मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 11 कप्तान और जनरल // सुषमा गुप्ता

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11 कप्तान और जनरल[1]

एक बार की बात है कि इटली के सिसिली टापू पर एक राजा रहता था जिसके एक ही बेटा था। इस राजकुमार की शादी राजकुमारी टैरैसीना[2] से हुई थी।

जब उनकी शादी का जश्न खत्म हो गया तो राजकुमार एक कमरे में बहुत दुखी और चिन्ता में बैठ गया। उसकी पत्नी ने पूछा — “क्या बात है आप इतने दुखी और चिन्तित क्यों हैं?”

राजकुमार बोला — “प्रिय टैरैसीना, मैं सोच रहा था कि हम लोगों को एक कसम खानी चाहिये कि हममें से जो कोई भी पहले मरे दूसरा उसको उसकी कब्र में तीन दिन और तीन रात तक उसे जगाये।”

टैरैसीना बोली — “अरे बस इतनी सी बात है जो आपको परेशान कर रही है?”

उसने तुरन्त राजकुमार की तलवार उठायी और दोनों ने उसकी मूठ पर बने क्रास को चूम कर यह कसम खायी — “हममें से जो कोई भी पहले मरे दूसरा उसको उसकी कब्र में तीन दिन और तीन रात तक उसे जगाये।”

एक साल बाद राजकुमारी टैरैसीना बीमार पड़ गयी और मर गयी। राजकुमार ने उसको बड़ी शानो शौकत के साथ दफनाया।

उस रात उसने अपनी तलवार उठायी, दो पिस्तौल लीं और सोने चाँदी के सिक्कों से भरा एक थैला ले कर चर्च चला गया। वहाँ उसने चर्च के रखवाले को कहा कि वह उसको राजकुमारी की कब्र में उतार दे।

उसने चर्च के रखवाले से यह भी कहा — “आज से तीन दिन बाद तुम यहाँ आना और कब्र में से कोई आवाज सुनना। अगर मैं खटखटाऊँ तो तुम कब्र खोल देना और अगर रात होने तक मैं न खटखटाऊँ तो समझ लेना कि मैं फिर कभी वापस नहीं आऊँगा।”

फिर उसने उस चर्च के रखवाले को उसके इस काम के लिये 100 क्राउन[3] दिये और कब्र में अन्दर चला गया। चर्च के रखवाले ने कब्र ऊपर से बन्द कर दी।

जब वह कब्र में बन्द हो गया तो उसने ताबूत खोला तो अपनी पत्नी की लाश देख कर रो पड़ा। वह वहाँ रात भर रोता रहा। उसकी पहली रात वहाँ इस तरह गुजरी।

दूसरी रात को उसे उस कब्र के पीछे की तरफ एक साँप के फुंकार मारने की आवाज सुनायी दी और एक बडा. और भयानक साँप वहाँ निकल आया। उसके पीछे उसके कुछ बच्चे साँप भी थे।

उस साँप ने मुँह खोल कर उसकी पत्नी को काटने की कोशिश की पर राजकुमार ने अपनी पिस्तौल उसकी तरफ करके उसके ऊपर गोली चला दी।

पिस्तौल की गोली से बड़ा साँप तो मर गया पर उसकी गोली चलने की आवाज सुन कर बच्चे साँप भाग गये। राजकुमार बड़े मरे हुए साँप के साथ वहीं कब्र में ही रहा।

कुछ देर में ही वे बच्चे साँप अपने अपने मुँहों में कुछ घास की पत्तियाँ ले कर वापस आ गये। वे सब उस मरे हुए साँप को चारों तरफ से घेर कर उसके घावों पर वह घास की पत्तियाँ फेरने लगे। उन्होंने घास की कुछ पत्तियाँ उसके मुँह में रखीं, कुछ उसकी ऑखों पर रखीं और कुछ उसके शरीर पर मलीं।

कुछ ही पल में उस मरे हुए साँप ने ऑखें खोल दीं। वह कुछ हिला डुला और फिर से वैसा ही हो गया जैसा मरने से पहले था। वह तो एक बार फिर से जी गया था। ज़िन्दा हो कर वह साँप और उसके बच्चे वहाँ से भाग गये।

अपनी लायी हुई घास वे बच्चे वहीं छोड़ गये थे। राजकुमार ने तुरन्त ही वह घास उठा ली और उसने भी उसमें से कुछ घास अपनी पत्नी के मुँह में रखी और कुछ उसके शरीर पर बिखेर दी।

लो. उसकी तो साँस वापस आने लगी। उसके चेहरे का रंग भी वापस आ गया। वह उठ बैठी और बोली — “ओह, मैं इतनी देर तक कैसे सोती रही।”

