रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु रचनाएँ आमंत्रित.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ http://www.rachanakar.org/2018/10/2019.html देखें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–9 : 15 आजा मेरे थैले में कूद जा[ // सुषमा गुप्ता

साझा करें:

15 आजा मेरे थैले में कूद जा [1] इस बात को बहुत साल हो गये जब निओलो [2] के बंजर पहाड़ों में एक पिता अपने 12 बेटों के साथ रहता था। एक बार वहाँ...

clip_image002

15 आजा मेरे थैले में कूद जा[1]

इस बात को बहुत साल हो गये जब निओलो[2] के बंजर पहाड़ों में एक पिता अपने 12 बेटों के साथ रहता था।

एक बार वहाँ अकाल पड़ा तो पिता ने बेटों से कहा — “बच्चों, मैं अब तुम्हें रोटी नहीं खिला सकता। तुम लोग अब बाहर जाओ जहाँ मुझे पूरा विश्वास है कि तुम बजाय घर के वहाँ ज़्यादा खुश रहोगे।”

यह सुन कर उसके 11 बड़े बेटे तो घर छोड़ कर जाने के लिये तैयार हो गये पर उसका बारहवाँ बेटा जो सबसे छोटा था और लँगड़ा था रोने लगा। वह बोला — “मुझ जैसा अपंग आदमी बाहर की दुनियाँ में निकल कर क्या कमायेगा पिता जी।”

पिता बोला — “बेटा, रो नहीं। तुम भी अपने भाइयों के साथ जाओ और जो ये लोग कमायेंगे उसी में से ये तुमको भी देंगे।”

सो उसके बारहों बेटों ने आपस में एक दूसरे से वायदा किया कि वे एक साथ रहेंगे और वे वहाँ से चले गये।

वे सारा दिन चलते रहे। फिर दूसरे दिन भी चलते रहे। पर छोटा वाला हमेशा ही अपने लँगड़ेपन की वजह से उनसे सबसे पीछे रह जाता था।

तीसरे दिन सबसे बड़े भाई ने कहा — “हमारा यह सबसे छोटा भाई फ्रान्सिस[3] हमेशा ही पीछे रह जाता है। यह अब हमारे लिये एक परेशानी है।

हम लोग आगे आगे चल कर इसको यहीं पीछे सड़क पर छोड़ देते हैं। यह इसके लिये भी अच्छा रहेगा क्योंकि हो सकता है कि कभी कहीं से इसको कोई दयालु मिल जाये और इस पर दया करके इसको अपने साथ ले जाये।”

यह सोच कर वे सब अपने छोटे भाई का इन्तजार किये बिना ही आगे चल दिये। वे बोनीफ़ेसियो[4] पहुँचने तक रास्ते में जो भी मिला उसी से भीख माँगते चले गये।

बोनीफ़ेसियो पहुँच कर उनको एक नाव बन्दरगाह पर लगी हुई दिखायी दे गयी। नाव देख कर सबसे बड़ा भाई बोला — “क्या हो अगर हम इस नाव पर चढ़ जायें और सारडीनिया[5] चले जायें। हो सकता है कि वहाँ हमारे शहर से कम ज़ोर का अकाल हो।”

सो वे सब भाई उस नाव में चढ़े और उन्होंने नाव खे दी। जब वे खाड़ी के बीच में पहुँचे तो वहाँ एक भयानक तूफान आ गया। उस तूफान में नाव के टुकड़े टुकड़े हो गये और ग्यारहों भाई समुद्र में डूब गये।

इस बीच छोटा अपंग फ्रान्सिस चलते चलते बहुत थक गया। और जब उसने अपने भाइयों को अपने आस पास नहीं देखा तो वह चिल्लाने लगा, रोने लगा और पागल सा हो गया।

लेकिन वह क्या करता वह वहीं सड़क के किनारे ही बैठ गया। वह चलते चलते थक गया था सो बैठते ही सो गया।

उस जगह की परी वहीं एक पेड़ पर बैठी थी। वह सब कुछ देख रही थी। जैसे ही फ्रान्सिस सो गया वह पेड़ से नीचे उतरी। उसने कुछ खास तरह के पत्ते इकठ्ठे किये, उनकी पुल्टिस बनायी और फ्रान्सिस की लँगड़ी टाँग पर लगा दिया। उसकी टाँग तुरन्त ही ठीक हो गयी।

फिर उसने एक गरीब बुढ़िया का रूप रख लिया और एक आग जलाने वाली लकड़ी के गठ्ठर पर बैठ गयी। वहाँ बैठ कर वह उसके जागने का इन्तजार करने लगी।

कुछ देर बाद फा्रन्सिस जागा तो लँगड़ाते हुए उठा पर उसने देखा कि वह तो अब लँगड़ा नहीं था वह तो अब और दूसरों की तरह से ठीक से चल सकता था। तभी उसकी निगाह लकड़ी के गठ्ठर पर बैठी एक बुढ़िया पर पड़ी।

उसने उससे पूछा — “मैम, क्या आपने यहाँ आस पास में किसी डाक्टर को देखा?”

