देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 9 चूहा और बिल्ली // सुषमा गुप्ता

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9 चूहा और बिल्ली[1]

एक बार की बात है कि एक बिल्ली शादी करना चाहती थी सो वह एक कोने पर खड़ी हो गयी। आते जाते जानवर उससे पूछ रहे थे — “ओ बिल्ली रानी क्या बात है तुम यहाँ ऐसे क्यों खड़ी हो?”

बिल्ली बोली — “अरे बात क्या है मैं शादी करना चाहती हूँ। बस इतनी ही बात है।”

तभी एक कुत्ता उधर से गुजरा तो उसने पूछा — “क्या तुम मुझे चाहती हो? क्या तुम मुझसे शादी करोगी?”

बिल्ली बोली — “पहले मैं तुम्हारा गाना सुनना चाहती हूँ तब देखूँगी।”

कुत्ता ज़ोर ज़ोर से भौंका।

“उफ, यह क्या गाना है? यह कोई गाना है? मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती।”

उसके बाद सूअर आया तो उसने भी बिल्ली से पूछा — “क्या तुम मुझसे शादी करोगी बिल्ली रानी?”

“जब मैं तुम्हारा गाना सुनूँगी तब बताऊँगी।”

सूअर ने गाया “उह उह।”

“उफ क्या भयानक गाना है। चले जाओ यहाँ से। मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती।” सूअर बेचारा वहाँ से चला गया।

उसके बाद वहाँ एक बछड़ा आया और उसने भी बिल्ली से पूछा — “ओ बिल्ली रानी क्या तुम मुझसे शादी करोगी?”

“जब मैं तुमको गाता हुआ सुनूँगी तभी बता सकती हूँ कि मैं तुमसे शादी कर सकती हूँ या नहीं।”

बछड़े ने गाया “ऊँ ऊँ ऊँ ऊँ।”

“उफ चले जाओ। तुम तो बहुत ही भयानक गाते हो। तुम्हें मुझसे क्या चाहिये?”

उसके बाद आया एक चूहा। चूहे ने भी उससे पूछा — “अरे बिल्ली रानी तुम यहाँ क्या कर रही हो?”

“ंमैं शादी करना चाहती हूँ।”

“क्या तुम मुझसे शादी करोगी?”

“पर तुम पहले मुझे ज़रा गा कर तो सुनाओ मैं तभी बता सकती हूँ कि मैं तुमसे शादी करूँगी या नहीं।”

और चूहे ने गाया “चीं चीं चीं चीं।”

बिल्ली को उसका गाना अच्छा लगा और उसने उसको अपने पति के रूप में स्वीकार कर लिया।

वह बोली — “चलो हम शादी कर लेते हैं क्योंकि तुम मुझे बहुत अच्छे लगे।” और उन्होंने शादी कर ली।

एक दिन बिल्ली पेस्ट्री खरीदने बाजार गयी और चूहे को घर छोड़ गयी। जाते जाते वह चूहे से कहती गयी — “देखो मैं ज़रा पेस्ट्री खरीदने बाजार जा रही हूँ तुम घर से बाहर मत जाना।”

clip_image002बिल्ली के जाने के बाद चूहा रसोईघर में चला गया तो उसने देखा कि एक बरतन आग पर रखा है और उस बरतन में पानी उबल रहा है और उसमें बीन्स उबल रही हैं।

वह उस बरतन में घुस गया क्योंकि वह बीन्स खाना चाहता था। पर वह वहाँ बीन्स नहीं खा सका क्योंकि बरतन में पानी उबलने लगा था और वह बहुत गरम था। चूहा उसी बरतन में बैठा रहा।

जब बिल्ली आयी तो उसने चूहे को पुकारा पर जब चूहा कहीं दिखायी नहीं दिया तो उसने अपनी पेस्ट्री उसी बरतन में रख दी जिसमें पानी उबल रहा था और जब वह तैयार हो गयी तब उसने उसमें से थोड़ा सी खा ली और बाकी बची पेस्ट्री उसने चूहे के लिये एक प्लेट में रख दी।

जब बिल्ली ने पेस्ट्री निकाली तो उसने देखा कि चूहा तो उसमें खूब ज़ोर से चिपका हुआ है। वह बोली — “ओह मेरे छोटे चूहे, ओ मेरे छोटे चूहे।”

कहते हुए वह वहाँ से चली गयी और दरवाजे के पीछे जा कर बैठ गयी और चूहे के लिये रोने लगी। बिल्ली को रोते देख कर दरवाजा बोला — “बिल्ली रानी क्या बात है क्यों रोती हो? क्यों तुम अपनी खाल इतनी ज़ोर से खुजला रही हो जैसे उसको छील ही डालोगी?”

बिल्ली बोली — “मैं ऐसा क्यों कर रही हूँ? मेरा चूहा मर गया है इसलिये मैं अपने बाल नोच रही हूँ।”

यह सुन कर दरवाजे ने ज़ोर ज़ोर से आवाज करना शुरू कर दिया और बोला — “और मैं दरवाजा इसलिये ज़ोर से आवाज करता हूँ क्योंकि तुम दुखी हो।”

दरवाजे के पास एक खिड़की थी उसने दरवाजे से पूछा — “ओ दरवाजे तुम इतनी ज़ोर से आवाज क्यों कर रहे हो?”

