लघुकथा : शरद चंद्र राय श्रीवास्तव // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

clip_image002

शरद चंद्र राय श्रीवास्तव

जन्म : 8 अप्रैल 1940

उपलब्धियां : लघुकथा में रुचि, लघुकथाओं का ‘प्रतिनिधि लघुकथाएं, ‘ककुभ’, ‘रुचिर संस्कार’ तथा अखबारों के साहित्यक पृष्ठों पर स्फुट

प्रकाशन : ‘प्राची’ चहेती पत्रिका.

संपर्कः 5/132, विजय नगर, जबलपुर-482002 (म. प्र.)

पिन- 487551,

शरदचंद्र राय श्रीवास्तव

कोई अंतर नहीं

आज माहेश्वरी बहुत प्रसन्न थीं. वह मेटरनिटी होम की डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को रुपये/ पैसे और मिठाई बांट रही थीं. इसकी प्रसन्नता का कारण था. दस साल बाद उसकी पुत्री सुकीर्ति ने एक कन्या रत्न को जन्म दिया था. वह आज नानी बन गई थीं. एक नर्स ने माहेश्वरी जी से पूछा, ‘आप कन्या रत्न के होने पर इतनी खुश हैं, अगर पुत्र रत्न होता तो तब भी जाने आप क्या करतीं?’

माहेश्वरी जी ने कहा, ‘मैं इतना ही करती. मेरे लिए पुत्र और कन्या में कोई अंतर नहीं. गलती हमारी है जो हम लड़कियों को हमेशा लड़कों से कम आंकते रहे.’

माहेश्वरी जी का उत्तर सुनकर नर्स आश्चर्यचकित होकर उन्हें देखती रह गई.

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "लघुकथा : शरद चंद्र राय श्रीवास्तव // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.