी बेटी से कहा — “कल मैं रास्ते में भूसा बिखेरता जाऊँगा ताकि तुझे मुझे ढूँढने में कोई परेशानी न हो। तू उस भूसे के पीछे पीछे आ जाना तो तू मुझे पा लेगी।” पिता यह कह कर चला गया।

clip_image002इत्तफाक की बात कि उस दिन एक बूढ़ा जादूगर[2] उधर से गुजरा और रास्ते में भूसा बिखरा देखा तो सोचा यह तो बड़ी अच्छी चीज़ है। उसने वह भूसा उठा लिया और उसको अपने घर की तरफ जाने वाले रास्ते पर बिखरा दिया।

जब किसान की बेटी अपने पिता के लिये खाना ले जाने लगी तो अपने पिता के कहे अनुसार वह रास्ते में पड़े भूसे के पीछे चलती गयी। इस तरह से वह अपने पिता के पास न पहुँच कर उस जादूगर के घर पहुँच गयी।

जब जादूगर ने उस लड़की को देखा तो उसने उससे कहा — “तुमको तो मेरी पत्नी होना चाहिये।” यह सुन कर लड़की ने रोना शुरू कर दिया।

उधर लड़की के पिता ने देखा कि उसकी बेटी तो उस दिन खाना ले कर नहीं आयी। जब वह शाम को घर पहुँचा तो वह उसको घर में भी नहीं मिली। जब वह उसको कहीं भी नहीं मिली तो उसने भगवान से प्रार्थना की कि वह उसको एक बेटा या बेटी दे दे।

एक साल बाद उसके एक बेटा हुआ जिसका नाम उन्होंने डौन फिरीयूलीडू रखा।

clip_image003 जब वह बेटा तीन दिन का हुआ तो उसने पूछा “क्या आपने मेरे लिये शाल[3] बनाया? आप मुझे एक शाल दे दें और एक कुत्ता दे दें क्योंकि मुझे अपनी बहिन को ढूँढना है।”

सो उसने शाल ओढ़ा और कुत्ता साथ लिया और अपनी बहिन को ढूँढने चल दिया। कुछ देर चलने के बाद वह एक मैदान में आ गया जहाँ बहुत सारे आदमी खड़े हुए अपने जानवर चरा रहे थे।

उसने उन चरवाहों से पूछा — “ये इतने सारे जानवर किसके हैं?”

चरवाहों ने जवाब दिया — “ये सब जानवर जादूगर के हैं जो न भगवान से डरता है और न किसी सेन्ट से। वह केवल डौन फिरीयूलीडू से डरता है जो केवल तीन दिन का है और रास्ते में है।”

यह सुन कर डौन ने अपने कुत्ते को रोटी दी और कहा — “खा मेरे कुत्ते रोटी खा। और भौंक मत क्योंकि हमको अभी बहुत अच्छे अच्छे काम करने हैं।”

यह सुन कर कि वह जादूगर डौन फिरीयूलीडू से डरता है डौन फिरीयूलीडू आगे चला तो उसको बहुत सारी भेड़ें मिलीं तो उसने वहाँ भी उनके चरवाहों से पूछा — “ये इतनी सारी भेड़ें किसकी हैं?”

भेड़ों के उन चरवाहों ने भी उसको वही जवाब दिया जो जानवरों के चरवाहों ने दिया था — “ये सब भेड़ें जादूगर की हैं जो न भगवान से डरता है और न किसी सेन्ट से। वह केवल डौन फिरीयूलीडू से डरता है जो तीन दिन का है और रास्ते में है।”

अब वह जादूगर के घर तक आ पहुँचा था। वहाँ आ कर उसने जादूगर के घर का दरवाजा खटखटाया तो उसकी बहिन ने दरवाजा खोला। उसने देखा कि दरवाजे पर एक बच्चा खड़ा है तो उसने उससे पूछा — “तुम्हें कौन चाहिये?”

बच्चा बोला — “मैं तुम्हें ढूँढ रहा हूँ बहिन। मैं तुम्हारा भाई हूँ और तुम्हें घर ले जाने के लिये आया हूँ। अब तुम माँ के पास अपने घर चलो।”

जब जादूगर ने सुना कि डौन फिरीयूलीडू वहाँ है तो वह ऊपर चला गया और डर के मारे वहाँ जा कर छिप गया।

डौन ने अपनी बहिन से पूछा — “जादूगर कहाँ है?”

“ऊपर है।”

डौन ने अपने कुत्ते से कहा — “तुम ऊपर जाओ और भौंको मैं अभी आता हूँ।”

मालिक का हुकुम पाते ही कुत्ता ऊपर चला गया और जा कर भौकने लगा। डौन फिरीयूलीडू उसके पीछे पीछे चला गया और जादूगर को मार दिया। वहाँ से उसने फिर उस जादूगर का सारा पैसा लिया और अपनी बहिन को ले कर घर वापस आ गया।

सब लोग खुशी खुशी रहने लगे।

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[1] Don Firriulieddu – a folktale from Italy.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free at the Web Site : https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[This story reminds us the story of “Six Swans” except that in this story a brother saves his sister. Read other such stories in “Chhah Hans Jaisee Kahaniyan”.]

[2] Translated for the word “Ogre”

[3] Translated for the word “Cloak” – see its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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