खुशी के मारे राजकुमार ने उसको गले लगा लिया और फिर तुरन्त ही उन्होंने उस छेद को ढूँढना शुरू किया जिसमें वे साँप गायब हो गये थे। वह छेद इतना बड़ा था कि वे दोनों उसके अन्दर जा सकते थे सो दोनों उस छेद के अन्दर घुस गये।

दूसरी तरफ वे उस साँप घास वाले मैदान में निकल आये जिसमें वे साँप गायब हुए थे। राजकुमार ने उस मैदान में से बहुत सारी घास तोड़ ली और उसको ले कर वे दोनों घर वापस आ गये। फिर वे पेरिस[4] चले गये और वहाँ नदी के किनारे एक महल किराये पर ले कर रहने लगे।

कुछ समय बाद राजकुमार ने एक सौदागर बनने का निश्चय किया। उसने अपनी पत्नी को एक अच्छे आचार विचार वाली स्त्री के पास छोड़ा जो उसकी उसके घर के कामों में सहायता कर सके। फिर उसने एक जहाज़ खरीदा और व्यापार के लिये चल दिया।

उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह एक महीने में लौट आयेगा और अपने आने की सूचना देने के लिये वह तीन खाली तोप छोड़ेगा।

जैसे ही राजकुमार वहाँ से गया नैपिल्स[5] की सेना का एक कप्तान सड़क पर जा रहा था कि उसने टैरैसीना को खिड़की पर खड़े देखा। उसने टैरैसीना से बात करनी चाही पर टैरैसीना वहाँ से चली गयी।

यह देख कर कप्तान ने एक बुढ़िया को बुलाया और उससे कहा — “मैम, अगर आप मुझे उस प्यारी सी लड़की से मिलवा दें जो इस महल में रहती है तो मैं आपको 200 क्राउन[6] दूँगा।”

वह बुढ़िया टैरैसीना के महल में गयी और उससे सहायता माँगी कि कुछ लोग उसका सामान छीनना चाहते थे।

उसने कहा — “मेरे पास सामान से भरी एक आलमारी है और वे उसको ले लेना चाहते हैं। क्या आप मेरे ऊपर इतनी दया करेंगी कि आप उसको अपने पास रख लें?”

टैरैसीना राजी हो गयी। बुढ़िया तीन आलमारियाँ उसके पास ले आयी और टैरैसीना ने उनको अपने महल में रख लिया।

रात को उन आलमारियों में से एक आलमारी में से कप्तान निकला, टैरैसीना को पकड़ा और अपने जहाज़ पर ले गया। वे नैपिल्स चले गये जहाँ टैरैसीना अपने पति को भूल कर कप्तान के साथ उसकी पत्नी की तरह से रहने लगी।

एक महीने बाद राजकुमार का जहाज़ नदी में वापस आया तो उसने अपने आने की खबर देने के लिये तीन खाली तोपें चलायीं। पर उसको अपने महल के छज्जे पर अपनी पत्नी दिखायी नहीं दी। उसका घर भी खाली पड़ा था और वहाँ उसका कोई निशान भी नहीं था।

राजकुमार ने अपना सब कुछ बेच दिया और दुनिया भर में घूमता फिरा। आखीर में वह नैपिल्स आया और वहाँ एक सिपाही की नौकरी करने लगा।

एक दिन वहाँ के राजा ने सेना की एक बहुत ही शानदार परेड का इन्तजाम किया जिसमें सब सिपाहियों को हिस्सा लेना था। उसी में वह कप्तान भी अपनी पत्नी साथ चल रहा था जो टैरैसीना को ले कर आया था।

सिपाही बने राजकुमार ने टैरैसीना को पहचान लिया और टैरैसीना ने सिपाही बने राजकुमार को पहचान लिया। टैरैसीना ने कप्तान से कहा — “देखो, उन सिपाहियों में वह मेरे पति हैं। अब मैं क्या करूँ।”

कप्तान ने उस सिपाही की तरफ इशारा करते हुए अपनी पत्नी से कहा — “हाँ यह सिपाही मेरे साथ था और अभी अभी उसकी तरक्की हुई है।”

कप्तान ने उसको और कई और लोगों को अपने घर खाने के लिये बुलाया जिसमें टैरैसीना नहीं आयी। जब वे खाना खा रहे थे तो कप्तान ने एक चाँदी का चाकू और काँटा राजकुमार की जेब में रख दिया।

कुछ देर बाद एक चाकू और काँटा कम पाया गया तो उसकी खोज शुरू हुई। खोज करने पर वह उस सिपाही की जेब में पाया गया। उसका कोर्ट मार्शल हो गया और उसको बन्दूक से गोली मार कर मारने की सजा सुना दी गयी।