“डाक्टर, तुम्हें डाक्टर क्यों चाहिये?”

“मैं उसको धन्यवाद देना चाहता हूँ। क्योंकि जब मैं सो रहा था तो जरूर ही यहाँ कोई बड़ा डाक्टर आया होगा जिसने मेरी लँगड़ी टाँग ठीक कर दी।”

यह सुन कर वह बुढ़िया बोली — “वह मैं थी जिसने तुम्हारी टाँग ठीक की। क्योंकि मैं ऐसे बहुत सारे पत्तों के बारे में जानती हूँ जिनसे लँगड़ी टाँग भी ठीक की जा सकती है।”

यह सुन कर फ्रान्सिस बहुत खुश हो गया और उसने बुढ़िया के गले में अपनी बाँहें डाल दीं और उसके दोनों गाल चूम लिये।

“मैं आपको किस तरह से धन्यवाद दूँ मैम? मैं आपका यह लकड़ी का गठ्ठर ले चलता हूँ।”

कह कर वह उस लकड़ी के गठ्ठर को उठाने के लिये नीचे झुका पर जब वह ऊपर उठा तो उसने देखा कि वहाँ पर तो कोई बुढ़िया नहीं थी बल्कि वहाँ तो एक बहुत ही सुन्दर लड़की खड़ी थी। उसने हीरे जवाहरात पहने हुए थे और उसके सफेद बाल उसके कन्धे पर से कमर तक आ रहे थे।

उसने गहरे नीले रंग की सुनहरे तारों से कढ़ाई की गयी पोशाक पहन रखी थी। उसके जूतों पर टखने की जगहों पर दो चमकीले कीमती पत्थर लगे हुए थे। फ्रान्सिस तो कुछ बोल ही नहीं सका और उस परी के पैरों पर पड़ गया।

परी बोली — “उठो फ्रान्सिस उठो। मुझे मालूम है कि तुम मुझे धन्यवाद देना चाहते हो। मैं तुम्हारी सहायता करूँगी। तुम कोई सी दो इच्छाएं मुझे बताओ मैं उनको तुरन्त ही पूरा क़र दूँगी। ध्यान रखना कि मैं क्रेनो झील की परियों की रानी[6] हूँ।

लड़के ने कुछ सोचा फिर बोला — “मुझे एक ऐसा थैला चाहिये जिसको जब भी मैं जिसके लिये भी कहूँ कि तू उसे खींच ले तो वह उसे खींच ले।”

“तुमको ऐसा थैला मिल जायेगा। अब तुम अपनी दूसरी इच्छा बताओ।”

लड़का बोला — “मुझे एक ऐसी डंडी चाहिये जो वही करे जो मैं उससे करने के लिये कहूँ।”

“तुमको ऐसी डंडी भी मिल जायेगी।” कह कर वह परी गायब हो गयी और फ्रान्सिस के पैरों के पास एक थैला और एक डंडी पड़े हुए थे।

खुश होते हुए फ्रान्सिस ने उन दोनों चीज़ों को जाँचना चाहा। उसको इस समय भूख लगी थी सो वह बोला “एक भुना हुआ तीतर[7] मेरे थैले में”। उसके यह कहते के साथ ही एक पूरा भुना हुआ तीतर उसके थैले में आ पड़ा।

“रोटी भी।” और एक डबल रोटी आ कर थैले में गिर पड़ी। और “एक बोतल शराब भी।” और एक बोतल शराब भी उसके थैले में आ गयी। इस तरह फ्रान्सिस ने बहुत दिनों बाद पेट भर कर स्वादिष्ट खाना खाया।

अगले दिन वह मरियाना[8] आ गया जहाँ कोरसिका[9] और कौन्टीनैन्ट के बहुत मशहूर जुआ खेलने वाले मिलने के लिये आये हुए थे।

अब फ्रान्सिस के पास तो कोई पैसा था नहीं सो उसने कहा “100 हजार क्राउन मेरे थैले में आ जाओ।” और उसका थैला 100 हजार क्राउन के सिक्कों से भर गया।

