लघुकथाएँ : श्यामसुंदर ‘सुमन’ // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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श्यामसुंदर ‘सुमन’

जन्म : 9 जुलाई 1949

उपलब्धियां : विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कविता, बाल कहानियां, लघुकथाएं आदि प्रकाशित

प्रतिनिधि : युवा अग्रवाल, साहित्य अमृत (दिल्ली) मधुमती (उदयपुर) आदि.

संपर्कः गोलप्याऊ चौराहा, भीलवाड़ा (राज.)

पिन- 311001,

श्यामसुंदर ‘सुमन’

प्रार्थना

श्रीमती रमा व श्रीमती शारदा एक मंदिर में भगवान की मूर्ति के सामने अपनी-अपनी मनोकामना पूरी कराने हेतु विगत दो वर्षों से प्रार्थना कर रही थीं. श्रीमती रमा भगवान से प्रार्थना करते हुए अपनी मनोकामना पूरी करने हेतु कहती थी- ‘हे भगवान, मेरे पास सबकुछ है लेकिन संतान नहीं है. मुझे एक बेटा दे दो.’ श्रीमती शारदा भगवान से प्रार्थना करते हुए कहती थी- ‘हे भगवान! मुझे यह कैसी औलाद दी है? शराब पीता है, जुआ खेलता है, वह सभी बुरे कार्य करता है. ऐसी औलाद से तो अच्छा होता यदि मैं बांझ ही रहती. भगवान, अब मुझसे सहा नहीं जाता, मुझे अपने पास बुला लो.’

आत्महत्या और हादसा

रमनलाल की सेवा निवृत्ति में तीन महीने रह गये थे. उसके तीनों बेटे बेरोजगार हैं. बेटी विवाह लायक है. उसके वेतन से घर का खर्चा भी नहीं चलता है. यही सोचते रहते थे. एक बेटे को नौकरी मिल जाती व बेटी की शादी हो जाती. सात दिन पश्चात् ही रमनलाल चल बसा. जानकार लोग आत्महत्या मान रहे थे, और पुलिस एक हादसा...

बड़े बेटे को रमनलाल के कार्यालय में नौकरी मिल गई.

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