गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

लघुकथाएँ : महावीर रवांल्टा // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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महावीर रवांल्टा

जन्म : 10 मई 1966

प्रकाशन : अनेक उपन्यास, अनेक कहानी संग्रह आदि प्रकाशित, चेहरे (लघुकथा संगह) शीघ्र प्रकाश्य.

संपर्कः संभावना, महरगांव, जिला- उत्तरकाशी

(उत्तराखण्ड), पिन- 249185,

महावीर रवांल्टा

समझौता

किसी बात पर पति-पत्नी में झगड़ा हो गया तो पत्नी ने गुस्से से घर छोड़ने की धमी दे दी-

‘अगर तुम्हें घर छोड़ना ही है तो छोड़ क्यों नहीं देती, कौन रोकता है तुम्हें.’ पत्नी को उलाहना देता हुआ पति आवेश में फट पड़ा था.

पति के शब्द सुनकर पत्नी का सारा गुस्सा हवा हो गया और वह पति के बारे में सोचने लगी थी, यही पति था जो उसकी एक दिन की जुदाई भी सहन नहीं कर सकता था, आज उससे घर छोड़ने की बात कर रहा था.

उसे लगा वह किसी चौराहे पर निर्वस्त्र खड़ी है और अनगिनत निगाहें उसका पीछा कर रही हैं.

इसके बाद उसने फिर कभी पति के सामने घर छोड़ने की जिद नहीं की, बस उसकी सुनती रही.

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