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लघुकथा : कमल चोपड़ा : प्लान // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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कृतियां - अतिक्रमण (कहानी संग्रह)

सिर्फ इन्सान - पंजाबी में लघुकथा अनूदित

अन्यथा/फंगस - लघुकथा संग्रह

अनर्थ - लघुकथा संग्रह

संपादन - हालात, प्रतिवाद, अपवाद, आयुध, अपरोक्ष

संप्रति - स्वतंत्र लेखन

कमल चोपड़ा

प्लान

च्चा कुछ ही देर में श्रेया से अच्छी तरह घुल मिल गया था. उसकी मम्मी किसी जरूरी काम से कहीं गई हुई थी. वह उसे श्रेया के पास छोड़ गई थी. मन ही मन खीझ उठी श्रेया. उसकी अपनी तबीयत ठीक नहीं है- डिप्रेशन, सिरदर्द, घबराहट, बेचैनी, चक्कर और जाने क्या-क्या. कितनी तो बीमारियां लगी हुई हैं. साल भर से आठ नौ गोली रोज खानी पड़ती हैं. तीन-चार दिन से तो ऑफिस भी नहीं जा पा रही है. ऊपर से यह बच्चा? पड़ोस के नाते रखना तो पड़ेगा...बच्चा फ्लैट में इधर से उधर दौड़ता भागता फिर रहा था जैसे फ्लैट के हर कोने का निरीक्षण कर रहा हो.

जब पहली बार वह प्रेगनेन्ट हुई थी तब वह राहुल के साथ लिव-इन में रहती थी. राहुल अड़ गया-अभी हम बच्चा अफोर्ड नहीं कर सकते. अभी अबोर्शन करवा लो. पहले हम लोग सैट हो लें. अभी कैरियर पर ध्यान दो. दो साल बाद शादी करेंगे. बच्चे-वच्चे की तब देखी जायेगी. शादी के बाद भी ऐसे मौके आये थे जब वह उम्मीद से हुई थी. लेकिन राहुल नहीं माना था. बच्चा प्लॉन करने का भी हमारे पास वक्त नहीं है. अभी बच्चा हुआ तो जी.एम. की पोस्ट, बड़ी कोठी और लम्बी सी कार सभी प्लॉन धरे रह जायेंगे. श्रेया को भी लगा था राहुल सही कह रहा है. उसने भी अपनी पढ़ाई बच्चे पाने के लिये नहीं की है. उसे कुछ कर दिखाना है।

एम.टी.वी. करवाने की जरूरत नहीं पड़ी थी. गोलियों से काम चल गया था.

एकाएक श्रेया को पड़ोसिन के बच्चे का ख्याल आया. साथ वाले कमरे से बच्चे की आवाज आ रही थी. श्रेया उसे देखने के लिये चली तो बच्चा पर्दे के पीछे से निकला और उसकी साड़ी पकड़ते हुए उसे डराते हुए बोला- हऊ! श्रेया खिलखिला पड़ी. शरारती मुझे डराता है? खिलखिलाते हुए वह फिर दूसरे पर्दे के पीछे जा छिपा. श्रेया उसे ढूंढ़ने लगी तो वह पीछे से फिर से डराते हुए खिलखिलाने लगा- हाऊ...ऊ...ऊ!

बच्चे ने खेल ही बना लिया. वह भी बच्चे के साथ बच्चा बनकर खेलने लगी. बच्चा कभी आगे-आगे दौड़ता... श्रेया पीछे...कभी वह श्रेया की कोई चीज उठाकर भाग जाता तो कभी बेड पर कलाबाजियां खाने लगता. श्रेया भी जैसे बच्चे के साथ बच्चा बन गई थी. शाम हो गई थी. बच्चे की माँ आ पहुँची थी. सॉरी जरा देर हो गई. इसने ज्यादा तंग तो नहीं किया? बहुत शरारती है... थैंक्यू सो मच...! एकाएक श्रेया को याद आया. आज उसने कोई भी दवाई नहीं खाई है. उसे सिरदर्द, बेचैनी, घबराहट, स्ट्रेस, टेन्शन, डिप्रेशन कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था. उसके हाथ-पाँव भी नहीं काँप रहे थे. उसका मूड भी अच्छा है.

राहुल ऑफिस से लौटा तो बोला- अब हमें ये सर्विस वर्विस छोड़कर अपनी कंपनी खोलने के प्लॉन पर काम शुरू कर देना चाहिए. श्रेया एकाएक उठी और अलमारी से गर्भनिरोधक गोलियां निकालकर डस्टबिन में फेंकते हुए बोली- अब बच्चे के सिवाय कोई प्लॉन नहीं.

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