सोमवार, 25 दिसंबर 2017

व्यंग्य // राजाजी से कुछ तो सीखिये माल्याजी! // धीरेन्द्र शुक्ल

आदरणीय माल्याजी, मुझे आपसे इतनी सहानुभूति है,आपके प्रति मन में इस कदर सम्मान है जितना उन बैंक अधिकारियों और नेताओं के मन में भी नहीं होगा जिनकी मिलीभगत से आप बैंकों के नौ हजार करोड़ रुपये बिना डकारे ही हजम कर गए। लोग आपके बारे में चाहे जो कहें पर मैं और मेरे जैसे खुले दिमाग के लोगों के लिए आप हमेशा प्रेरणा स़्त्रोत रहे हैं और रहेंगे,इसलिए हम चाहते हैं कि आप जल्द से जल्द भारत आ जाएं और एक बार फिर यहां के मीडिया में पूरी तरह छा जाएं,आपने अभी तक जो कुछ किया है वह अतीत की बात हो चुकी है अब समय है कि आप आएं और अपने परम पराक्रम से एक नया इतिहास लिख डालें। दरअसल आपके प्रति मेरे मन में प्रेम की जो हिलोर या कह लें कि सुनामी उठ रही है उसके बड़े कारण हैं। आप जानते हैं कि गुरुवार को यूपीए सरकार में टेलीकाम मिनिस्टर रहे ए राजा एंड कंपनी पर फैसला आया है।

  इसके बाद यूपीए सरकार में मंत्री रहे सारे नेता ए राजा के प्रति इतने सम्मान से भर गए हैं कि उन्हें राजा के नाम के अगले हिस्से ए कहने से भी परहेज हो गया है और वे राजा को एजी राजाजी कहकर बुला रहे हैं। उनकी पूरी फौज है जो राजाजी के सामने खड़ी है और उनके बारे में उठने वाली हर शंका का,सवाल का आक्रामक होकर जवाब दे रही है। आज ऐसा लग रहा है कि ए राजा जैसा समर्पित देशप्रेमी,ईमानदार कोई नहीं है जिसके पास अपनी ईमानदारी का प्रमाणपत्र भी है। देश के पत्रकारों को देखिये! वे किस तरह अपना सा मुंह लेकर घूम रहे हैं। आज तक प्रचारित करते रहे कि यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है जिसमें करीब पौने दो लाख करोड़ रुपयों की घपलेबाजी हुई पर कोई इसे सिद्ध ही नहीं कर पाया और यूपीए के महाज्ञानी मंत्री कपिल सिब्बल ने इसे जयघोष वाले अंदाज में कहा कि एक फूटी कौडी तक यहां से वहां नहीं हुई सब जबरन चिल्ला रहे हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि सिर्फ पौने दो लाख करोड़ के घपलों के आरोपों से घिरे राजाजी और उनके महाज्ञानी सहयोगी आने वाले दिनों में देश के सारे अखबारों पर और हर तरह के मीडियाकर्मियों पर मानहानि का न सिर्फ मुकदमा कर दें बल्कि जीत भी जाएं! सोचिये फिर क्या होगा। इसलिए आदरणीय माल्याजी आपसे कह रहा हूं कि वक्त की नजाकत को पहचानिये! आ जाइये भारत में। राजाजी से प्रेरणा लीजिये! पौने दो लाख करोड़ के घोटाले का आरोप उन पर लगा,सारा देश सात साल से राजा-राजा कहकर जब तक छाती पीटता रहा पर उन पर कोई असर हुआ? वे देश से भागे? नहीं,नहीं भागे,उन्होंने बहादुरी की नई मिसाल पेश की और छाती ठोंककर मुकदमा लडा और जीता।

