गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 6 सैक्सटन की नाक // सुषमा गुप्ता

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6 सैक्सटन की नाक[1]

एक बार एक सैक्सटन[2] चर्च में सफाई कर रहा था कि उसको फर्श पर पड़ा एक पैसे का टुकड़ा[3] मिला। उसने वह उठा कर रख लिया और सोचने लगा कि वह उससे क्या खरीदेगा।

अगर उसने उससे बादाम या और कोई गिरी खरीदी तो चूहे उसे खाने आ जायेंगे और वह चूहों से बहुत डरता था। सो सोचते सोचते उसने उससे कुछ भुनी हुई मूँगफली खरीदीं और खा लीं। आखीर में उसके पास एक मूँगफली बच गयी।

उसको वह पास की एक बेकरी[4] में ले गया और वहाँ उसकी मालकिन से कहा कि वह उसको अपने पास सँभाल कर रख ले वह उसको अगले दिन आ कर ले जायेगा। बेकरी की मालकिन ने कहा कि वह उस दाने को बैन्च पर रख दे और वह आ कर वहाँ से उसे उठा कर रख लेगी।

पर जब वह उसको लेने गयी तो उसने देखा कि वह दाना तो वहाँ नहीं है। उसको तो मुर्गा खा गया था।

अगले दिन वह सैक्सटन अपना मूँगफली का दाना माँगने आया तो बेकरी की मालकिन ने उसको बताया कि उस दाने का क्या हुआ था।

यह जान कर सैक्सटन ने कहा कि या तो उसका मूँगफली का दाना वापस किया जाये नहीं तो वह मुर्गा उसको दे दिया जाये जिसने उसका मूँगफली का दाना खाया था।

अब क्योंकि मूँगफली का दाना तो मुर्गे ने खा लिया था तो वह तो वापस आ नहीं सकता था सो सैक्सटन को मुर्गा दे दिया गया।

सैक्सटन के पास मुर्गा रखने की कोई जगह नहीं थी तो वह उसको रखने के लिये एक चक्की वाले की पत्नी के पास ले गया और उसको अगले दिन तक रखने के लिये कहा।

चक्की वाले की पत्नी ने उसे रख लिया। चक्की वाले की पत्नी के पास एक सूअर था। उसने सैक्सटन का वह मुर्गा खा लिया।

अगले दिन सैक्सटन जब अपना मुर्गा माँगने आया तो पता चला कि चक्की वाले की पत्नी के सूअर ने उसका मुर्गा खा लिया था।

सैक्सटन ने कहा या तो उसको उसका मुर्गा वापस किया जाये नहीं तो उसको वह सूअर दे दिया जाये जिसने उसका मुर्गा खाया था। अब क्योंकि मुर्गा तो वापस आ नहीं सकता था सो उसको सूअर दे दिया गया।

वह सूअर उसने अपने एक दोस्त के घर छोड़ा। उसका वह दोस्त पेस्ट्री बनाता था। उसके एक बेटी थी जिसकी शादी अगले दिन होने वाली थी।

उसके दोस्त की पत्नी बहुत ही नीच और एक चालाक किस्म की स्त्री थी। उसने अपनी बेटी की शादी के लिये उस सूअर को मार दिया और अगले दिन जब सैक्सटन अपना सूअर लेने आया तो उसको कह दिया कि तुम्हारा सूअर तो भाग गया। इस पर सैक्सटन ने कहा कि या तो वह उसका सूअर दे नहीं तो अपनी बेटी दे।

अब सूअर तो दिया नहीं जा सकता था क्योंकि वह तो मारा जा चुका था सो उसने उसको अपनी बेटी दे दी। सैक्सटन ने उसकी बेटी को एक थैले में रखा और चल दिया।

अब वह एक स्त्री के पास पहुँचा जो एक दूकान चलाती थी। उसने उसको वह थैला दिया और कहा कि उस थैले में भूसा था और वह उस थैले को सँभाल कर रख ले वह बाद में आ कर ले जायेगा। उस स्त्री ने उसके उस थैले को सँभाल कर रख लिया।

उस स्त्री के पास कुछ मुर्गियाँ थीं। जब सैक्सटन उस थैले को वहाँ छोड़ कर चला गया तो उसा स्त्री ने सोचा कि वह उस थैले में से थोड़ा सा भूसा निकाल कर अपनी मुर्गियों को खिला देती है।

पर जब उसने वह थैला खोला तो उसमें से तो भूसे की बजाय एक लड़की निकली। उस स्त्री ने उस लड़की को तो थैले में से बाहर निकाल लिया और उसकी जगह एक कुत्ता रख दिया।

अगले दिन सैक्सटन आ कर अपना थैला ले गया और समुद्र के किनारे चल दिया। वह सोच रहा था कि वह उस लड़की को समुद्र में फेंक देगा।

समुद्र के किनारे पहुँच कर उसने लड़की को फेंकने के लिये थैला खोला तो गुस्से में भरा कुत्ता बाहर निकला और उसकी नाक काट कर भाग गया। सैक्सटन दर्द के मारे चिल्ला पड़ा। उसकी नाक से खून बह कर उसके चेहरे पर टपकने लगा।

वह चिल्लाया — “ओ कुत्ते, मुझे अपना एक बाल तो देता जा ताकि मैं उसको अपनी नाक में लगा कर तेरे दिये हुए घाव को भर सकूँ।[5]

कुत्ता बोला — “अगर तुम्हें मेरा बाल चाहिये तो पहले मुझे डबल रोटी ला कर दो।”

