लघुकथाएँ : नीरज नीर // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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नीरज नीर

कसाई

स्थानीय गौशाला समिति द्वारा आयोजित सभा में पंडित जी ने भावुक कर देने वाला भाषण दिया. गौ माता की रक्षा करना ही धर्म है, बताया और साथ ही बताया कि गाय के शरीर में कितने तरह के देवी देवताओं का वास होता है. गाय को कत्ल किये जाने से पहले उसे दी जाने वाली यातनाओं के बारे में बता कर तो उन्होंने सभा के माहौल को मार्मिक ही कर दिया.

जोशीले अंदाज में धर्म एवं शास्त्रों की दुहाई देते हुए आवाह्न किया कि गायों को कटने से रोकने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर देने चाहिए. पंडित जी की खूब जय-जयकार हुई. वे फूल मालाओं से लाद दिए गए. धर्म के लिए बहुत बड़ा काम करने की अनुभूति और विजयी मुद्रा लिए पंडित जी अपने घर वापस लौटे.

घर के एक कोने में पड़ी भूखी बूढ़ी गाय ने कातर नजरों से उन्हें देखा. पंडित जी के सारे जोश पर पानी फिर गया. पूरा ब्रह्माण्ड जल उठा. बेटे को आवाज लगायी एवं जोर से चिल्ला कर कहा, ‘कितनी बार कहा है इस बूढ़ी गाय को बेच आओ.’

‘कोई ग्राहक मिले तब ना.’ बेटे ने झुँझला कर कहा।

‘अरे कोई ग्राहक ना मिले तो दूर जाकर कहीं सड़क पर ही छोड़ आओ. बैठे बैठे चारा खाती है, जगह भी घेर रखा है.’ पंडित जी गरजे ।

‘बाहर छोड़ आये तो कोई कसाई उठा कर ले जाएगा.’ पंडिताइन धीरे से फुसफुसाई.

पंडित जी के तलवे का गुस्सा कपार पर चढ़ गया. पाँव पटकते हुए बोले, ‘ले जाता है तो ले जाए कसाई, हम कितने दिनों तक इसे बैठा कर खिलाते रहेंगे.’

दूसरे कोने मे बैठी पंडित जी की बूढ़ी माँ चुपचाप सब सुन रही थी.

संपर्क : शुभ गौरी इन्क्लेव के पीछे, बुद्ध विहार,

पोस्ट : अशोक नगर, रांची (झारखण्ड)-834 002

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