शनिवार, 2 दिसंबर 2017

हिन्दी हाइकु विकास यात्रा

हिन्दी हाइकु विकास यात्रा

समीक्षित पुस्तक - “हिन्दी हाइकु, तांका, सेदोका की विकास-यात्रा एक परिशीलन” : डा. सुधा गुप्ता, संयोजन : रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ : अयन प्रकाशन, महरौली, नई दिल्ली : २०१७ : पृष्ठ २३२ : मूल्य – रु. ५००/-

हिन्दी हाइकु की एक समीक्षात्मक विवेचना

डा. सुरेन्द्र वर्मा

डा. सुधा गुप्ता हिन्दी हाइकु रचनाओं की न केवल एक वरिष्ठ और सुप्रतिष्ठित कवियित्री हैं, वे हाइकु काव्य से सम्बंधित अन्य विधाओं, जैसे तांका और सेदोका, आदि में भी दक्षता-प्राप्त हैं। उन्होंने उन अनेक हाइकु और उससे सम्बंधित पुस्तकों की जो उन्हें समय समय पर प्राप्त होती रहीं हैं पुस्तक समीक्षाएं भी लिखी हैं। मुख्यत: अपनी पुस्तक समीक्षाओं द्वारा इन्हीं पुस्तकों का रसास्वादन कराने के लिए. उनका यह नवीनतम ग्रन्थ, “हिन्दी हाइकु---विकासयात्रा” इसी वर्ष प्रकाशित हुआ है। पुस्तक के अपने लम्बे शीर्षक को सार्थकता प्रदान करती हुई उन्होंने इस पुस्तक के लिए विशेषकर ३७ पृष्ठीय एक भूमिका भी लिखी है – हाइकु कविता का परिदृश्य। पुस्तक का संयोजन प्रख्यात साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ ने किया है, जो स्वयं भी हाइकु-क्षेत्र में एक जाने- माने नाम हैं।

डा. सुधा गुप्ता ने अपनी इस भूमिका में तांका और सेदोका के साथ हाइकु के उद्भव, तथा उसके स्वरूप, विकास और काव्य-शिल्प पर तो विकास डाला ही है, साथ ही उन्होंने हिन्दी में हाइकु कविता के प्रवेश, क्रमिक विकास, तथा पुस्तकों और रचनाकारों का भी संक्षिप्त परिचय दिया है। हाइकु लेखन में अभिरुचि रखने वाले किसी भी जिज्ञासु के लिए यह भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

डा. सुधा गुप्ता उन गिने-चुने हाइकु रचनाकारों में हैं जो केवल हाइकु कविताओं को रचती ही नहीं, बल्कि हाइकु संबंधी प्राप्त पुस्तकों पर पुस्तक समीक्षाएं भी लिखती हैं। समीक्षाएं लिखने में उनकी दृष्टि मुख्यत: सकारात्मक रही है। वे संकलनों में से श्रेष्ठ रचनाओं सा संकलन कर उनको उद्धरित करती हैं और उन पर स- विस्तार चर्चा करती हैं। इसके दो लाभ हैं। एक तो पाठक को पुस्तक की श्रेष्ठ कविताओं को पढ़ने से पूरी पुस्तक पढ़ने के लिए जिज्ञासा जाग्रत होती है और दूसरे रचनाकार को और अच्छा लिखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। डा. गुप्ता ने इस प्रकार अनेक नवोदित रचनाकारों को हाइकु लेखन के लिए प्रेरित किया होगा इसमें कोई संदेह नहीं है। वे पुस्तक की कमियों की ओर भी जब संकेत करती हैं तो उनका यह काम इतनी कुशलता से होता है कि रचनाकार अपनी कमतरी से अवगत होते हुए, आलोचक का कृतज्ञ भी हो जाता है। डा. गुप्ता ने जिन नवोदित और प्रतिष्ठित, दोनों ही प्रकार के रचनाकारों की पुस्तकों की पुस्तक- समीक्षाएं की हैं वे क्रमश: इस प्रकार हैं – डा. लक्ष्मण प्रसाद नायक, श्री रमेश चन्द्र शर्मा, डा. भगवतशरण अग्रवाल, डा. रमेश कुमार त्रिपाठी, प्रो, आदित्य प्रताप सिंह, जवाहर इंदु, राजेन्द्र बहादुर सिंह ‘राजन’, नलिनीकान्त, सदाशिव कौतुक, श्याम खरे, रमाकांत श्रीवास्तव, डा. शैल रस्तोगी, डा. रामनारायण पटेल ‘राम’, डा. चन्द्रशेखर शर्मा ‘शेखर’, सिद्धेश्वर, इंदिरा अग्रवाल, प्रदीप श्रीवास्तव, डा. महावीर सिंह, डा. गोपाल बाबू शर्मा, नीलमेंदु सागर, सतोष कुमार सिंह, प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक, राजेन्द्र वर्मा, उर्मिला कौल, हरेराम समीप, आचार्य भगवत दुबे, डा. कुँवर दिनेश सिंह, तथा डा. सुरेन्द्र वर्मा।

इसके अतिरिक्त डा. सुधा गुप्ता ने कतिपय हाइकु-संग्रहों, तथा तांका और सेदोका संग्रहों की भूमिकाएं भी इस पुस्तक में सम्मिलित की हैं। और अंत में विशेषकर उन्होंने श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, के उन दस सेदोकाओं की चर्चा की है जो डा. गुप्ता को “बेहद अच्छे लगे”। इन्हें उन्होंने “अलसाई चांदनी” संग्रह से प्राप्त किया है।

मैं डा. सुधा गुप्ता को उनकी इस नवीनतम पुस्तक, “हिन्दी हाइकु, तांका, सेदोका की विकास यात्रा, एक अनुशीलन” के लिए बधाई देना चाहूँगा तथा साथ ही श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की प्रशंसा करना चाहूँगा जिन्होंने इस पुस्तक का सुन्दर संयोजन किया ही। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक हर हाइकु-प्रेमी को अपने निजी पुस्तक संग्रह में सम्मिलित करने के लिए अवश्य बाध्य करेगी।

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-डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो. ९६२१२२२७७८)

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड / इलाहाबाद- २११००१

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