यह खबर तो सारे मरियाना में जंगली आग की तरह फैल गयी कि मरियाना में सैन्टो फ्रान्सैस्को[10] से एक बहुत ही अमीर राजकुमार आया है। उसके पास एक ऐसा थैला है जो पैसों से कभी खाली नहीं होता। उस समय शैतान खास करके मरियाना की तरफ था।

उसने एक बहुत सुन्दर नौजवान का रूप रखा हुआ था और वह ताश के खेल में सबको हरा रहा था और जब वे हार जाते थे और उनका पैसा खत्म हो जाता था तो वह उनकी आत्मा खरीद लेता था।

इस अमीर परदेसी के बारे में सुन कर जो वहाँ के लोगों में सैन्टो फ्रान्सैस्को के नाम से मशहूर हो गया था वह शैतान इसके पास भी आया और बोला — “ओ भले राजकुमार, मुझे अपनी बहादुरी के लिये माफ करना पर जुआ खेलने वाले की हैसियत से तुम इतने मशहूर हो चुके हो कि मैं तुम्हारे साथ जुआ खेलने से अपने आपको रोक नहीं सका।”

फ्रान्सिस बोला — “तुम मुझे शरमिन्दा कर रहे हो। सच तो यह है कि मैं तो ताश का कोई खेल खेलना जानता ही नहीं। मैंने तो कभी ताश के पत्ते भी अपने हाथ में नहीं पकड़े। फिर भी मुझे तुम्हारे साथ ताश खेल कर बड़ी खुशी होगी।

मैं केवल तुमसे खेल सीखने के लिये खेलूँगा। और मुझे यकीन है कि तुम जैसे गुरू के साथ खेल सीख कर मैं खेल में मास्टर हो जाऊँगा।”

शैतान को लगा कि उसका उस राजकुमार से मिलना सफल हो गया सो जब वह वहाँ से चला तो वह उसको विदा कहने के लिये नीचे झुका तो जानबूझ कर उसने अपनी टाँग आगे बढ़ा कर अपना आधा खुर[11] उस राजकुमार को दिखा दिया।

“ओह मेरे भगवान।” फ्रान्सिस ने अपने आपसे कहा — “तो यह तो शैतान खुद था जिसने मेरे पास आ कर मुझे इज़्ज़त दी। अच्छा है, अब वह अपने बराबर वाले से मिलेगा।”

जब वह अकेला रह गया तो उसने थैले से बढ़िया खाना लाने के लिये कहा।

अगले दिन वह कसीनो[12] पहुँचा तोे देखा कि एक जगह पर बहुत सारे लोग बैठे हुए हैं। फ्रान्सिस उनके बीच से उनको धक्का देता हुआ उस भीड़ के अन्दर घुस गया। वहाँ जा कर उसने क्या देखा कि एक नौजवान नीचे पड़ा हुआ है और उसकी छाती से खून बह रहा है।

एक आदमी बोला — “यह आदमी जुआरी था। इसने बेचारे ने जुए में अपना सारा पैसा खो दिया और फिर एक मिनट पहले ही इसने अपने सीने में छुरा भौंक लिया।”

वहाँ बैठे सारे जुआरियों के चेहरे उतरे हुए थे पर फ्रान्सिस ने देखा कि उन सब दुखी लोगों के बीच में एक आदमी मुस्कुरा रहा था। वह आदमी वह शैतान था जो फ्रान्सिस से मिलने आया था।

शैतान बोला — “जल्दी करो। इस बदकिस्मत आदमी को यहाँ से बाहर निकालो और खेल चालू रखो।”

कुछ लोग उस आदमी के शरीर को वहाँ से उठा कर बाहर ले गये और दूसरे लोगों ने खेलने के लिये फिर से ताश के पत्ते उठा लिये।

फ्रान्सिस जिसको ताश के पत्ते हाथ में पकड़ने तक नहीं आते थे उस दिन अपना सब कुछ हार गया। दूसरे दिन उसको खेल का कुछ पता चला पर फिर भी वह पहले दिन से ज़्यादा हार गया। पर तीसरे दिन वह खेल का मास्टर हो गया पर उस दिन तो वह इतना ज़्यादा हारा कि लोगों को लगा कि आज तो वह बरबाद ही हो गया।

पर कोई भी नुकसान उसके लिये ज़्यादा नहीं था और वह नुकसान उसको परेशान भी नहीं कर रहा था क्योंकि उसके पास तो उसका थैला था जिसमें से वह चाहे जितना पैसा निकाल सकता था।

