370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

लघुकथाएँ : श्यामसुंदर ‘सुमन’ // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

clip_image002

श्यामसुंदर ‘सुमन’

जन्म : 9 जुलाई 1949

उपलब्धियां : विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविता, बाल कहानियां, लघुकथाएं आदि प्रकाशित

प्रतिनिधि : युवा अग्रवाल, साहित्य अमृत (दिल्ली) मधुमती (उदयपुर) आदि.

संपर्कः गोलप्याऊ चौराहा, भीलवाड़ा (राज.)

पिन- 311001,

श्यामसुंदर ‘सुमन’

प्रार्थना

श्रीमती रमा व श्रीमती शारदा एक मंदिर में भगवान की मूर्ति के सामने अपनी-अपनी मनोकामना पूरी कराने हेतु विगत दो वर्षों से प्रार्थना कर रही थीं. श्रीमती रमा भगवान से प्रार्थना करते हुए अपनी मनोकामना पूरी करने हेतु कहती थी- ‘हे भगवान, मेरे पास सबकुछ है लेकिन संतान नहीं है. मुझे एक बेटा दे दो.’ श्रीमती शारदा भगवान से प्रार्थना करते हुए कहती थी- ‘हे भगवान! मुझे यह कैसी औलाद दी है? शराब पीता है, जुआ खेलता है, वह सभी बुरे कार्य करता है. ऐसी औलाद से तो अच्छा होता यदि मैं बांझ ही रहती. भगवान, अब मुझसे सहा नहीं जाता, मुझे अपने पास बुला लो.’

आत्महत्या और हादसा

रमनलाल की सेवा निवृत्ति में तीन महीने रह गये थे. उसके तीनों बेटे बेरोजगार हैं. बेटी विवाह लायक है. उसके वेतन से घर का खर्चा भी नहीं चलता है. यही सोचते रहते थे. एक बेटे को नौकरी मिल जाती व बेटी की शादी हो जाती. सात दिन पश्चात् ही रमनलाल चल बसा. जानकार लोग आत्महत्या मान रहे थे, और पुलिस एक हादसा...

बड़े बेटे को रमनलाल के कार्यालय में नौकरी मिल गई.

---

लघुकथा 4594802688549317323

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव