लघुकथाएँ : नरेन्द्र श्रीवास्तव // प्राची - दिसंबर 2017 : लघुकथा विशेषांक

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नरेन्द्र श्रीवास्तव

जन्म : 1 जुलाई 1955

उपलब्धियां : एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित. अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, आकाशवाणी, टी.वी. से रचनाएं एवं साक्षात्कार प्रसारित. प्रतिष्ठित सम्मानों से विभूषित.

संपर्कः पलोटन गंज, गाडरवारा, जिला- नरसिंहपुर (म.प्र.)

पिन- 487551,

नरेन्द्र श्रीवास्तव

प्रायश्चित

एक टपरेनुमा चाय की दुकान के एक कोने में एक कुत्ता लेटा हुआ था. तभी एक ग्राहक ने वहीं पास की एक टेबिल पर अपना बैग रखते हुए एक कप चाय का ऑर्डर दिया. अचानक उसकी नजर उस कुत्ते पर गई. उसे जाने क्या सूझा वह उठा और पत्थर उटाकर उसने उस लेटे हुए कुत्ते पर मारा. कुत्ता नींद में था. अचानक हुए हमले से घबरा गया. पत्थर उसके पैर में लगा. वह तिलमिला गया और चीखकर लंगड़ाते हुये वहां से दूर जाकर लेट गया.

ग्राहक ने चाय पी और बिल चुकाने दुकानदार के पास गया. वह रुपये दे ही रहा था कि उसकी नजर अपने बैग पर पड़ी. एक चोर उसे उठाकर भाग रहा था. वह पकड़ो-पकड़ो कहकर चोर के पीछे-पीछे भागा. शोर-शराबा सुनकर उस कुत्ते की भी नींद खुल गई. वह कुत्ता भी भौंकता हुआ उस चोर के पीछे दौड़ा किंतु वह पैर में लगी चोट से लंगड़ाने की वजह से नहीं दौड़ पाया और चोर भाग गया. ग्राहक को अब समझ में आया कि बेवजह कुत्ते को पत्थर मारने का उसे कितना बड़ा दंड मिला है.

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