पिछले तीन दिनों में वह इतना हार चुका था कि शैतान ने सोचा कि जरूर ही वह दुनियाँ का सबसे अमीर आदमी होगा तभी तो वह इतना हार चुका था और उसके माथे पर शिकन तक नहीं थी।

पर वह भी इस बात पर तुला हुआ था कि वह उसको कंगाल बना कर ही छोड़ेगा।

वह फ्रान्सिस को एक तरफ ले गया और उससे बोला — “ओे भले राजकुमार, मंै तुमको बता नहीं सकता कि मैं तुम्हारी इस बदकिस्मती पर कितना दुखी हूँ पर फिर भी मेरे पास तुम्हारे लिये एक खुशखबरी है। तुम मेरी बात को ध्यान से सुनोगे तो जितना तुमने खोया है उसमें से कम से कम आधा तो तुम वापस ले ही लोगे।”

फ्रान्सिस ने पूछा — “कैसे?”

शैतान ने इधर उधर देखा और उसके कान में फुसफुसाया — “तुम अपनी आत्मा मुझे बेच दो।”

फ्रान्सिस बोला — “आह, सो मेरे लिये तुम्हारी यह सलाह है ओ शैतान? चलो तो मेरे थैले में कूद जाओ।”

यह सुन कर शैतान ने वहाँ से भागने की कोशिश की पर वह उस थैले से तो बच नहीं सकता था। वह सिर के बल उस थैले में गिर पड़ा।

फ्रान्सिस ने थैला बन्द किया और अपनी डंडी से बोला — “अब इसकी अच्छी तरह से पिटायी करो।” बस उसकी डंडी ने शैतान की ज़ोर ज़ोर से पिटायी करनी शुरू कर दी।

शैतान का शरीर मरोड़ खाने लगा, वह चिल्लाने लगा, फ्रान्सिस को गालियाँ देने लगा — “मुझे इस थैले में से निकालो। इस डंडी को रोको। तुम तो मुझे मार ही डालोगे।”

“क्या सचमुच में? तुम यहीं मरोगे। बस वही तुम्हारे लिये सबसे बड़ा नुकसान होगा?” और वह डंडी उसको पीटती रही।

तीन घंटे की पिटायी के बाद फ्रान्सिस बोला — “आज के लिये तुम्हारे लिये बस इतना ही काफी है।”

शैतान ने बड़ी कमजोर आवाज में पूछा — “मुझे यहाँ से आजाद करने की तुम क्या कीमत लोगे?”

“तुम ध्यान से मेरी बात सुनो। अगर तुम अपनी आजादी चाहते हो तो तुम उन सब आत्माओं को छोड़ दो जिन्होंने तुम्हारी वजह से आत्महत्या की है।”

“ठीक है सौदा पक्का रहा।”

“तब बाहर आ जाओ। पर साथ में यह भी याद रखना कि अगर तुमने कुछ भी गड़बड़ी की तो मैं तुमको किसी भी समय जब भी मैं चाहूँ फिर से पकड़ सकता हूँ।”

शैतान तो अपने वायदे से वापस जाने की हिम्मत ही नहीं कर सकता था। वह तुरन्त ही जमीन के नीचे जा कर गायब हो गया और तुरन्त ही कुछ लोगों को ले कर बाहर आ गया। उन सबके चेहरे पीले पड़े हुए थे और उनकी आँखें बीमार जैसी लग रही थीं।

फ्रान्सिस उन लोगों से बोला — “दोस्तों, तुम लोगों ने अपने आपको जुआ खेल कर बरबाद कर लिया था और फिर तुम्हारे पास अपने आपको मारने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह गया था।

मैं तुम लोगों को इस बार तो वापस ले आया पर अगली बार शायद मैं ऐसा न कर सकूँ इसलिये तुम लोग मुझसे वायदा करो कि तुम लोग अब से जुआ नहीं खेलोगे।”

सब लोग एक आवाज में बोले — हाँ हाँ हम वायदा करते हैं कि हम आज से जुआ नहीं खेलेंगे।”

“बढ़िया। लो तुम सब लोग एक एक हजार क्राउन लो और शान्ति से अपने अपने घर जाओ और ईमानदारी से अपनी रोटी कमाओ खाओ।”

वे नौजवान खुश हो कर वहाँ से चले गये। कुछ के परिवार उनकी मौत पर रो रहे थे, कुछ लोग अपने माता पिता के बुरे कामों की वजह से उनकी मौत पर दुखी थे।

यह देख कर फ्रान्सिस को अपने बूढ़े पिता की याद आ गयी सो वह भी अपने गाँव चल दिया। रास्ते में उसको एक लड़का मिला जो बड़ी नाउम्मीदी में अपने हाथ मल रहा था।

फ्रान्सिस ने उससे पूछा — “क्या बात है नौजवान कैसे हो? क्या तुम ये दुखी चेहरे ही बेचते हो? एक दर्जन ऐसे चेहरे कितने के दोगे?”