माफ कीजिये लेकिन आपका घोर शुभचिंतक होने के बावजूद आपके साथ थोडा तल्खी से कहना पड रहा है कि आप खुद को समझते क्या हैं? क्या आपको ऐसा लगता है कि इस देश में आपसे बड़ा कोई घोटालेबाज नहीं हुआ। राजाजी तो हैं ही,पर कांग्रेस की महान विभूति सुरेश कलमाड़ी जी को भूल गए आप? राष्टþमंडल खेलों के आयोजन में उन्होंने भी करीब 76 हजार करोड़ अपने चमत्कारी व्यक्तित्व से गायब कर दिए थे,इसके बाद भी कांग्रेस ने उन्हें संसदीय समिति का अध्यक्ष बना दिया था। आज कोई उनका नाम जानता है,नहीं! नहीं जानता। अब सोचिये! कहां राजाजी,कलमाड़ी जी और कहां आप? है इनके सामने आपकी कोई हैसियत? सिर्फ नौ हजार करोड़ पर छोटा-मोटा हाथ साफ कर आप यहां से वहां दर-दर मारे-मारे घूम रहे हैं! सोचिये! अपने मैनेजमेंट के बारे में सोचिये! आखिर कहां चूक हुई कि इतनी सी रकम खर्च करने पर आपका पूरा वजूद ही यहां से वहां हो गया? ऐसा क्यों? राजनीति में अपने शुभचिंतकों के संपर्क में तो आप होंगे ही,बैंक और दीगर विभाग के अधिकारी भी संपर्क में होंगे तो उनके साथ जरा सार्थक विचार-विमर्श कीजिये और हां एक बार अपने फैसलों पर भी जरूर गौर कीजिये कि कहां चूक हुई। आपको तो इतना भी याद नहीं कि यूपीए सरकार में योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे मोंटेकसिंह अहलूवालिया ने रियलस्टेट और बीमा सेक्टर में हुए करीब पौने दो करोड़ लाख के घोटाले पर कहा था कि यह तो छोटा-मोटा घोटाला है! और एक आप हैं कि अपने आपको ही सबसे बड़ा तीस मारखां समझ रहे हैं। अगर ऐसे ही हालात रहे तो एक दिन ऐसा आएगा कि आप खुद कहेंगे कि मैं बिना शर्त भारत आकर समर्पण करना चाहता हूं तब भी आपको कोई सीरियसली नहीं लेगा। अरे लाखों करोडों वालों से फुरसत मिलेगी तभी तो आप पर ध्यान दिया जाएगा!

खैर! एक बात और कहना चाहता हूं। आपतो इतने बहादुर रहे हैं कि एक समय आपसे ज्यादा बहादुर कोई नहीं था। कहां लगते हैं राजाजी वगैरह आपके सामने। शायद इसी बहादुरी में तो आप विदेश से टीपू सुल्तान की तलवार भी खरीद लाए थे,कहां है वह तलवार? जहां भी हो उसे प्रणाम कीजिये और लौट आइये वापस। लोगों की,मीडिया-वीडिया की चिल्लाहट पर ध्यान मत दीजिये।रही बात जेलों की तो जेलें उतनी खराब भी नहीं हैं जितनी आप समझ रहे हैं। अरे,राजाजी तो हो ही आए हैं कई कार्पोरेट दिग्गज भी साल-साल गुजार चुके हैं। कई साधुओं को तो इनका एकांत इतना भा गया है कि वे चार-चार साल से वहीं साधना कर रहे हैं और उनसे प्रेरित होकर कई दूसरे साधु भी वहां प्रचुर मात्रा में पहुंच रहे हैं। आपने भोग-विलास तो बहुत किया अब इसके नए-नए पैंतरे और गुर भी हो सकता है आपको इन बाबाओं से सीखनें मिल जाएं,इस पर भी तो गौर कीजिये।यानि ये तो वही बात हो गई कि एक पंथ दो काज या आपकी व्यापारिक भाषा में कहें तो बाय वन गेट वन फ्री!

अंत में आपसे विनम्रतापूर्वक इतना ही कहना चाहता हूं कि आपका विकट प्रशंसक होने के नाते जितनी सकारात्मक बातें कहकर मैं आपको प्रोत्साहित कर सकता था वे सब बातें मैनें की हैं आगे आप खुद इतने समझदार है कि आपकी समझ के आगे मैं और मेरे जैसे करोडों देशवासी मूर्ख ही साबित होंगे। आशा है अपना भलाबुरा समझते हुए आप सही समय में घर वापसी का फैसला करेंगे,बस देखना कि कहीं देर न हो जाए------।

rachanakar no image

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