गुरुवार, 28 दिसंबर 2017

लघुकथाएँ : राजेश महेश्वरी // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

राजेश महेश्वरी

आत्मनिर्भरता

रमेश एम.बी.ए. की शिक्षा पूरी होने के उपरांत एक कंपनी में सेल्समेन के पद पर कार्यरत था. वह एक मध्यम परिवार से था और इस नौकरी पर ही उसका परिवार आश्रित था. उसने अपने कठिन परिश्रम, लगन एवं समर्पण से अपनी कंपनी के उत्पादन की बिक्री एक ही वर्ष में काफी बढ़ा दी थी, जिससे वह आश्वस्त था कि इससे उसे कंपनी में शीघ्र ही तरक्की प्राप्त होगी.

एक दिन उसे कंपनी के जनरल मैनेजर ने अपने पास बुलाकर उसकी तारीफ करते हुए उसे काम की प्रशंसा की और माल की बिक्री बढ़ाने के लिये उसे धन्यवाद दिया. इसके बाद वे बोले कि मुझे बहुत दुख है कि तुम्हें यह बताना पड़ रहा है कि मालिक के एक निकट रिश्तेदार, जिन्होंने हाल ही में सेल्स में एम.बी.ए. किया है, उन्हें तुम्हारे पद पर नियुक्त किया जा रहा है. हम तुम्हें एक माह का समय दे रहे हैं; ताकि तुम कोई वैकल्पिक नौकरी खोज सको.

यह सुनकर रमेश के पांव तले जमीन खिसक गयी और उसने दुखी एवं निराश मन से घर जाकर अपनी मां को यह बात बताई. उसकी मां ने उसे समझाया कि जीवन में संकट तो आते ही रहते हैं. हमें उनका दृढ़तापूर्वक मुकाबला कर चुनौती को स्वीकार करके उसके निदान की दिशा में प्रयास करना चाहिए.

मां के विचारों ने उसे इन विपरीत परिस्थितियों में भी संबल प्रदान किया. रमेश ने चिंता छोड़कर इसके समाधान एवं भविष्य की कार्ययोजना पर गंभीर चिंतन, मनन प्रारंभ कर दिया.

उसके मन में विचार आया कि जब मैं अपनी कंपनी की बिक्री इतनी बढ़ा सकता हूं तो क्यों ना मैं स्वयं ही इसी उत्पाद का छोटे रूप में निर्माण करके उसे बाजार में लेकर आ जाऊँ. रमेश इस दिशा में प्रयासरस हो गया और बैंक से कर्ज लेकर उसने उत्पादन प्रारंभ कर दिया. उसे बिक्री के क्षेत्र में तो महारत हासिल थी ही और अपने संपर्कों के माध्यम से उसका पूरा उत्पादन आसानी से बाजार में बिकने लगा. अब धीरे-धीरे उसने तरक्की करके उसे एक बड़ा रूप दे दिया. उसकी इस सफलता का सीधा प्रभाव उस कंपनी पर पड़ने लगा जहां वह काम करता था. वह कारखाना बिक्री कम होने के कारण घाटे में जाने लगा और एक दिन बंद हो गया.

कोई भी व्यवसाय चाटुकारों और अनुभवहीन रिश्तेदारों से नहीं चलाया जा सकता है. एक दिन रमेश सोच रहा था कि प्रभु की कितनी कृपा है कि उसे नौकरी से हटाया गया और उसने आत्मनिर्भर बनने के लिये स्वयं का यह काम आरंभ कर दिया. यदि उसे नौकरी से नहीं हटाया जाता तो उसका सारा जीवन नौकरी में ही बीत गया होता और वह जीवन में सफलता के इस मुकाम पर कभी नहीं पहुंच पाता. ईश्वर जो भी करता है हमारी भलाई के लिये ही करता है.

सम्पर्कः 106, नया रामपुर, जबलपुर (म.प्र.)

शालिनी गोयल

जन्म : 13 अक्टूबर 1972

प्रकाशन : राजस्थान पत्रिका , दैनिक भास्कर , दैनिक नवज्योति , दैनिक लोकमित्र इत्यादि में कई कहानियां प्रकाशित, आकाशवाणी से भी प्रसारण.

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.