लड़का बोला — “मैं हँस नहीं सकता। मैं क्या करूँ।”

“क्यों क्या बात है।”

लड़का बोला — “मेरे पिता एक लकड़हारे का काम करते हैं और वह अकेले ही परिवार का पालन पोषण करते हैं। आज सुबह वह एक चेस्टनट के पेड़ से गिर पड़े। इससे उनकी एक बाँह टूट गयी है।

मैं डाक्टर को बुलाने के लिये शहर दौड़ा गया पर क्योंकि हम गरीब हैं। मैं उसको पैसे नहीं दे सकता था सो उसने आने से मना कर दिया।”

“क्या इसी वजह से तुम दुखी हो रहे हो। शान्त हो जाओ। चलो मेरे साथ चलो मैं देखता हूँ।”

“क्या आप डाक्टर है?”

“नहीं मैं तो डाक्टर नहीं हूँ पर मैं उस डाक्टर को बुला सकता हूँ जिसने तुमको आने से मना कर दिया। क्या नाम है उस डाक्टर का?”

“डाक्टर पैनक्रेज़ियो[13]।”

“ठीक है। डाक्टर पैनक्रेज़ियो, आओ मेरे थैले में कूद जाओ।” उसी समय वह डाक्टर उसके थैले में अपने सब औजारों के साथ आ गया।

फिर फ्रान्सिस बोला — “ओ डंडी अपनी पूरी ताकत के साथ इसको पीटो।” बस उस डंडी ने उस डाक्टर को अपनी पूरी ताकत के साथ पीटना शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद फ्रान्सिस ने उस डाक्टर से पूछा — “क्या तुम इस लड़के के पिता का इलाज बिना कोई पैसा लिये करोगे?”

“जो भी आप कहें।”

“तो ठीक है थैले से बाहर आ जाओ।” बाहर आते ही डाक्टर उस लकड़हारे के घर की तरफ भाग गया।

फ्रान्सिस फिर अपने रास्ते चल दिया और कुछ ही दिनों में अपने गाँव आ पहुँचा। वहाँ तो अब पहले से भी ज़्यादा लोग भूखे मर रहे थे।

वह अपने थैले से बार बार कहता रहा — “भुना हुआ मुर्गा और शराब की बोतल थैले में कूद जा।”

फ्रान्सिस ने उस थैले से गाँव के सब लोगों को खूब खाना खिलाया और सब लोगों ने बहुत दिन बाद बिना पैसे के इतना स्वादिष्ट खाना खाया।

वह यह सब उन लोगों के लिये तब तक करता रहा जब तक वहाँ अकाल चला। जब वहाँ की दशा कुछ सुधर गयी तब उसने वह सब बन्द कर दिया क्योंकि इससे लोगों का आलसीपन बढ़ता था।

X X X X X X X

पर क्या तुम सोचते हो कि वह खुश था? नहीं। वह अपने 11 भाइयों की कोई खबर न मिलने पर बहुत दुखी था। वह बहुत दिनों से उनको भूला हुआ था क्योंकि वे उसको उस अपंग हालत में अकेला छोड़ कर भाग गये थे।

फिर उसने उनको बुलाने की कोशिश की — “भाई जौन आ मेरे थैले में कूद जा।”

उसके यह कहते ही उसके थैले में कुछ हिला। फ्रान्सिस ने उसको खोला तो उसमें उसको हड्डियों का एक ढेर मिला।

फिर वह बोला — “भाई पौल आ मेरे थैले में कूद जा।” फिर एक और हड्डियों का ढेर थैले में आ पड़ा।

इस तरह उसने अपने ग्यारहों भाइयों के नाम ले ले कर उनको अपने थैले में बुलाया पर हर बार एक हड्डियों का ढेर उस थैले में आ कर गिर जाता। अब उसको कोई शक नहीं था कि उसके सारे भाई एक साथ ही मर गये थे।

यह देख कर फ्रान्सिस बहुत दुखी था। उसका पिता भी उसको अकेला छोड़ कर मर गया था। अब बूढ़े होने की उसकी बारी थी।

अब उसकी बस एक ही आखिरी इच्छा थी कि वह क्रेनो झील की परियों की रानी को एक बार फिर से देख ले जिसने उसको इतना अमीर बनाया था।