जो सिपाही उसको मारने वाले थे उनमें से एक सिपाही उसका दोस्त था। उसने अपने उस दोस्त को थोड़ी सी घास दी और कहा — जब तुम मुझ पर गोली चलाओ तो बहुत सारा धुँआ बनाने की कोशिश करना। जब दूसरे सिपाही अपने कन्धे पर बन्दूक रख कर जा रहे हों तो तुम यह थोड़ी सी घास मेरे मुँह में और मेरे घावों पर रख देना और मुझे छोड़ कर चले जाना।”

समय पर उस पर गोली चलायी गयी। उसके दोस्त ने काफी सारा धुँआ छोड़ा और उस धुँए की आड़ में उसने अपने दोस्त सिपाही के मुँह में और घावों पर थोड़ी थोड़ी घास रख दी। कुछ ही देर में राजकुमार ज़िन्दा हो गया और वहाँ से उठ कर भाग गया।

इधर नैपिल्स के राजा की बेटी कुछ दिनों से इतनी बीमार थी कि बस मरने वाली थी। कोई भी डाक्टर उसके लिये कुछ भी नहीं कर पा रहा था।

राजा ने अपने पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी थी कि “जो कोई भी मेरी बेटी को ठीक करेगा अगर वह कुऑरा होगा तो मैं अपनी बेटी की शादी उससे कर दूँगा और अगर वह शादीशुदा होगा तो फिर मैं उसको राजकुमार बना दूँगा।”

यह घोषणा सुन कर राजकुमार ने एक डाक्टर का वेश रखा, अपनी थोड़ी सी घास उठायी और शाही महल चल दिया। वहाँ उसने एक बहुत बड़ा कमरा जिसमें बहुत सारे डाक्टर बैठे थे पार किया और राजा की बीमार बेटी के पास पहुँच गया। तभी तभी उसने अपने आखिरी साँस ली थी।

राजकुमार ने राजा से कहा — “मैजेस्टी, आपकी बेटी तो अब मर ही गयी है पर मेरे पास इसको जिलाने का अभी भी एक तरीका है अगर आप मुझे इसके साथ अकेला छोड़ दें तो।”

उसको वहाँ अकेला छोड़ दिया गया। उसने थोड़ी सी घास उस राजकुमारी के मुँह और नाक में रखी तो उसने फिर से साँस लेना शुरू कर दिया और कुछ ही पल में वह बिल्कुल ठीक हो गयी।

राजा अपनी बेटी को ज़िन्दा देख कर बहुत खुश हुआ और बोला — “डाक्टर अब तुम मेरे दामाद[7] हो।”

राजकुमार बोला — “मुझे अफसोस है राजा साहब कि मैं आपका दामाद नहीं बन सकता मैं पहले से ही शादीशुदा हूँ।”

“तो फिर तुम्हें क्या चाहिये?”

“मैं आपकी सारी सेना का जनरल कमान्डर बनना चाहता हूँ।”

“ठीक है।” और राजा ने दो शानदार मौके मनाने का हुकुम दे दिया। पहला तो अपनी बेटी के ज़िन्दा होने का और दूसरा नये जनरल की नियुक्ति का।

इस मौके पर उसने अपने सब कप्तानों को बुलाया तो वह कप्तान भी आया जिसने उस राजकुमार की पत्नी को भगा लिया था। अब यह जनरल भी सोने के चाकू और काँटे कप्तान की जेब में रखना नहीं भूला और इस चोरी की वजह से कप्तान को जेल में डाल दिया गया।

जनरल उस कप्तान से पूछने गया — “तुम अकेले हो या शादीशुदा?”

कप्तान बोला — “जनरल साहब, अगर मैं सच कहूँ तो मैं शादीशुदा नहीं हूँ। मैं तो अकेला ही हूँ।”

“फिर वह स्त्री कौन है जो उस दिन तुम्हारे साथ थी?”

उसी पल दो सिपाही उस स्त्री को भी हथकड़ी पहना कर वहाँ ले आये जो उस कप्तान के साथ रह रही थी। वह आते ही चिल्लायी — “नहीं नहीं इस कप्तान ने तो मुझे मेरे महल से भगा लिया था। मैं तो आपको कभी भूली ही नहीं थी।”

पर उसकी ये सब बातें बेकार गयीं। जनरल ने उन दोनों को कीचड़ में लपेटने और फिर जला कर मार डालने का हुकुम दे दिया। कई बार अदालत में पेश होने के बाद वह पूरी सेना का जनरल कमान्डर घोषित कर दिया गया।



[1] The Captain and the General (Story No 179) - a folktale from Italy from its Province of Agrigento.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980

[2] Princess Teresina

[3] The then currency in Italy.

[4] Paris is the capital of France, a European country.

[5] Naples is a historical port city on the South-Western coast of Italy

[6] The then currency of Italy.

[7] Translated for the word “Son-in-Law”.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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