निर्मल गीत // धर्मेंद्र निर्मल

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निर्मल गीत 


1
बनके हुनरमंद
जीयो सफल जीवन
अपनाओ साथी
शहरी आजीविका मिशन

जिनके हाथों में होगी कोई कला
वो मरेगा आखिर भूखा क्यों भला
कौशल ही लाता है हममें हौसला

बढ़ो बढ़ो बढ़ो रे साथी
चूमों तरक्की के कदम


मन मुताबिक लो प्रशिक्षण करो जॉब
हो जाएंगे पूरे प्यारे सारे ख्वाब
आयेंगी रौनक में रवानी अपने आप
खुशियां खुद पूछेगी क्या चाहिए जनाब

बहती गंगा मे नहा लो
महको रे बनके सुमन

स्व सहायता समूह बना लो
बैंकों में खाता खुलवा लो
छः महीने बचत जमा करो
रिन लेकर जरूरतें पूरा करो

क्षमता विकास के लिए बैंक
देगा फिर भैया धन


2.
हम भी उड़ेंगे आसमान में
हम भी उड़ेंगे
अपने भी सपनों को
प्यारे पंख लगेंगे

मन में अगर हो
  हौसला तो
सच्चा हो कोई
फैसला तो
अड़चनें सारी दुनिया की
बढ़ते कदम न रोक सकेंगे। ...........


करके मनचाहा
व्यवसाय
बढ़ा सकेंगे
  अपनी आय
खुशियां हमसे फिर पूछेंगी
बोलिए सर क्या लेंगे।....


समूह बनाकर
बचत करेंगे
पड़ी जरूरत
करजा लेंगे
अपनी मेहनत से हम अपना
एक नया संसार रचेंगे।....................


लेके प्रशिक्षण
काम सीखेंगे
अपना धंधा
स्वयं करेंगे
बेरोजगार कोई न होगा
आत्मनिर्भर हम भी रहेंगे।................


विकास होगा
खुशहाल होंगे
हम भी अब
  मालामाल होंगे
देश करेगा तरक्की अपना
सर उठाकर हम भी जीयेंगे।.....................


3.
हो हइया हो हो हो रे हो हइया
नहीं थमेगा ,
  नहीं रूकेगा
चलता रहेगा अपना पहिया

नहीं करेंगे ,
जी हुजूरी
अब तो करेंगे ,
मेहनत पूरी
सुनो , समझो , गुनो रे भैया


छोड़ो न आशा,
  दीप जलाओ
हाथ मिलाओ,
कदम बढ़ाओ
जगमगाएं अपनी दुनिया

काम अपना ,
  दुकान अपनी
अपना जीवन ,
शान अपनी
बच कहाँ जाएगी खुशियां


4.
झिलमिल झिलमिल
चमकें जैसे नीलगगन में तारे हैं
आजकल हमारे भी तो
वैसे ही नजारे हैं


गलियां सड़कें ऐसे चमकें
मोती की ज्यों माला हो
स्वच्छ रहेगा कोना कोना
धरती गाए गाना हो
गुनगुन गुनगुन ................


स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ रहेंगे
जीवन में खुशहाली होगी
देश करेगा तरक्की अपना
हम आगे और पीछे होगी
मंजिल मंजिल ......


योगदान अपना भी होगा
स्वच्छता अभियान में
घर घर जाकर बतलायेंगे
स्वच्छता के फायदे
हरदम हर दिन ....................


सबने मिलके देखे सपने
सबने मिलकर ठाना है
अपने स्वच्छ भारत को जग में
सुन्दर सा चमकाना  है
मिल जुल मिल जुल....................


5.

हो गई शुरू
उल्टी गिनती हाँ जी हाँ...हो गई शुरू
आत्मनिर्भर दृढ़-संकल्पित
भारत रहेगा जगतगुरू

होकर राष्ट्र सशक्त अर्थ में
प्रगति का सोपान चढ़ेगा
विश्वपटल पर नए युग का
नवभारत शंखनाद करेगा
राष्ट्रप्रेम के सुमन से शोभित
हो जन गण मन कल्पतरू

प्रजातंत्र में अर्थतंत्र ही
मूलमंत्र मजबूती का
भाईचारा एकता में
स्त्रोत निहित है शक्ति का
भारत भ्रष्टाचार मुक्त हो
जन मन में यह भाव भरूँ

हर नागरिक कर्तव्यनिष्ठ हो
राष्ट्रहित हो सर्वोपरि
आओ ले संकल्प
रहे न भ्रष्ट न भ्रष्टाचारी
काले धन काले मन वालों
की न बचेगी आबरू



6.
चंदा तारे तरसे सारे
करते इशारे
देखो ......ऽ..ऽ.. धरती के वासियों को
ओहो -   कितने अच्छे
             कितने प्यारे
चेहरा चेहरा चमक रहा है
कोना कोना दमक रहा है
भरा हौसलों से हर मन है
हुनर दौड़ने ललक रहा है
देखो ......ऽ..ऽ.. बहती विकास की लहरे


जीवन स्तर सबका मस्त है
पिछड़ापन अब बैठा पस्त है
बेरोजगार नहीं है कोई
सब अपने धंधे में मस्त है
देखो ......ऽ..ऽ.. लेने प्रशिक्षण की कतारें



समूह बनाकर काम कर रहे
बचत और इंतजाम कर रहे
लहरा रहा तिरंगा जग में
देश का रोशन नाम कर रहे
देखो ......ऽ..ऽ.. खुशियों के फैले है नजारे


सबका बराबर योगदान है
सबकी अपनी अपनी शान है
हर एक हाथ में आज है हुनर
कौशल विकास का अभियान है
देखो ......ऽ..ऽ.. जीवन में आयी है बहारें


7.
सीन इण्डिया
क्लीन इण्डिया
सोने की चिड़िया
देखो देखो जहाँ जहाँ वहाँ वहाँ
साफ सुथरा लगे
  जैसे कोई गुड़िया

एकता का परिचय दिया है सबने ठानकर
स्वच्छता से ही है भलाई चलते है मानकर

गंदगी के लिए कहीं अब जगह नहीं है
हम हो न नं. 1 इसकी कोई वजह नहीं है

छोटा ही सही पर सबका शौचालय है अपना
यही तो है बापू के स्वच्छ भारत का सपना

गीला कचरा चला हरे डिब्बे में खाद बनने
नीले डिब्बे में सूखा कचरा रीसाइकल होने


धर्मेन्द्र निर्मल

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