सो वह उसी जगह चल दिया जहाँ वह उसको पहली बार मिला था। वह वहाँ इन्तजार करता रहा करता रहा पर वह परी नहीं आयी।

वह बड़ी प्रार्थना भरी आवाज में बोला — “कहाँ हो तुम ओ परियों की रानी। मेहरबानी करके तुम एक बार मेरे सामने और आओ। मैं तुमको फिर से देखे बिना तो मर भी नहीं सकता।”

रात होने लगी थी और परी के आने का उसको कोई संकेत भी दिखायी नही दे रहा था बल्कि उसने देखा कि परी की जगह तो उसके सामने से उसकी मौत चली आ रही थी।

उसके एक हाथ में काला झंडा था और दूसरे हाथ में उसका हल जैसा पेड़ काटने वाला एक औजार था।

वह फ्रान्सिस के पास आयी और बोली — “ओ बूढ़े, क्या तुम अपनी ज़िन्दगी से थक नहीं गये हो? क्या तुम पहाड़ों पर काफी नहीं चढ़ लिये हो? क्या तुमने दुनियाँ के सारे काम काफी नहीं कर लिये हैं और क्या तुम अब मेरे साथ आने के लिये तैयार नहीं हो?”

बूढ़े फ्रान्सिस ने कहा — “ओ मौत। भगवान तुमको बनाये रखे। तुम ठीक कहती हो। मैने दुनियाँ में बहुत कुछ देख लिया बल्कि हर चीज़ देख ली है। मैं सब चीज़ों से सन्तुष्ट हो गया हूँ पर तुम्हारे साथ आने से पहले मैं किसी को विदा कहना चाहता हूँ। मेहरबानी करके मुझे एक दिन की मोहलत और दो।”

“अगर तुम किसी नास्तिक की तरह से मरना नहीं चाहते तो तुम अपनी प्रार्थना कर लो और फिर जल्दी से मेरे पीछे पीछे आ जाओ।”

“मेहरबानी करके सुबह जब तक मुर्गा बोलता है मुझे तब तक की मोहलत दे दो।”

“नहीं।”

“अच्छा तो एक घंटा और, बस।”

“एक मिनट भी ज़्यादा नहीं।”

फ्रान्सिस बोला — “क्योंकि तुम इतनी बेरहम हो तो आओ मेरे थैले में कूद जाओ।”

मौत डर के मारे काँप गयी। उसकी सारी हड्डियाँ चरचरा उठीं और वह फ्रान्सिस के थैले में जा कर गिर पड़ी।

उसी समय वह क्रेनो झील की परियों की रानी वहाँ प्रगट हो गयी। वह अभी भी उतनी ही शानदार लग रही थी जितनी वह तब लग रही थी जब वह उसको पहली बार मिली थी।

फ्रान्सिस बोला — “मैं तुम्हारा बहुत कृतज्ञ हूँ ओ परियों की रानी।”

फिर वह मौत से बोला — “मेरा काम हो गया अब तुम मेरे थैले में से बाहर निकल जाओ और मुझे ले चलो।”

परी बोली — “फ्रान्सिस तुमने कभी भी अपनी उन ताकतों का गलत इस्तेमाल नहीं किया जो मैंने तुमको दी थीं। तुमने हमेशा ही अपने थैले और डंडी का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया। अगर तुम मुझे अपनी कोई इच्छा बताओ तो इस समय मैं तुम्हारी वह इच्छा भी पूरी करूँगी।”

फ्रान्सिस बोला — “नहीं, अब मेरी कोई इच्छा नहीं है।”

“क्या तुम सरदार बनना चाहते हो?”

“नहीं।”

“क्या तुम राजा बनना चाहते हो?”

“नहीं, मुझे कुछ नहीं चाहिये।”

परी ने फिर पूछा — “अब क्योंकि तुम बूढ़े हो गये हो क्या तुम को तन्दुरुस्ती और जवानी चाहिये?”

“अब मैंने तुमको देख लिया है तो अब मैं शान्ति से मरने के लिये तैयार हूँ।”

“अच्छा विदा फ्रान्सिस। पर मरने से पहले यह थैला और यह डंडी जला दो।” और यह कह कर परी गायब हो गयी।

फ्रान्सिस ने एक बड़ी सी आग जलायी। कुछ देर के लिये अपने शरीर को गरम किया और अपना थैला और डंडी उस आग में फेंक दी ताकि उनका कोई गलत इस्तेमाल न कर सके।

अब तक मौत एक झाड़ी के पीछे छिपी हुई खड़ी थी। सुबह हो गयी थी। मुर्गा चिल्लाया — “कुँकड़ू कू।” पर फ्रान्सिस उसकी आवाज नहीं सुन सका क्योंकि मौत ने उसको बहरा कर दिया था।

