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देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 3 एक रानी और एक डाकू की शादी // सुषमा गुप्ता

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3 एक रानी और एक डाकू की शादी [1] ऐसा कहा जाता है कि एक राजा और एक रानी थे। उनके एक बेटी थी जो शादी के लायक थी। वे उसकी शादी करना चाहते थे। स...

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3 एक रानी और एक डाकू की शादी[1]

ऐसा कहा जाता है कि एक राजा और एक रानी थे। उनके एक बेटी थी जो शादी के लायक थी। वे उसकी शादी करना चाहते थे।

सो राजा ने सब राजाओं के लिये और कुलीन लोगों के लिये एक घोषणा करवा दी कि वे सब राज महल में आयें ताकि राजा उनमें से अपनी बेटी के लिये दुलहा चुन सके।

जो कोई भी राजकुमारी को सबसे पहले पसन्द आयेगा वही राजकुमारी का पति होगा। सो सभी राजमहल में इकठ्ठा हुए। पहले सभी राजा सामने से गुजरे, उसके बाद राजकुमार, उसके बाद कुलीन लोग और उसके बाद प्रोफेसर।

राजकुमारी को न तो कोई राजा पसन्द आया और न ही कोई राजकुमार। फिर कुलीन लोग आये पर राजकुमारी को उनमें से भी कोई पसन्द नहीं आया।

फिर प्रोफेसर आये तो उसने एक आदमी की तरफ इशारा करके बोली — “पिता जी मैं उस आदमी से शादी करना चाहती हूँ।” मालूम करने पर पता चला कि वह प्रोफेसर तो किसी बाहरी देश का था।

पर क्योंकि राजा ने वायदा किया था कि वह राजकुमारी की पसन्द के लड़के से उसकी शादी करेगा तो उसके पास सिवाय इसके अब कोई चारा नहीं था कि वह उस प्रोफेसर से अपनी बेटी की शादी कर दे।

सो राजा ने अपनी बेटी की शादी उस प्रोफेसर से कर दी। शादी के बाद दुलहा तुरन्त ही वहाँ से जाना चाहता था सो बेटी ने माता पिता को विदा कहा और पति पत्नी कुछ सेना के साथ वहाँ से चले गये।

आधा दिन चलने के बाद सिपाहियों ने दुलहे से कहा कि अब वे खाना खाना चाहते थे। पर दुलहे ने कहा — “यह कोई खाने का समय नहीं है।”

वे सब थोड़ी दूर और आगे चले तो सिपाहियों ने अपनी बात फिर से रखी कि वे खाना खाना चाहते थे पर दुलहे ने उनको फिर वही जवाब दिया — “यह कोई खाने का समय नहीं है।”

इस बात पर सिपाही लोग कुछ नाराज हो गये और बोले — “तो फिर आप और रानी अपने देश जायें जहाँ आपको जाना है और हम अपने घर जाते हैं।”

उस आदमी ने जवाब दिया — “तुम और तुम्हारे सिपाही लोग अपने रास्ते जा सकते हो।”

यह सुन कर सिपाही लोग वापस लौट गये और नया शादीशुदा जोड़ा अकेला ही अपने रास्ते पर आगे चलता रहा।

चलते चलते वे एक अकेली पथरीली जगह आये जो जंगली पेड़ों से ढकी हुई थी। दुलहा बोला — “हम लोग घर आ गये।”

राजकुमारी कुछ चिन्तित सी बोली — “पर यहाँ तो कोई घर ही दिखायी नहीं दे रहा हम रहेंगे कहाँ।”

दुलहे ने धरती पर एक डंडी तीन बार मारी और धरती में नीचे की तरफ एक दरवाजा खुल गया। वह बोला — “आओ अन्दर आओ। यही तुम्हारा घर है।”

“मुझे तो इसमें अन्दर जाते हुए डर लगता है।”

“तुम अन्दर चलो वरना मैं तुमको मार दूँगा।”

दुलहिन तो यह सुन कर बहुत डर गयी पर क्या करती डरते डरते वह बेचारी उसके अन्दर घुसी। अन्दर घुस कर उसने देखा कि वह गुफा तो मरे हुए लोगों से भरी हुई थी। कुछ उनमें जवान लोग थे कुछ बूढ़े और सबके मरे हुए शरीर एक दूसरे के ऊपर पड़े हुए थे।

