लघुकथाएँ : मनोहर शर्मा माया // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

मनोहर शर्मा माया

अनुकम्पा

रामपाल का जो बेटा रोज ही सड़क पर खड़े होकर रामपाल को गालियां दिया करता था. आज वही बेटा उनकी तेरहवीं बड़ी श्रद्धा से कर रहा था. रामपाल शासकीय सेवा से निवृत्त होने के पूर्व अपने फण्ड का लेखा ठीक कराने सरकारी दौरा निकालकर जा रहे थे कि रास्ते में ही रेल दुर्घटना में मारे गये.

उनका बेटा खबर मिलते ही घटनास्थल पर पहुंच गया. पिता की लाश रखकर रेल प्रशासन से सरकारी घोषणा के अनुसार दो लाख रुपये ले आया था.

अब तेरहवीं करते हुए उसने रामपाल के दफ्तर के उन सभी लोगों को आमंत्रित किया था जो उसे अनुकम्पा नियुक्ति दिला सकते थे. देखने वाले आश्चर्यचकित थे. बेटा इतना पितृभक्त कैसे हो गया?

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

0 टिप्पणी "लघुकथाएँ : मनोहर शर्मा माया // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक"

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.