मौत बोली — “देखो मुर्गा बोल रहा है।”

कह कर उसने अपने औजार से उसको मारा और उसके मरे हुए शरीर को अपने साथ ले कर वहाँ से चली गयी।

clip_image004

देश विदेश की लोक कथाओं की सीरीज़ में प्रकाशित पुस्तकें

36 पुस्तकें www.Scribd.com/Sushma_gupta_1 पर उपलब्ध हैं।

नीचे लिखी हुई पुस्तकें हिन्दी ब्रेल में संसार भर में उन सबको निःशुल्क उपलब्ध है जो हिन्दी ब्रेल पढ़ सकते हैं।

Write to :- E-Mail : hindifolktales@gmail.com

1 नाइजीरिया की लोक कथाएं–1

2 नाइजीरिया की लोक कथाएं–2

3 इथियोपिया की लोक कथाएं–1

4 रैवन की लोक कथाएं–1

नीचे लिखी हुई पुस्तकें ई–मीडियम पर सोसायटी औफ फौकलोर, लन्दन, यू के, के पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।

Write to :- E-Mail : thefolkloresociety@gmail.com

1 ज़ंज़ीबार की लोक कथाएं — 10 लोक कथाएं — सामान्य छापा, मोटा छापा दोनों में उपलब्ध

2 इथियोपिया की लोक कथाएं–1 — 45 लोक कथाएं — सामान्य छापा, मोटा छापा दोनों में उपलब्ध

नीचे लिखी हुई पुस्तकें हार्ड कापी में बाजार में उपलब्ध हैं।

To obtain them write to :- E-Mail drsapnag@yahoo.com

1 रैवन की लोक कथाएं–1 — इन्द्रा पब्लिशिंग हाउस

2 इथियोपिया की लोक कथाएं–1 — प्रभात प्रकाशन

3 इथियोपिया की लोक कथाएं–2 — प्रभात प्रकाशन

नीचे लिखी पुस्तकें रचनाकार डाट आर्ग पर मुफ्त उपलब्ध हैं जो टैक्स्ट टू स्पीच टैकनोलोजी के द्वारा दृष्टिबाधित लोगों द्वारा भी पढ़ी जा सकती हैं।

1 इथियोपिया की लोक कथाएं–1

http://www.rachanakar.org/2017/08/1-27.html

2 इथियोपिया की लोक कथाएं–2

http://www.rachanakar.org/2017/08/2-1.html

3 रैवन की लोक कथाएं–1

http://www.rachanakar.org/2017/09/1-1.html

4 रैवन की लोक कथाएं–2

http://www.rachanakar.org/2017/09/2-1.html

5 रैवन की लोक कथाएं–3

http://www.rachanakar.org/2017/09/3-1-1.html

6 इटली की लोक कथाएं–1

http://www.rachanakar.org/2017/09/1-1_30.html

7 इटली की लोक कथाएं–2

http://www.rachanakar.org/2017/10/2-1.html

8 इटली की लोक कथाएं–3

http://www.rachanakar.org/2017/10/3-1.html

9 इटली की लोक कथाएं–4

http://www.rachanakar.org/2017/10/4-1.html

10 इटली की लोक कथाएं–5

http://www.rachanakar.org/2017/10/5-1-italy-lokkatha-5-seb-wali-ladki.html

11 इटली की लोक कथाएं–6

http://www.rachanakar.org/2017/11/6-1-italy-ki-lokkatha-billiyan.html

12 इटली की लोक कथाएं–7

नीचे लिखी पुस्तकें जुगरनौट डाट इन पर उपलब्ध हैं

1 सोने की लीद करने वाला घोड़ा और अन्य अफ्रीकी लोक कथाएं

https://www.juggernaut.in/books/8f02d00bf78a4a1dac9663c2a9449940

2 असन्तुष्ट लड़की और अन्य अमेरिकी लोक कथाएं

https://www.juggernaut.in/books/2b858afc522c4016809e1e7f2f4ecb81

Facebook Group

https://www.facebook.com/groups/hindifolktales/?ref=bookmarks

Updated on Sep 27, 2017


लेखिका के बारे में

clip_image006सुषमा गुप्ता का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में सन् 1943 में हुआ था। इन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र और अर्थ शास्त्र में ऐम ए किया और फिर मेरठ विश्वविद्यालय से बी ऐड किया। 1976 में ये नाइजीरिया चली गयीं। वहाँ इन्होंने यूनिवर्सिटी औफ़ इबादान से लाइबे्ररी साइन्स में ऐम ऐल ऐस किया और एक थियोलोजीकल कौलिज में 10 वर्षों तक लाइब्रेरियन का कार्य किया।

