लघुकथाएँ : महेन्द्र महतो // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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महेन्द्र महतो

नदी-समुद्र संवाद

एक बार नदियों ने समुद्र से सिर पटकते हुए कहा ‘प्रियवर! हम सब आपको मीठा जल देती हैं तो फिर आपका जल खारा क्यों है?’

समुद्र ने नदियों से मुंह से झाग उगलते हुए कहा, ‘प्रिय, कहीं तुम सबों के मार्ग-श्रम से निकले स्वेदकण तो इसका कारण नहीं हैं.’

कहते हैं, तब समुद्र का उत्तर सुनकर प्रश्नाकुल सारी नदियां अंतहीन अहोभाव से भर गयीं.

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