सैक्सटन एक बेकरी की तरफ भागा और उसके मालिक से बोला — “मुझे थोड़ी सी डबल रोटी दे। यह डबल रोटी मैं कुत्ते को खिलाऊँगा। कुत्ता मुझे अपना एक बाल देगा जिसको मैं अपना घाव भरने के लिये अपनी नाक में रखूँगा।”

बेकरी का मालिक बोला — “तुमको डबल रोटी चाहिये तो पहले तुम मुझे लकड़ी ला कर दो तभी में तुमको डबल रोटी दे सकता हूँ।”

सो सैक्सटन एक लकड़ी काटने वाले के पास गया और उससे कहा — “ओ लकड़ी काटने वाले मुझे थोड़ी सी लकड़ी दे। मैं यह लकड़ी बेकरी के मालिक को दूँगा।

बेकरी का मालिक मुझे डबल रोटी देगा। डबल रोटी मैं कुत्ते को खिलाऊँगा। कुत्ता मुझे अपना एक बाल देगा जिसको मैं अपना घाव भरने के लिये अपनी नाक में रखूँगा।”

clip_image004लकड़ी काटने वाला बोला — “अगर तुम्हें लकड़ी चाहिये तो पहले मुझे एक कुल्हाड़ी ला कर दो।”

सैक्सटन तुरन्त ही एक लोहार के पास दौड़ा गया और उससे कहा — “लोहार लोहार, मुझे एक कुल्हाड़ी दे। मैं यह कुल्हाड़ी लकड़ी काटने वाले को दूँगा। लकड़ी काटने वाला मुझे लकड़ी देगा। वह लकड़ी मैं बेकरी के मालिक को दूँगा।

बेकरी का मालिक मुझे डबल रोटी देगा। डबल रोटी मैं कुत्ते को खिलाऊँगा। कुत्ता मुझे अपना एक बाल देगा जिसको मैं अपना घाव भरने के लिये अपनी नाक में रखूँगा।”

लोहार बोला — “अगर तुम्हें कुल्हाड़ी चाहिये तो पहले तुम मुझे कोयला ला कर दो।”

सैक्सटन तुरन्त ही भागा भागा कोयले वाले के पास गया और उससे कहा — “ओ कोयले वाले, मुझे कोयला दे। मैं यह कोयला लोहार को दूँगा। लोहार मुझे कुल्हाड़ी देगा। मैं यह कुल्हाड़ी लकड़ी काटने वाले को दूँगा। लकड़ी काटने वाला मुझे लकड़ी देगा। लकड़ी मैं बेकरी के मालिक को दूँगा।

बेकरी का मालिक मुझे डबल रोटी देगा। डबल रोटी मैं कुत्ते को खिलाऊँगा। कुत्ता मुझे अपना एक बाल देगा जिसको मैं अपना घाव भरने के लिये अपनी नाक में रखूँगा।”

clip_image006कोयले वाला बोला — “अगर तुमको कोयला चाहिये तो पहले तुम मुझे गाड़ी ला कर दो।”

सैक्सटन गाड़ी लाने दौड़ा गया। वह जा कर गाड़ी वाले से बोला — “ओ गाड़ी वाले मुझे गाड़ी दे।

यह गाड़ी मैं कोयले वाले को दूँगा। कोयले वाला मुझे कोयला देगा। मैं वह कोयला लोहार को दूँगा। लोहार मुझे कुल्हाड़ी देगा।

कुल्हाड़ी मैं लकड़ी काटने वाले को दूँगा। लकड़ी काटने वाला मुझे लकड़ी देगा। लकड़ी मैं बेकरी के मालिक को दूँगा।

बेकरी का मालिक मुझे डबल रोटी देगा। डबल रोटी मैं कुत्ते को खिलाऊँगा। कुत्ता मुझे अपना एक बाल देगा जिसको मैं अपना घाव भरने के लिये अपनी नाक में रखूँगा।”

गाड़ी वाले ने देखा कि सैक्सटन बहुत कष्ट में है। उसको उसके ऊपर दया आ गयी सो उसने उसको गाड़ी दे दी। गाड़ी पा कर सैक्सटन बहुत खुश हुआ।

गाड़ी ले कर वह भागा भागा कोयले वाले के पास गया। उसने वह गाड़ी कोयले वाले को दी। कोयले वाले ने उसको कोयला दिया। कोयला उसने लोहार को दिया।

लोहार ने उसे कुल्हाड़ी दी। कुल्हाड़ी ले जा कर उसने लकड़ी काटने वाले को दी। लकड़ी काटने वाले ने उसको लकड़ी दी। लकड़ी ले जा कर उसने बेकरी के मालिक को दी।

बेकरी के मालिक ने उसे डबल रोटी दी। डबल रोटी उसने कुत्ते को खिलायी। कुत्ते ने उसे अपना एक बाल दिया जिसको उसने अपना घाव भरने के लिये अपनी नाक में रखा।

और तब जा कर कहीं उसका घाव भरा।

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[1] Sexton’s Nose (Story No 79)– a folktale from Italy from its Sicily area.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free at https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[This story reminds us of several stories. Read them in my book “Billa Aur Chuhiya Jaisi Kahaniyan” by Sushma Gupta written in Hindi language.]

[2] A sexton is an officer of a church, congregation, or synagogue charged with the maintenance of its buildings and/or the surrounding graveyard.

[3] Translated for the words “Piece of Money” – piece of money means 1/5th of the cent.

[4] Bakery is a shop or place where the bread, bun cake, biscuits etc are baked.

[5] Perhaps it is believed in Italy that whichever dog has bitten somebody, if a hair of the same dog is put on its bite, that wound is healed.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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