वहाँ से फिर ये इथियोपिया चली गयीं और वहाँ एडिस अबाबा यूनिवर्सिटी के इन्स्टीट्यूट औफ़ इथियोपियन स्टडीज़ की लाइब्रेरी में 3 साल कार्य किया। तत्पश्चात इनको दक्षिणी अफ्रीका के एक देश. लिसोठो के विश्वविद्यालय में इन्स्टीट्यूट औफ़ सदर्न अफ्रीकन स्टडीज़ में 1 साल कार्य करने का अवसर मिला। वहाँ से 1993 में ये यू ऐस ए आ गयीं जहाँ इन्होंने फिर से मास्टर औफ़ लाइब्रेरी एंड इनफौर्मेशन साइन्स किया। फिर 4 साल ओटोमोटिव इन्डस्ट्री एक्शन ग्रुप के पुस्तकालय में कार्य किया।

1998 में इन्होंने सेवा निवृत्ति ले ली और अपनी एक वेब साइट बनायी – www.sushmajee.com। तब से ये उसी वेब साइट पर काम कर रहीं हैं। उस वेब साइट में हिन्दू धर्म के साथ साथ बच्चों के लिये भी काफी सामग्री है।

भिन्न भ्िान्न देशों में रहने से इनको अपने कार्यकाल में वहाँ की बहुत सारी लोक कथाओं को जानने का अवसर मिला – कुछ पढ़ने से, कुछ लोगों से सुनने से और कुछ ऐसे साधनों से जो केवल इन्हीं को उपलब्ध थे। उन सबको देख कर इनको ऐसा लगा कि ये लोक कथाएं हिन्दी जानने वाले बच्चों और हिन्दी में रिसर्च करने वालों को तो कभी उपलब्ध ही नहीं हो पायेंगी – हिन्दी की तो बात ही अलग है अंग्रेजी में भी नहीं मिल पायेंगीं।

इसलिये इन्होंने न्यूनतम हिन्दी पढ़ने वालों को ध्यान में रखते हुए उन लोक कथाओं को हिन्दी में लिखना पा्ररम्भ किया। इन लोक कथाओं में अफ्रीका, एशिया और दक्षिणी अमेरिका के देशों की लोक कथाओं पर अधिक ध्यान दिया गया है पर उत्तरी अमेरिका और यूरोप के देशों की भी कुछ लोक कथाएं सम्मिलित कर ली गयी हैं।

अभी तक 1200 से अधिक लोक कथाएं हिन्दी में लिखी जा चुकी है। इनको “देश विदेश की लोक कथाएं” क्रम में प्रकाशित करने का प्रयास किया जा रहा है। आशा है कि इस प्रकाशन के माध्यम से हम इन लोक कथाओं को जन जन तक पहुँचा सकेंगे।

विंडसर, कैनेडा

मई 2016


[1] Jump into My Sack (Story No 200) – a folktale from Italy from its Corsica area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Niolo – name of a place in Italy

[3] Francis – name of the 12th and the youngest brother

[4] Bonifacio – name of a plce in Italy

[5] Sardinia – name of a place in Italy

[6] Queen of the Fairies of Lake Creno

[7] Translated for the word “Partridge”. See its picture above.

[8] Mariana – name of a place in Italy

[9] Corsica – name of a place in Italy

[10] Santo Francesco – name of a place and the name of Francisco too, Francis got famous in Mariana town

[11] Translated for the word “Cloven Hoof”. It seems that is the mark of a Satan in Italy.

[12] Casino where people go for gambling

[13] Pancrazio – name of the Doctor

------------

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(समाप्त)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3844,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2788,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,17,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,838,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,8,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1923,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,649,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,56,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–9 : 15 आजा मेरे थैले में कूद जा[ // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–9 : 15 आजा मेरे थैले में कूद जा[ // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-_94_SM4E760/WjodEUSbL8I/AAAAAAAA9cQ/y1nlBOlX118NECuMkSHK_w7HdwUDX7aWgCHMYCw/clip_image002_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-_94_SM4E760/WjodEUSbL8I/AAAAAAAA9cQ/y1nlBOlX118NECuMkSHK_w7HdwUDX7aWgCHMYCw/s72-c/clip_image002_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2017/12/9-15-italy-ki-lok-katha-aaja-thaile-me.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2017/12/9-15-italy-ki-lok-katha-aaja-thaile-me.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