दुलहे ने पूछा — “क्या तुम इनको देख रही हो? अब तुम्हारा काम यहाँ यह है कि तुम इनको हर एक को उठाओ और उनको दीवार के सहारे एक लाइन में खड़ा करो। हर रात मैं एक गाड़ी भर कर लाशें ले कर आऊँगा और उन सबको तुमको ऐसे ही रखना होगा।”

इस तरह उस राजकुमारी की शादी के बाद की ज़िन्दगी शुरू हुई। उसने मरे हुए आदमियों को उठाया और उनको दीवार के सहारे खड़ा कर दिया इससे वे कम जगह घेर रहे थे ताकि नये आने वाले शरीरों के लिये जगह खाली हो सके।

हर शाम उसका पति एक गाड़ी भर कर नयी लाशों को ले कर आता था और वह रोज उनको एक लाइन में खड़ा करके रखती थी।

उस राजकुमारी के लिये यह बहुत भारी काम था क्योंकि मरे हुए शरीर तो वैसे भी ज़्यादा भारी होते हैं। उसको इस तरह के शरीरों को उठाने की आदत नहीं थी।

इसके अलावा उसको उस गुफा से बाहर जाने का भी मौका नहीं मिलता था क्योंकि उसके उस गुफा में अन्दर आते ही उसका तो दरवाजा ही गायब हो चुका था।

clip_image002राजा की बेटी अपने घर से थोड़ा सा फर्नीचर ले कर आयी थी जिसमें एक पुरानी कई ड्रौअर वाली आलमारी थी जो उसको उसकी चाची ने भेंट में दी थी। उसकी वह चाची एक परी जैसी थी।

एक दिन उसने उस आलमारी की एक ड्रौअर खोली तो उसकी वह आलमारी बोली — “ओ महारानी, मैं आपकी क्या सेवा करूँ?”

तुरन्त ही उसके मुँह से निकला — “मैं यहाँ से बाहर निकलना चाहती हूँ और अपने घर जाना चाहती हूँ। मेहरबानी करके मेरी सहायता करो।”

clip_image004 इस पर एक सफेद फाख्ता[2] उस आलमारी में से बाहर निकली और बोली — “तुम अपने पिता को एक चिठ्ठी लिखो और उसको मेरी चोंच में लगा दो। मैं उसे उनके पास ले जाऊँगी।”

राजकुमारी ने एक चिठ्ठी अपने पिता के नाम लिखी जिसको वह सफेद फाख्ता उसके पिता के पास ले गयी और उसके पिता के जवाब का इन्तजार करने लगी।

राजा ने लिखा — “मेरी प्यारी बेटी, तुम तुरन्त ही यह पता लगाओ कि तुम उस गुफा से कैसे बाहर आ सकती हो। मुझ पर विश्वास रखो मैं तुम्हारी सहायता के लिये हमेशा तैयार हूँ।”

जब वह फाख्ता उस लड़की के पिता का जवाब ले कर उस लड़की के पास वापस आयी तो उसी शाम उसने यह इरादा किया कि वह अपने पति के साथ प्यार से ही रहेगी ताकि वह उसके भेद पता कर सके।

उसने अपने पति से कहा — “तुम्हें पता है कि आज मैंने क्या सपना देखा? मैंने देखा कि मैं यह गुफा छोड़ कर चली गयी हूँ।”

पति बोला — “हा हा हा। तुम तो इस गुफा में से सपने में भी बाहर नहीं निकल सकतीं।”

उसने बड़े सीधे से पूछा — “क्यों? ऐसा क्या है इस गुफा में?”

“सबसे पहले तो तुमको एक ऐसा आदमी चाहिये जो अपने समय से पहले पैदा हुआ हो जैसे मैं। मैं 7 महीने में पैदा हुआ था। फिर वह आदमी एक डंडी तीन बार चट्टान पर मारे तब यह गुफा खुलती है। तब कहीं जा कर तुम इस गुफा के बाहर निकल सकती हो।”

उस लड़की ने यह संदेश उस फाख्ता से अपने पिता को भिजवा दिया।

जैसे ही फाख्ता ने यह सन्देश उसके पिता को दिया कि कोई ऐसा आदमी चाहिये जो समय से पहले, जैसे 7 महीने में, पैदा हुआ हो। राजा ने अपने सब सिपाहियों को अपने सारे राज्य में कोई ऐसा आदमी ढूँढने के लिये भेज दिया जो 7 महीने के बाद और समय से पहले पैदा हुआ हो।