दरवाजा बोला — “बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है और मैं बिल्ली के दुख में इतने ज़ोर की आवाज कर रहा हूँ।”

यह सुन कर खिड़की बोली — “तो मैं खिड़की भी खुलती और बन्द होती हूँ।”

खिड़की के बाहर एक पेड़ खड़ा था वह बोला — “ओ खिड़की तुम इतनी ज़ोर से क्यों खुल और बन्द हो रही हो?”

खिड़की बोली — “बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है। दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है और मैं खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही हूँ।”

पेड़ बोला — “अगर ऐसा है तो मैं पेड़ उसके दुख में नीचे गिर जाता हूँ।”

उसी पेड़ पर एक चिड़िया बैठी थी। चिड़िया ने पूछा — “पेड़ पेड़ तुम नीचे क्यों गिर रहे हो?”

पेड़ बोला — “बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है। दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है। खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही हूँ और मैं पेड़ उसके दुख में नीचे गिर रहा हूँ।”

यह सुन कर चिड़िया बोली — “तो फिर मैं उसके दुख में अपने पंख गिरा देती हूँ।” कह कर चिड़िया वहाँ से एक फव्वारे पर जा बैठी और अपने पंख गिराने लगी।

यह देख कर फव्वारे ने पूछा — “चिड़िया बहिन तुम अपने पंख क्यों गिरा रही हो?”

चिड़िया बोली — “बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है। दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है। खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही हूँ। पेड़ उसके दुख में नीचे गिर गया है और मैं उसके दुख में अपने पंख गिरा रही हूँ।”

यह सुन कर फव्वारा बोला — “तो मैं उसके दुख में सूख जाता हूँ।” सो बिल्ली के दुख में फव्वारे ने पानी फेंकना बन्द कर दिया।

उसी समय एक कोयल वहाँ फव्वारे पर पानी पीने आयी तो उसने फव्वारे को सूखे हुए देखा तो उससे पूछा — “फव्वारे तुम सूख क्यों गये?”

फव्वारा बोला — “बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है। दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है। खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही हूँ। पेड़ उसके दुख में नीचे गिर गया है। चिड़िया उसके दुख में अपने पंख गिरा रही है और मैं उसके दुख में सूख गया हूँ।”

कोयल बोली — “तो मैं कोयल उसके दुख में अपनी पूँछ आग में डाल देती हूँ।”

जब कोयल अपनी पूँछ आग में डाल रही थी तो सेन्ट निकोलस वहाँ आये तो उन्होंने कोयल से पूछा — “कोयल कोयल तुम्हारी पूँछ आग में क्यों है?”

कोयल बोली — “बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है।

दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है। खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही हूँ। पेड़ उसके दुख में नीचे गिर गया है। चिड़िया उसके दुख में अपने पंख गिरा रही है। फव्वारा उसके दुख में सूख गया है और मैं उसके दुख में अपनी पूँछ आग में डाल रही हूँ।”

जब सेन्ट ने यह सुना तो बोला — “तो मैं सेन्ट आज बिना अपने रस्मी कपड़े पहिने ही मास[2] पढूँगा।”

जब सेन्ट बिना अपने रस्मी कपड़े पहिने मास पढ़ रहे थे तो उस देश की रानी वहाँ आयी। उसने उनसे पूछा — “सेन्ट निकोलस, आप आज यह मास बिना अपने रस्मी कपड़े पहने क्यों पढ़ रहे हैं?”

सेन्ट निकोलस बोले — “रानी जी, बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है।

दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है। खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही हूँ। पेड़ उसके दुख में नीचे गिर गया है। चिड़िया उसके दुख में अपने पंख गिरा रही है। फव्वारा उसके दुख में सूख गया है।

कोयल उसके दुख में अपनी पूँछ आग में डाल रही है और मैं उसके दुख में यह मास बिना अपने रस्मीे कपड़े पहने ही पढ़ रहा हूँ।”

यह सुन कर रानी बोली — “तो मैं रानी उसके दुख में जा कर आटा छानती हूँ।”

जब रानी आटा छान रही थी तो राजा वहाँ आ गया। राजा ने पूछा — “रानी जी आज आटा आप क्यों छान रही हैं? क्या हमारे घर के सारे नौकर मर गये?”

रानी बोली — “नहीं राजा साहब ऐसा नहीं है। बात यह है कि बिल्ली का चूहा मर गया है। बिल्ली उसके दुख में अपने बाल नोच रही है। दरवाजा बिल्ली के दुख में आवाज कर रहा है। खिड़की उसके दुख में खुल और बन्द हो रही है।

पेड़ उसके दुख में नीचे गिर गया है। चिड़िया उसके दुख में अपने पंख गिरा रही है। फव्वारा उसके दुख में सूख गया है।

कोयल उसके दुख में अपनी पूँछ आग में डाल रही है। सेन्ट निकोलस उसके दुख में मास बिना अपने रस्मीे कपड़े पहने ही पढ़ रहे हैं और मैं उसके दुख में आटा छान रही हूँ।”

राजा मुस्कुराया और बोला — “और मैं राजा उसके दुख में अपनी कौफी पीने जा रहा हूँ।”

और इस तरह से यह कहानी अचानक यहीं खत्म हो जाती है।



[1] The Mouse and the Cat (Story No 82) – a folktale from Italy.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free in English on https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[2] Mass is one of the names by which the sacrament of the Eucharist is commonly called in the Catholic Church. The term Mass often colloquially refers to the entire church service in general.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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