लघुकथाएँ : राधेश्याम पाठक ‘उत्तम’ // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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राधेश्याम पाठक ‘उत्तम’

जन्म : 3 अप्रैल 1950 (बड़नगर)

उपलब्धियां : कविता संग्रह- 2, लघुकथा संग्रह- 2, खंड काव्य- 1, नी तीन में नी तेरा में (मालवी नानी वारता संग्रह).

संपर्कः एलआईजी-प्प्-14, ‘औदुम्बर भवन’ सांदीपन नगर,

उज्जैन- (म.प्र.)

राधेश्याम पाठक ‘उत्तम’

अनास्था

छात्र ने अपने अध्यापक को चाकू से गोद दिया. गंभीर अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टर ने पुलिस को सूचना देकर इलाज प्रारंभ कर दिया. पुलिस ने छात्र को लॉक-अप में बंद कर दिया. छात्र से पूछा- ‘अपने अध्यापक से इतनी घृणा थी?’

छात्र ने बताया- ‘वे हर बात में टोका करते थे. हमारी स्वतंत्रता में सेंधमारी करते थे. कई मौकों पर मैं मन मसोसकर रह गया. आज तो हद हो गई थी. मैंने जैसे ही सिगरेट मुंह से लगाई और उसे सुलगा ही रहा था कि अचानक वे आ गये. उन्होंने मेरे मुंह से सिगरेट झपट ली और जमीन पर फेंक पैरों से मसल दी. मुझे गुस्सा आ गया और मैंने चाकू से गोद दिया.’

‘तुम्हारे पास चाकू था?’

‘हां मैंने अपनी रक्षा के लिए दो दिन पहले ही खरीदा था.’

‘रक्षा के लिए चाकू खरीदा था. तुम्हें किससे खतरा था?’

‘आज का युग खतरों का युग है. बात-बात में गुस्सा टपक जाता है.’

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