एक धोबिन बाहर कपड़े सुखा रही थी कि उसने बहुत सारे सिपाहियों के आने की आवाज सुनी। उसने सोचा ये लोग मेरे कपड़े चुरा कर ले जायेंगे सो उसने जल्दी से अपने कपड़े रस्सी से उतारने शुरू कर दिये।

सिपाही उसके पास आये और बोले — “डरो नहीं। हम तुम्हारे कपड़े चुराने नहीं आये हैं। हम किसी ऐसे आदमी की तलाश में हैं जो 7 महीने के बाद और समय से पहले पैदा हुआ हो। हमें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि वह कौन है। राजा को बस वह आदमी चाहिये।”

धोबिन बोली — “ओह असल में मेरे एक बेटा है जो अपने समय से पहले और 7 महीने के बाद ही पैदा हुआ था।”

कह कर वह घर के अन्दर गयी और अपने उस बेटे को उन सिपाहियों के लिये ले आयी। वह एक बहुत ही पतला दुबला नौजवान लड़का था।

सिपाही उसको ले कर राजा के पास चले। राजा उस लड़के को और अपने सिपाहियों को साथ ले कर राजकुमारी को आजाद कराने के लिये वहाँ पहुँच गया। उसने उस लड़के को पहले ही सब समझा दिया था कि उसको वहाँ जा कर क्या करना है।

उसने वहाँ पहुँच कर उस चट्टान को तीन बार एक डंडी से मारा तो उस गुफा का दरवाजा खुल गया। राजकुमारी वहाँ उन लोगों का इन्तजार ही कर रही थी। उन सबको वहाँ देख कर वह अपने पिता, उस नौजवान और सिपाहियों के साथ चल दी।

रास्ते में उन्होंने एक बागीचे में एक बुढ़िया को देखा तो उन्होंने उससे कहा — “अगर हमारे पीछे कोई हमको पूछता हुआ आये तो कह देना कि हम इधर से गये ही नहीं। ठीक?”

बुढ़िया बोली — “हुँह। तुमको रात को खाने में सूप बनाने के लिये बीन्स चाहिये?”

“ठीक। हमको तुम जैसा ही कोई चाहिये था।”

जब वह डाकू घर वापस आया तो उसने गुफा का दरवाजा खुला देखा और अपनी पत्नी को वहाँ न देख कर वह समझ गया कि उसकी पत्नी उसको धोखा दे कर वहाँ से भाग गयी है। वह भी तुरन्त ही वहाँ से भाग लिया और जल्दी ही उनके पीछे पीछे आ गया।

वह भी उस बुढ़िया के पास रुका और उससे पूछा — “क्या तुमने यहाँ से किसी स्त्री को सेना के साथ जाते देखा है?”

वह बोली — “हुँह। क्या तुम चाय के साथ मार्मलेड बना रहे हो?”

“क्या? मार्मलेड? और चाय के साथ? नहीं नहीं पर क्या तुमने एक 7 महीने का पैदा हुआ आदमी, एक राजा और उसकी बेटी को यहाँ से जाते हुए देखा है?”

clip_image008“अच्छा अच्छा। क्या तुमको एक पौंड पार्सले और बेसिल[3] चाहिये?”

“नहीं नहीं। क्या तुमने कोई राजा की बेटी सिपाहियों के साथ यहाँ से जाती देखी?”

“बेसिल भी नहीं और पार्सले भी नहीं। तो फिर नमकीन खीरे?”

डाकू ने तंग हो कर अपने कंधे उचकाये और आगे बढ़ गया।

बुढ़िया उसके पीछे से चिल्लायी — “पर जनाब आप नाराज क्यों हो गये। नमकीन खीरों का नाम किसने नहीं सुना?”

डाकू यह सब सुन कर तंग हो कर उस समय वहाँ से वापस चला गया।

बाद में अपने पिता के महल के पीछे की तरफ सुरक्षित जगह में राजकुमारी की शादी दोबारा हो गयी। इस बार उसकी शादी साइबेरिया[4] के राजा से हो गयी।

राजकुमारी का पहला पति जो डाकू था वह बाद में भी उसका पीछा करता रहा। पर फिर उसने उसको पकड़ने के लिये एक दूसरा ही जाल बिछाया। उसने एक साधु का वेश बनाया और अपनी एक तस्वीर बनवायी।

वह एक बड़ी तस्वीर थी। उसका चौखटा भी बहुत भारी था और तीन पेंचों[5] से जड़ा था और वह डाकू उसके अन्दर था जैसे कि वह एक साधु हो। और उस तस्वीर का शीशा भी बहुत मोटा था।

वह तस्वीर साइबेरिया के राजा के पास बेचने के लिये ले जायी गयी। जब उसने वह तस्वीर देखी तो वह उसको इतनी सुन्दर और ज़िन्दा लगी कि उसने उसे तुरन्त खरीद ली और उसको अपने बिस्तर के ऊपर टाँग ली।

जब उस कमरे में कोई नहीं था तो वह डाकू उस तस्वीर में से बाहर निकला और राजा के तकिये के नीचे एक जादुई कागज रख दिया।

जब रानी ने वह साधु की तस्वीर अपने पति के बिस्तर के ऊपर टँगी देखी तो वह उसको देख कर चौंक गयी क्योंकि उस साधु की शक्ल उसके पहले पति से बहुत मिलती जुलती थी।

पर राजा ने उससे कहा कि उसको किसी साधु की तस्वीर से डरने की कोई जरूरत नहीं थी।

उस रात को जब वे सो गये तो उस डाकू ने बाहर निकलने के लिये उस तस्वीर के दरवाजे का एक पेंच खोला। उस पेंच खोलने की अवाज से रानी की ऑख खुल गयी।

रानी ने राजा के शरीर में उँगली गड़ा कर उसको भी जगाया और उसको आवाज सुनने को कहा पर राजा की ऑख ही नहीं खुली। वह सोता ही रहा।

ऐसा इसलिये हुआ था क्योंकि उस डाकू ने उसके तकिये के नीचे वह जादुई कागज रख दिया था। उसी के ज़ोर से वह सोता रहा और उसकी ऑख नहीं खुली।

क्योंकि उस जादुई कागज की यह खासियत थी कि जिस किसी के तकिये के नीचे भी वह रखा रहता था वह बहुत गहरी नींद सो जाता था।

अब डाकू ने दूसरा पेंच खोला पर राजा फिर भी सोता ही रहा पर रानी के शरीर में से तो जैसे डर के मारे जान ही निकल गयी।

उसके बाद उस डाकू ने तीसरा पेच खोला और उस तस्वीर में से बाहर निकला और रानी से कहा — “अब मैं तुम्हारा गला काटूँगा इसलिये अब तुम अपना सिर तकिये पर मजबूती से रख लो।”

रानी ने अपना सिर तकिये पर ऊपर करने के लिये अपने पति का तकिया भी निकाल लिया। ऐसा करने में राजा के तकिये के नीचे रखा वह जादू का कागज नीचे गिर पड़ा और उसी समय राजा की ऑख खुल गयी।

उन दिनों में राजाओं के साथ यह सामान्य था कि वे हमेशा एक बिगुल अपने गले में पहन कर रखा करते थे सो यह राजा भी दिन रात अपने गले मे एक छोटा सा बिगुल लटका कर रखता था।

सो तुरन्त ही उसने अपना बिगुल बजाया जिससे तुरन्त ही उसके सिपाही वहाँ दौड़े चले आये। उन्होंने उस डाकू को तुरन्त ही मार डाला। सब काम तुरन्त ही हो गया।

राजा और रानी की जान बच गयी और डाकू मारा गया।


[1] The Marriage of a Queen and a Bandit (Story No 169) – a folktale from Italy from its Madonie area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino”. Translated by George Martin in 1980.

[This story shows that there was Swayamvar like custom in Italy.]

[2] Translated for the word “Dove”. See its picture above.

[3] Parsley is a herb like green coriander leaves and is a very popular herb to add to many Italian dishes. Basil is another name of Tualsee leaves, although it is not exactly like Indian Tulasee. It is also a very popuar herb to add to Italian dishes. See their pictures – Parsley is above and Basil is below.

[4] Siberia is the name of Northern-most part of Russia.

[5] Translated for the word “Screw”

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 3 एक रानी और एक डाकू की शादी // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 3 एक रानी और एक डाकू की शादी // सुषमा गुप्ता
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